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पुलिस ने नेहा बोरा को शांति मुचलके के नोटिस से जुड़े कागज़ सौंपे, मजिस्ट्रेट ने 28 अक्टूबर तक का समय दिया

दिल्ली हाईकोर्ट के दखल से इनकार के एक दिन बाद आइसा अध्यक्ष को पुलिस के केस से जुड़े दस्तावेज़ मिले और कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का समय भी।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (फ़ाइल फ़ोटो)
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: ABP MAJHA / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. मजिस्ट्रेट ने दिल्ली पुलिस से नेहा बोरा को नोटिस के आधार वाली सामग्री देने को कहा, और वह सौंप दी गई।
  2. नोटिस में पूछा गया है कि वे शांति बनाए रखने के लिए एक ज़मानतदार के साथ ₹10,000 का निजी मुचलका क्यों न भरें।
  3. मामला 28 अक्टूबर को फिर स्पेशल एग्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने आएगा।

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को वह सामग्री सौंप दी, जिसके आधार पर एक मजिस्ट्रेट ने उन्हें शांति बनाए रखने का नोटिस दिया था। उन्हें जवाब देने का समय भी दिया गया। एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया था।

मंदिर मार्ग में स्पेशल एग्ज़ीक्यूटिव मजिस्ट्रेट रितु राज, जो सहायक पुलिस आयुक्त हैं, ने मामले की सुनवाई की। मजिस्ट्रेट ने पुलिस को बोरा को केस से जुड़ी सामग्री देने का निर्देश दिया और सामग्री मिलने के बाद उन्हें उसे पढ़कर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस में बोरा से पूछा गया है कि वे उतनी ही राशि के एक ज़मानतदार के साथ ₹10,000 का निजी मुचलका क्यों न भरें। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, 16 अक्टूबर को लोगों से मंडी हाउस पर जुटने को कहा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की कोशिश की। उन्हें 16 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया और अगले दिन छोड़ा गया।

शुक्रवार को हाईकोर्ट के जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा था, “विवादित नोटिस बीएनएसएस के अध्याय IX के तहत कारण बताओ नोटिस की शर्तें पूरी करता है।” उन्होंने यह भी पाया कि इस चरण में सुप्रीम कोर्ट के तय सुरक्षा उपायों का उल्लंघन नहीं हुआ। बोरा कह चुकी हैं कि आइसा के सदस्य शांति मुचलकों पर दस्तखत नहीं करेंगे।

शनिवार की सुनवाई में पुलिस के वकीलों ने कहा कि बोरा ने कार्यवाही से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, और उन्हें अपनी बात सार्वजनिक रूप से नहीं बल्कि अदालत में रखनी चाहिए। बोरा की ओर से वकील अभिक चिमनी और प्रांजल अबरोल पेश हुए।