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एसीपी की शिकायत पर एससी/एसटी एक्ट में दर्ज केस: महिला पत्रकार के खिलाफ जांच रोकने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार
पत्रकार का कहना है कि यह केस उनकी उस शिकायत का जवाबी हमला है जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रदर्शन में एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर पहले ही रोक लगा चुका है।
मुख्य बातें
- न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने एफआईआर की जांच पर रोक लगाने से इनकार किया।
- अदालत ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और दशहरा अवकाश के बाद सुनवाई तय की।
- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस से पत्रकार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने को कहा था।
दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने शुक्रवार को सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत की शिकायत पर एक महिला पत्रकार के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पुलिस जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने एफआईआर रद्द करने की पत्रकार की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और इसे दशहरा अवकाश के तुरंत बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। जब पत्रकार के वकील ने अंतरिम रोक पर जोर दिया तो न्यायाधीश ने कहा, “नहीं, नहीं। ऐसे नहीं। इसे छुट्टियों के तुरंत बाद लगाइए... मैं ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकती।”
भगत का आरोप है कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास एक प्रदर्शन में कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान पत्रकार ने उन पर जातिसूचक टिप्पणियां कीं और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में से एक था। 13 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर में एक दूसरे पत्रकार और एक अज्ञात व्यक्ति का नाम भी है।
पत्रकार की कहानी अलग है। उनका कहना है कि उस दिन जब वे हिरासत में लिए गए एक कार्यकर्ता का वीडियो बना रही थीं, तब भगत ने उन्हें गलत तरीके से छुआ और धक्का दिया। उन्होंने भगत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दी है। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ वकील तनवीर अहमद मीर ने दलील दी कि एससी/एसटी केस “केवल डराने के लिए” दर्ज किया गया ताकि वे अपनी शिकायत वापस ले लें, और यह मामला “आज ही जांच पर पूरी रोक का आदेश दिए जाने लायक” है। उनकी शिकायत पर अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
उन्हें कुछ सुरक्षा पहले से मिली हुई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एससी/एसटी केस में उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया था। दूसरे पत्रकार की एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई टाल दी गई।