राज्यदिल्ली
बारिश ने एक दिन के लिए दिल्ली की हवा साफ की, विशेषज्ञ बोले प्रदूषण गया नहीं
सप्ताहांत की बारिश से राजधानी का एक्यूआई 'मध्यम' श्रेणी में आ गया, लेकिन इस हफ्ते हवा फिर 'खराब' होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बारिश प्रदूषकों को सिर्फ इधर-उधर करती है।

मुख्य बातें
- रविवार सुबह दिल्ली का एक्यूआई 167 था, जबकि 54 में से 11 स्टेशन अब भी 'खराब' श्रेणी में थे।
- पूर्व चेतावनी प्रणाली के मुताबिक 25 से 27 अक्टूबर तक हवा 'खराब' रह सकती है।
- दिल्ली-एनसीआर में 21 अक्टूबर से ग्रैप का पहला चरण लागू है।
इस सप्ताहांत दिल्ली ने कुछ राहत की सांस ली, लेकिन वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दो रातों की आंधी-बारिश से मिली राहत टिकने वाली नहीं है। उनके मुताबिक बारिश ने राजधानी की गंदी हवा के स्रोतों पर कोई असर नहीं डाला है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक रविवार सुबह 9 बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 167 था, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। फिर भी 54 में से 11 निगरानी स्टेशन ‘खराब’ श्रेणी में बने रहे। इनमें सबसे ऊपर आईआईटी दिल्ली 245 और अलीपुर 233 पर थे।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि 25 से 27 अक्टूबर तक हवा ‘खराब’ श्रेणी में रहेगी और उसके बाद ‘खराब’ और ‘मध्यम’ के बीच झूलती रहेगी।
धुलना या उड़ जाना
पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि सप्ताहांत का सुधार उत्सर्जन घटने का नहीं, मौसम का नतीजा है। पर्यावरण वैज्ञानिक हिश्मी जमील हुसैन ने कहा, “बारिश हवा में मौजूद कुछ कणों को हटा देती है, और तेज हवाएं कुछ दूसरे कणों को बिखेर देती हैं।”
दिल्ली के पर्यावरणविद मनु सिंह ने यह फर्क साफ शब्दों में रखा। उन्होंने कहा, “अहम वैज्ञानिक फर्क वातावरण से प्रदूषकों को हटाने और उन्हें सिर्फ दूसरी जगह फैला देने के बीच है।” पर्यावरण सलाहकार दीवान सिंह ने कहा कि मौसम पर निर्भर रहने का मतलब है कि “हम प्रदूषण घटाने के बजाय उसके बिखरने पर ध्यान दे रहे हैं।”
संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट टेक्नोलॉजी सेंटर एंड नेटवर्क के सलाहकार बोर्ड के पूर्व सदस्य सौम्य दत्ता ने 10 से 14 अक्टूबर की बारिश के बाद की स्थिति याद दिलाई, जब कुछ ही दिनों में सूचकांक फिर करीब 300 तक पहुंच गया था। उनका तर्क है कि शहर के भीतर प्रदूषण के बड़े स्रोतों पर कार्रवाई के बिना हर बारिश बस एक छोटा ठहराव है।
पूर्वानुमान और त्योहार
टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के एस एन मिश्रा ने कहा, “अक्टूबर में कभी-कभार बारिश या आंधी आना अपेक्षाकृत दुर्लभ है।” उनका अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवात 28 से 30 अक्टूबर के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ से मिलेगा, जिससे दिल्ली में फिर हल्की बारिश हो सकती है। उनके मुताबिक दिवाली तक हवा ज्यादातर ‘मध्यम’ और कभी-कभी ‘खराब’ रहेगी, जबकि दिवाली पर पटाखे प्रदूषण का भारी बोझ बढ़ा सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी 29 और 30 अक्टूबर को शहर में हल्की बारिश का अनुमान जताया है।
पाबंदियां जारी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 21 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू किया था। उसी दिन शहर में इस मौसम की पहली ‘खराब’ हवा 245 दर्ज हुई थी। पहला चरण एक्यूआई 201 से 300 के बीच होने पर लागू होता है और इसमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, खुले में कचरा जलाने पर रोक और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच शामिल है। रविवार को चरण में किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मौसम में इतनी देर से ग्रैप लागू होने को “हाल के वर्षों में अभूतपूर्व” बताया है। सरकार की 11 सूत्री शीतकालीन योजना में धूल नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों की पहचान शामिल है, और एक कमांड सेंटर निर्माण स्थलों पर नजर रखता है।