आईआईटी दिल्ली के सम्मेलन में भाषिणी ने शोध और थीसिस के लिए भारतीय भाषाओं वाला एआई पेश किया
10 अरब से ज्यादा इन्फरेंस पार कर चुके सरकारी भाषा एआई प्लेटफॉर्म ने रविवार को खत्म हुए ईटीडी-2026 सम्मेलन में विश्वविद्यालयों को शोध कार्य के अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन के टूल दिखाए।

मुख्य बातें
- भाषिणी का कहना है कि वह कुल 10 अरब एआई इन्फरेंस पार कर चुका है।
- यह टेक्स्ट के लिए 36 भारतीय भाषाओं और आवाज के लिए 23 भाषाओं के साथ 35 विदेशी भाषाओं में काम करता है।
- इसका अनुवाद प्लग-इन 800 से ज्यादा सरकारी वेबसाइटों पर चलता है।
भारतीय भाषाओं के लिए सरकार के एआई प्लेटफॉर्म भाषिणी ने इस सप्ताहांत विश्वविद्यालयों और पुस्तकालयों के सामने अपने टूल पेश किए। उसने दिखाया कि कैसे थीसिस और शोध पत्रों का अनुवाद और ट्रांसक्रिप्शन करके उन्हें किसी भी भारतीय भाषा में पढ़ने लायक बनाया जा सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने आईआईटी दिल्ली में 23 से 25 अक्टूबर तक चले इलेक्ट्रॉनिक थीसिस और शोध प्रबंधों पर 29वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ईटीडी-2026) में हिस्सा लिया।
डिवीजन ने बताया कि भाषिणी कुल 10 अरब एआई इन्फरेंस पार कर चुका है, यानी उसके मॉडलों ने इतने अनुरोध निपटाए हैं। यह टेक्स्ट के लिए 36 भारतीय भाषाओं और आवाज के लिए 23 भाषाओं के साथ 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में काम करता है, और इसका अनुवाद प्लग-इन 800 से ज्यादा सरकारी वेबसाइटों पर इस्तेमाल होता है।
बैशाली चक्रवर्ती ने प्लेटफॉर्म पर एक कार्यशाला का नेतृत्व किया, और प्रतिनिधियों ने श्रुतलेख का लाइव प्रदर्शन देखा, जो बोली गई बात को तुरंत लिखने के साथ उसका अनुवाद भी करता है। दिखाए गए दूसरे टूल में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के लिए बना भाषिणी प्रगति शामिल था, जो 100 से 500 पन्नों तक के लंबे दस्तावेजों के अनुवाद और समीक्षा का वर्कबेंच है। किताबों, पांडुलिपियों और मौखिक इतिहास को डिजिटल रूप देने के लिए ग्रंथिका भी पेश किया गया।
डिवीजन के वरिष्ठ प्रबंधक (वित्त) हर्षद शर्मा ने इसका मकसद “शोध और विद्वत ज्ञान को भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाना” बताया।
प्रतिनिधियों ने पूछा कि अकादमिक पीडीएफ के लिए मशीन अनुवाद कितना भरोसेमंद होगा। डिवीजन का जवाब था कि खास विषयों के लिए प्रशिक्षित अनुवाद मॉडलों को इंसानी समीक्षा के साथ जोड़ा जाए। उसने इनफ्लिबनेट के थीसिस भंडार शोधगंगा के लिए यह प्रक्रिया ढालने पर चर्चा की और विश्वविद्यालयों व पुस्तकालयों को अपने-अपने उपयोग के लिए साथ काम करने का न्योता दिया।