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सीबीआई ने संभाली परविंदर झोटा हत्याकांड की जांच, डीआईजी के नेतृत्व में टीम मानसा पहुंची

एजेंसी ने बुधवार को मामला दोबारा दर्ज किया। वह यह भी देखेगी कि नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या का केमिस्ट दुकानों पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की खुली बिक्री से कोई संबंध है या नहीं।

संपादकीय डेस्क से · मानसाप्रकाशित
पंजाब का मानसा शहर (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
पंजाब का मानसा शहर (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Kuldeepburjbhalaike / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. सीबीआई ने बुधवार को झोटा हत्याकांड दोबारा दर्ज किया और मानसा पुलिस से रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए।
  2. जांचकर्ता केमिस्ट दुकानों पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री से जुड़े पहलू भी खंगालेंगे।
  3. एजेंसी मुख्य आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार की हिरासत मांगेगी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली। एजेंसी ने मामला दोबारा दर्ज किया और एक वरिष्ठ उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के नेतृत्व में टीम मानसा भेजी।

स्थानीय पुलिस को औपचारिक पत्र भेजने के बाद टीम मंगलवार रात मानसा थाने पहुंची। अधिकारियों ने कहा, “सीबीआई की टीम रिकॉर्ड और जब्त सामान अपने कब्जे में लेने के लिए कल रात मानसा थाने पहुंची।” फोरेंसिक विशेषज्ञ, ड्रग कंट्रोलर और दूसरे विशेषज्ञ भी रास्ते में थे। झोटा के परिवार से बुधवार सुबह 11:30 बजे मानसा सर्किट हाउस में पूछताछ होनी थी।

सीबीआई क्या जांचेगी

गोलीबारी के अलावा जांचकर्ता यह भी देखेंगे कि क्या हत्या का संबंध इलाके की केमिस्ट दुकानों पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की खुली बिक्री से है, जिसके खिलाफ झोटा आवाज उठा रहे थे। एजेंसी मुख्य आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार और दूसरों की हिरासत मांगेगी।

45 साल के झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा की एक केमिस्ट दुकान में फेसबुक पर लाइव स्ट्रीम के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्होंने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने के आरोप पर कुमार से सवाल किया था। गोलीबारी में झोटा की मौत हो गई और चार लोग घायल हुए। मेडिकल स्टोर के मालिक कुमार को बाद में राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। हत्या के बाद दुकान में आगजनी हुई और आरोपी से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई की गई।

सियासी लड़ाई बना मामला

यह हत्या पंजाब की नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार और भाजपा के बीच लगातार टकराव का मुद्दा बन गई है। झोटा के परिवार, स्थानीय एक्शन कमेटियों और विपक्षी दलों ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राज्य दौरे के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामला सीबीआई को सौंप दिया।

शाह ने मंगलवार को झोटा के परिजनों से मुलाकात की और राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसके संरक्षण में “चिट्टा” यानी नशीले पदार्थों के तस्कर फल-फूल रहे हैं। आप के एक मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के नशा संकट को सियासी मौके की तरह देख रहा है।

अब जांच शाह के मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय एजेंसी के पास है, और मामला आगे बढ़ने के साथ दोनों पक्ष इस बात का इस्तेमाल कर सकते हैं। सीबीआई का पहला काम पिछले आठ दिनों में पंजाब पुलिस के जुटाए सबूतों को सुरक्षित करना और यह तय करना है कि आगे किससे पूछताछ हो।