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जापान का एमएमएक्स यान मंगल की ओर रवाना, फोबोस की मिट्टी पहली बार धरती पर लाने का लक्ष्य
एच3 रॉकेट ने मंगलवार तड़के जापान समय पर तानेगाशिमा से मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन यान को प्रक्षेपित किया। जाक्सा ने पुष्टि की कि यान ऊपरी चरण से अलग होकर मंगल की राह पर है।

मुख्य बातें
- एमएमएक्स एच3 रॉकेट के ऊपरी चरण से अलग होकर मंगल की राह पर है।
- यान के 2027 में मंगल पहुंचने और फोबोस पर दो बार उतरने की योजना है।
- फोबोस की कम से कम 10 ग्राम मिट्टी लेकर एक कैप्सूल 2031 में ऑस्ट्रेलिया लौटेगा।
मंगल के किसी चंद्रमा से पहली बार नमूने लाने का जापान का मिशन रवाना हो गया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (एमएमएक्स) यान को लेकर एच3 रॉकेट ने मंगलवार तड़के दक्षिणी जापान के तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। प्रक्षेपण की खिड़की स्थानीय समय सुबह 4:41 बजे (भारतीय समय रात 1:11 बजे) खुली थी।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) ने बाद में पुष्टि की कि एमएमएक्स एच3 की दसवीं उड़ान के ऊपरी चरण से अलग हो गया है और मंगल की ओर जाने वाले रास्ते पर है। एच3 रॉकेट मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज बनाती और चलाती है।
मिशन क्या करेगा
एमएमएक्स के 2027 में मंगल पहुंचने की योजना है। वहां यह लगभग तीन साल तक मंगल के दो छोटे चंद्रमाओं, फोबोस और डीमोस, का अध्ययन करेगा। मुख्य लक्ष्य करीब 22 किलोमीटर चौड़ा फोबोस है। यान इसका नक्शा बनाएगा, इसके गुरुत्व और संरचना को मापेगा और फिर दो बार इसकी सतह पर उतरकर कम से कम 10 ग्राम सामग्री जमा करेगा।
नमूने दो उपकरणों से लिए जाएंगे। रोबोटिक भुजा पर लगा एक कोरर सतह से करीब 2 सेंटीमीटर नीचे की सामग्री खोदेगा, जबकि ब्लू ओरिजिन के स्वामित्व वाली कंपनी हनीबी रोबोटिक्स का बनाया न्यूमैटिक सैंपलर शुद्ध नाइट्रोजन गैस के झोंकों से ढीली मिट्टी को एक डिब्बे में उड़ाएगा।
इससे पहले एमएमएक्स चार पहियों वाला फ्रांसीसी-जर्मन रोवर इडेफिक्स उतारेगा, जो लगभग 100 दिन फोबोस की सतह की पड़ताल करेगा। इसे इस तरह बनाया गया है कि उतरते समय उछलने पर भी यह संभल जाए और उलटा गिरने पर खुद सीधा हो सके।
फोबोस क्यों अहम है
वैज्ञानिक अब तक तय नहीं कर पाए हैं कि मंगल के चंद्रमा कहां से आए। एक मत है कि ये क्षुद्रग्रह हैं जिन्हें मंगल के गुरुत्व ने खींच लिया। दूसरा मत है कि किसी बड़े पिंड के मंगल से टकराने पर उछले मलबे से ये बने। धरती की किसी प्रयोगशाला में रखा नमूना इस सवाल का जवाब दे सकता है। जाक्सा के मुताबिक मिशन का लक्ष्य “मंगल क्षेत्र और सौरमंडल के निर्माण को स्पष्ट करना” है।
यान में प्रणोदन, अन्वेषण और वापसी के लिए तीन मॉड्यूल हैं, 11 उपकरण हैं और इसकी ऊंचाई 5.3 मीटर है। इसकी लागत करीब 57.8 करोड़ डॉलर आंकी गई है।
आगे क्या
डीमोस के पास से कई बार गुजरने के बाद एमएमएक्स के 2030 में मंगल क्षेत्र छोड़ने की योजना है। इसका वापसी कैप्सूल 2031 में ऑस्ट्रेलिया के एक दूरदराज इलाके में उतरेगा। ऐसा हुआ तो यह मंगल के आसपास तक की पहली आने-जाने वाली यात्रा होगी और धरती के अलावा किसी और चंद्रमा से लाया गया पहला नमूना भी।
मूल दस्तावेज़
- JAXA press release, 20 October 2026JAXA, 20 अक्टूबर 2026