राज्यपश्चिम बंगाल
चोरबागान भगदड़ के घायलों को निजी अस्पताल भेजने के फैसले का सुवेंदु अधिकारी ने किया बचाव
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पताल भेजे गए किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में कमियां मानीं और पूछा कि फैसले की आलोचना करने वाले डॉक्टर ड्यूटी पर थे या नहीं।
मुख्य बातें
- अधिकारी ने कहा कि निजी अस्पताल भेजे जाने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।
- उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों का ढांचा निजी अस्पतालों जैसा बनाने में दो साल लगेंगे।
- 19 की जगह 60 मौतों का दावा करने वाली पोस्ट पर कूचबिहार का एक व्यक्ति गिरफ्तार।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को चोरबागान पंडाल भगदड़ के घायलों को निजी अस्पतालों में भेजने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इसी कदम से मरने वालों की संख्या बढ़ने से रुकी।
अधिकारी ने कहा, “हमने मौके पर ही घायलों को निजी अस्पतालों में भेजने का फैसला किया ताकि मृतकों की संख्या न बढ़े।” उन्होंने कहा, “निजी अस्पताल भेजे जाने के बाद एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।”
शनिवार रात उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी और कम से कम 25 घायल हुए थे। घायलों में से 14 को निजी अस्पतालों में ले जाया गया। इस फैसले की आलोचना हुई, जिसमें कुछ डॉक्टर भी शामिल थे।
“कुछ कमियां हैं”
मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों की कमियों से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा, “कुछ कमियां हैं। निजी अस्पतालों जैसा ढांचा तैयार करने में दो साल लगेंगे।”
उन्होंने आलोचना करने वालों पर भी सवाल उठाए। अधिकारी ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि रेफर के बारे में बोलने वाले डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर उस समय ड्यूटी पर थे या नहीं, क्योंकि ड्यूटी छोड़ना नियमों के खिलाफ है।
उन्होंने साल्ट लेक स्थित स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय स्वास्थ्य भवन के नियंत्रण कक्ष में स्क्रीन पर अस्पतालों की निगरानी की और पूजा के बाकी दिनों के लिए विभाग की तैयारियों की समीक्षा के बाद यह बात कही।
जमीन पर नाराजगी
आलोचना सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों और दर्शनार्थियों ने पुलिस पर भीड़ संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस और आपदा प्रबंधन दल देर से पहुंचे और बचाव कार्य शुरू करने में भी देरी हुई। भगदड़ के सिलसिले में अब तक सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
जांचकर्ता अब तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि उस रात पंडाल में भ्रामक घोषणा किसने की थी, जिससे दहशत फैली। पंडाल में 30 सीसीटीवी कैमरे थे, जिनमें से 13 की फुटेज सुरक्षित कर जांची जा रही है।
झूठे आंकड़े पर गिरफ्तारी
कोलकाता पुलिस ने हादसे को लेकर गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया खातों पर नजर रखना भी शुरू किया है। सोमवार रात कूचबिहार जिले के रहने वाले ऐनुल हक को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसने किसी दूसरी जगह के ऐसे ही हादसे का पुराना वीडियो साझा किया और दावा किया कि 19 नहीं, 60 लोगों की मौत हुई है।
अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल ने गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान बताई। उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो समूहों के बीच दुश्मनी या वैमनस्य फैलाने वाले झूठे बयानों से जुड़ी है। पुलिस जांच कर रही है कि उसने अकेले ऐसा किया या किसी संगठित समूह के साथ। लोगों से भ्रामक पोस्ट की सूचना देने और बिना पुष्टि के कुछ भी साझा न करने को कहा गया है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को भगदड़ की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग बनाने का निर्देश दिया।