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दिल्ली के स्मॉग का स्रोत हर घंटे बताएगी ₹80 करोड़ की नई लैब

जितेंद्र सिंह ने शनिवार को आईआईटीएम की दिल्ली शाखा में AATAL लैब का उद्घाटन किया। सर्दियों के स्मॉग से पहले यह एजेंसियों को बताएगी कि किसी भी समय प्रदूषण किन स्रोतों से बढ़ रहा है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान का परिसर (फ़ाइल फ़ोटो)
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान का परिसर (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: DesiBoy101 / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लैबोरेटरी मिशन मौसम के तहत ₹80 करोड़ की लागत से बनी है।
  2. यह वाहन, उद्योग, पराली जलाने और धूल जैसे स्रोतों की पहचान कर हर एक का हिस्सा आंकती है।
  3. जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान एक समय दिल्ली के प्रदूषण में परिवहन का हिस्सा करीब 25% था।

दिल्ली को एक ऐसी नई प्रयोगशाला मिली है जो हर सर्दी उठने वाले सवाल का जवाब देने के लिए बनी है: आखिर यह स्मॉग आता कहां से है?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) की दिल्ली शाखा में इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लैबोरेटरी (AATAL) का उद्घाटन किया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इसे मिशन मौसम के तहत ₹80 करोड़ की लागत से बनाया है और इसे दुनिया में अपनी तरह की पहली एकीकृत सुविधा बताया है।

यह लैब सिर्फ यह नहीं बताती कि हवा कितनी खराब है। यह गैसों और एरोसोल, जिनमें बारीक कण (पीएम2.5), धातुएं और ज़हरीले तत्व शामिल हैं, का विश्लेषण कर पता लगाती है कि प्रदूषण किन चीज़ों से बना है, किन स्रोतों से आ रहा है, हर स्रोत का कितना हिस्सा है और सेहत के लिए कितना खतरा है।

सिंह ने कहा, “पहले चर्चा ज़्यादातर इसी पर घूमती थी कि प्रदूषण का स्तर 100 है या 200।” उन्होंने कहा, “यह सुविधा हमें प्रदूषण की बनावट और अलग-अलग स्रोतों के योगदान को समझने में मदद करेगी।”

कौन ज़िम्मेदार, और कब

लैब जिन स्रोतों पर नज़र रखती है, वे दिल्ली की सर्दी के जाने-पहचाने कारण हैं: वाहनों का धुआं, उद्योग, बायोमास और पराली जलाना, निर्माण और सड़क की धूल, और पड़ोसी इलाकों से उड़कर आने वाला प्रदूषण। चूंकि यह लगभग रियल टाइम में काम करती है, इसलिए दिन भर और पूरे मौसम में इनका हिस्सा कैसे बदलता है, यह दिखा सकती है।

उद्घाटन के दौरान सिंह ने एक लाइव रीडिंग की ओर ध्यान दिलाया, जिसके मुताबिक उस समय शहर के प्रदूषण में परिवहन का हिस्सा करीब 25% था।

AATAL को आईआईटीएम की निर्णय-सहायता प्रणाली AIRWISE से जोड़ा गया है, जो निगरानी के आंकड़ों, स्रोतों के अनुमान और अगले 72 घंटे के 400 मीटर रिज़ॉल्यूशन वाले वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान को एक साथ लाती है।

एजेंसियों के लिए बनी

मंत्रालय का कहना है कि यह सुविधा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और दूसरी एजेंसियों को मापे गए आंकड़े देगी, ताकि वे सही जगह कार्रवाई कर सकें और देख सकें कि कदम कारगर रहे या नहीं। इसमें ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत चरणों में लगने वाली पाबंदियां भी शामिल हैं। मंत्रालय को उम्मीद है कि AATAL और AIRWISE मिलकर एजेंसियों को प्रदूषण चरम पर पहुंचने से पहले ही रोकथाम के कदम तय करने में मदद करेंगे।

सिंह ने पूरी सरकार के मिलकर काम करने की ज़रूरत बताई, जिसमें वैज्ञानिक, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी संस्थाएं तालमेल से काम करें।

उद्घाटन में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव टी. श्रीनिवास कुमार, आईआईटीएम के निदेशक ए. सूर्यचंद्र राव और भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र मौजूद थे।

यह लैब ऐसे समय शुरू हुई है जब दिल्ली-एनसीआर अपने सालाना स्मॉग के मौसम में प्रवेश कर रहा है, जब पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का धुआं शहर के अपने उत्सर्जन में जुड़ जाता है। मंत्रालय ने कहा कि वायु प्रदूषण को लेकर लोगों की चिंता को देखते हुए इस सुविधा के लिए दिल्ली-एनसीआर को चुना गया।

मूल दस्तावेज़