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हरियाणा में बिजली हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, विज बोले, काम पर लौटें कर्मचारी

गुरुग्राम और नूंह के लिए निजी वितरण लाइसेंस के विरोध में करीब 40,000 बिजली कर्मचारी हड़ताल पर हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में घरों, पानी की सप्लाई और कारखानों पर असर पड़ा है।

संपादकीय डेस्क से · चंडीगढ़प्रकाशित
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज (फ़ाइल फ़ोटो)
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Biswarup Ganguly / Wikimedia Commons, CC BY 3.0

मुख्य बातें

  1. करीब 40,000 बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 24 अक्टूबर तक तीन दिन की हड़ताल पर हैं।
  2. उनकी मांग है कि गुरुग्राम और नूंह के लिए एचईआरसी का 25 साल का समानांतर लाइसेंस रद्द हो।
  3. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत को तैयार है।

हरियाणा की बिजली हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन में पहुंच गई। गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह के बड़े हिस्सों में बिजली की सप्लाई अब भी ठीक नहीं है, और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने हड़ताली कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की।

विज ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा, “हड़ताल खत्म करें और ड्यूटी पर लौटें। हम सभी विकल्पों पर बातचीत के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि इन विकल्पों में बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कदम भी शामिल है। यह प्रावधान राज्य सरकार को अपने बिजली नियामक को नीतिगत निर्देश देने का अधिकार देता है। बाद में खबर आई कि मंत्री ने कहा है कि हड़ताल कुछ ही घंटों में खत्म हो जाएगी और यूनियन नेता उनसे मिलने को तैयार हो गए हैं।

कर्मचारी हड़ताल पर क्यों

हड़ताल हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बुलाई है, जो नियमित और ठेका कर्मचारियों तथा बिजली इंजीनियरों का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें से करीब 40,000 लोगों ने 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से तीन दिन, यानी 24 अक्टूबर तक, काम बंद कर दिया है।

विरोध हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) के 19 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ है। इस आदेश से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का 25 साल का समानांतर लाइसेंस मिला है, जो राज्य में अपनी तरह का पहला लाइसेंस है। कर्मचारी चाहते हैं कि इसे रद्द किया जाए और राज्य समानांतर लाइसेंस के खिलाफ साफ नीति बनाए।

मोर्चा के नेता देवेंद्र सिंह हुड्डा कह चुके हैं कि यह हड़ताल वेतन या भत्तों के लिए नहीं, बल्कि निजीकरण रोकने और किसानों व उपभोक्ताओं के लिए सस्ती बिजली बचाने के लिए है। इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने आंदोलन का समर्थन किया है। लांबा ने सवाल किया कि अगर मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री निजीकरण के खिलाफ हैं तो राज्य ने लाइसेंस के खिलाफ पहले कदम क्यों नहीं उठाया।

संयुक्त किसान मोर्चा के घटक संगठनों, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू, एटक, इंटक व एआईयूटीयूसी जैसी यूनियनों ने समर्थन में प्रदर्शन किए हैं। बिजली यूनियनों की एक राष्ट्रीय समन्वय संस्था ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों से हड़तालियों की जगह काम न करने को कहा है।

अंधेरे घर, सूखे नल

हड़ताल के पहले दिन अनुमानित 10 लाख उपभोक्ता प्रभावित हुए। गुरुग्राम में 12 घंटे में 3,000 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। सेक्टर 5, 7, 10ए और 52, पालम विहार और दौलताबाद में बिजली गुल रही। लोगों ने कहा कि शिकायत केंद्रों ने जवाब देना बंद कर दिया था, और कुछ इलाकों में पीने के पानी की किल्लत हो गई।

गुरुग्राम के सेक्टर 37, कादीपुर और बसई में कारखानों का काम रुक गया। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी ने चेतावनी दी कि नुकसान करोड़ों रुपये में जा सकता है। फरीदाबाद के एनआईटी-2 में करीब 13 घंटे बिजली न रहने से नल सूख गए तो लोगों ने सड़क जाम कर दी, जिसे पुलिस ने हटाया। नूंह में पुन्हाना, नगीना और फिरोजपुर झिरका प्रभावित रहे। शुक्रवार को कुछ गांव वालों ने कहा कि जब तक बिजली नहीं लौटेगी, वे सड़क से नहीं हटेंगे।

सरकार का पक्ष

विज का कहना है कि सरकार खुद निजीकरण के खिलाफ है और उसने एचईआरसी के आदेश को बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती देकर रोक मांगी है। उन्होंने एचईआरसी को केंद्रीय कानून के तहत बनी स्वायत्त संस्था बताया और कर्मचारियों से सरकारी वकीलों की मदद करने या अपना वकील रखने को कहा। गुरुवार को उन्होंने कहा था, “हड़ताल का रास्ता छोड़िए और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई में हमारे साथ आइए।”

गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह और कर्मचारियों के बीच बातचीत से गतिरोध नहीं टूटा। जिला प्रशासन ने अस्पतालों, जल संयंत्रों और मेट्रो के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम के आदेश दिए हैं।