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पश्चिम मेदिनीपुर में ईसाई परिवारों पर हमला: वेणुगोपाल ने अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी से कार्रवाई मांगी

कांग्रेस महासचिव का कहना है कि पाटलापुर गांव में तीन परिवारों को धर्म छोड़ने से इनकार करने पर पीटा गया और फिर दुर्गा पूजा पंडाल में उनसे 'शुद्धिकरण' की रस्म करवाई गई।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल और पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोणा का एक पुराना मंदिर (फ़ाइल फ़ोटो)
कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल और पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोणा का एक पुराना मंदिर (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Fotokannan at Malayalam Wikipedia / Wikimedia Commons; Amitabha Gupta / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. के सी वेणुगोपाल ने चंद्रकोना में कथित हमले को लेकर अमित शाह और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखा।
  2. हमला शुरू होने के दो दिन बाद, 20 अक्टूबर को पुलिस ने 13 लोगों को नामजद कर एफआईआर दर्ज की।
  3. वेणुगोपाल ने कहा कि हमलावर "न हिंदू धर्म के प्रतिनिधि हैं, न बंगाल की संस्कृति के"।

कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर पश्चिम मेदिनीपुर जिले में तीन ईसाई परिवारों पर हुए हमले में कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इन परिवारों पर धर्म छोड़ने से इनकार करने के कारण बर्बर हमला हुआ।

शनिवार को भेजे गए पत्र में वेणुगोपाल ने लिखा है कि यह हमला 18 से 20 अक्टूबर के बीच चंद्रकोना थाना क्षेत्र के पाटलापुर गांव में हुआ। पत्र के मुताबिक, कथित तौर पर बजरंग दल से जुड़ा एक समूह परिवारों के घरों में घुसा और ईसाई धर्म छोड़ने की मांग की। इनकार करने पर उनकी पिटाई की गई।

पत्र के अनुसार, एक महिला के सिर पर वार किया गया और वह बेहोश हो गई। महिलाओं के कपड़े उतारकर उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश की गई, और 15 साल की एक लड़की का गला दबाया गया तथा उसे अगवा करने और बलात्कार की धमकी दी गई।

पत्र में कहा गया है कि 19 अक्टूबर को परिवारों को पड़ोस के डिंगल गांव के एक दुर्गा पूजा पंडाल में ले जाया गया। वहां लोगों के सामने उनसे अंजलि दिलवाई गई और “शुद्धिकरण” की रस्म करवाई गई, और धमकी दी गई कि पुलिस के पास गए तो जिंदा जला दिए जाएंगे।

‘मूकदर्शक’ पुलिस

वेणुगोपाल ने पुलिस पर परिवारों को निराश करने का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, पहले दिन की शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, और एक वकील के दखल के बाद ही 20 अक्टूबर को 13 लोगों को नामजद कर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें हत्या की कोशिश, आपराधिक अतिचार, निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला, आपराधिक धमकी, महिलाओं की लज्जा भंग करने और चोरी जैसे अपराध शामिल हैं।

उन्होंने पुलिस को “मूकदर्शक” बताया और कहा कि “संघी गुंडों” के हमलों को “छूट” दी गई।

एक्स पर उन्होंने लिखा कि परिवारों के साथ हुआ बर्ताव “दिल दहला देने वाला” है और “जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”

‘दोनों के लिए शर्म’

पत्र में पंडाल में करवाई गई रस्म को शिकायत के केंद्र में रखा गया है। वेणुगोपाल ने लिखा, “हिंसा की धमकी देकर किसी व्यक्ति से दूसरे धर्म की रस्में करवाना सिर्फ पीड़ितों पर हमला नहीं है।” उन्होंने इसे केवल अपराध नहीं, संवैधानिक सवाल माना। “ऐसा करने वाले न हिंदू धर्म के प्रतिनिधि हैं, न बंगाल की संस्कृति के; वे दोनों को शर्मसार करते हैं।”

उन्होंने नागरिक संगठनों के रिकॉर्ड का हवाला दिया, जिनके मुताबिक इस साल 13 मई से 20 सितंबर के बीच पश्चिम बंगाल के 13 जिलों में ईसाइयों को निशाना बनाने की कम से कम 60 घटनाएं हुईं।

उनकी मांगें

वेणुगोपाल ने भारतीय न्याय संहिता की सबसे कड़ी धाराओं के तहत सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी, और नफरत फैलाने या आस्था के मामलों में जोर-जबरदस्ती करने वाले संगठनों और लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वे चाहते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री, दोनों हस्तक्षेप करें।

शनिवार दोपहर तक न राज्य सरकार ने और न पुलिस ने पत्र पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी थी, और बजरंग दल की ओर से भी कोई जवाब नहीं आया था।