राज्यपश्चिम बंगाल
चोरबागान भगदड़: कलकत्ता हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज से जांच का आदेश दिया, मौजूदा जज की मांग ठुकराई
नवमी के दिन विशेष सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे की अगुवाई वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार से जांच आयोग बनाने को कहा। कोलकाता के पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी।

मुख्य बातें
- कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग बनाने का निर्देश दिया।
- पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश का हवाला देकर कहा कि मौजूदा जज को नियुक्त नहीं किया जा सकता।
- 17 अक्टूबर को चोरबागान पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि वह कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ की जांच के लिए हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाए। शनिवार शाम हुए इस हादसे में 19 लोगों की जान गई थी।
मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि आयोग यह पता लगाए कि भगदड़ किस वजह से मची और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अदालत ने राज्य सरकार की यह मांग नहीं मानी कि जांच की कमान हाईकोर्ट के किसी मौजूदा जज को दी जाए। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का एक निर्देश ऐसी नियुक्ति के आड़े आता है।
दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बीच नवमी के दिन पीठ ने विशेष सुनवाई की। यह सुनवाई एक वकील की जनहित याचिका पर हुई, जिसमें हादसे की स्वतंत्र और जल्द जांच की मांग की गई थी।
सरकार ने क्या कहा था
यह आदेश मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की घोषित जांच की रूपरेखा बदल देता है। अधिकारी ने कहा था कि हाईकोर्ट के एक मौजूदा जज विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई करेंगे और उसके नतीजे सार्वजनिक किए जाएंगे। अब मौजूदा जज का रास्ता बंद होने के बाद सरकार को औपचारिक आयोग के लिए किसी रिटायर्ड जज का नाम तय करना होगा।
पुलिस भगदड़ के मामले में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर चुकी है और पूजा समिति के सचिव समेत सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं। एक उच्चस्तरीय सुरक्षा टीम कोलकाता के बड़े पंडालों का निरीक्षण कर रही है और प्रवेश द्वारों पर वीआईपी कतार और खाने के स्टॉल पर रोक लगा चुकी है।
चोरबागान की वह रात
17 अक्टूबर को बारिश शुरू होते ही उत्तरी कोलकाता के इस पंडाल के बाहर खड़ी भीड़ आगे की ओर उमड़ पड़ी। भीड़ के दबाव में एक निकास द्वार गिर गया और उसके बाद मची भगदड़ में 19 लोग मारे गए। हादसे के बाद सरकार ने त्योहार से जुड़े अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए।
आगे क्या
अब राज्य को आयोग का गठन कर उसकी जांच की शर्तें तय करनी होंगी। अब तक सामने आए आदेश में रिपोर्ट के लिए कोई समय सीमा नहीं बताई गई है और अगली सुनवाई की तारीख भी सार्वजनिक नहीं हुई है। याचिकाकर्ता ने ऐसी जांच मांगी थी जो प्रशासन से स्वतंत्र भी हो और तेज भी। आयोग की बनावट और उसकी समय सारिणी इन्हीं दो कसौटियों पर परखी जाएगी।