राज्यमहाराष्ट्र
महाराष्ट्र में नौसेना के पहले 282 अग्निवीर बने पुलिस कांस्टेबल, परीक्षा की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि अग्निपथ सेवा पूरी कर लौटे राज्य के नौसैनिकों को पिछले महीने मंजूर नीति के तहत नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं।

मुख्य बातें
- महाराष्ट्र ने नौसेना के 282 पूर्व अग्निवीरों को पुलिस कांस्टेबल के नियुक्ति आदेश जारी किए।
- राज्य में ग्रुप-सी की वर्दीधारी नौकरियों में 10% पद अग्निवीरों के लिए आरक्षित हैं, बिना प्रतियोगी परीक्षा।
- फडणवीस ने कहा कि राज्य की नौकरी चाहने वाले हर अग्निवीर को सीधे शामिल किया जाएगा।
महाराष्ट्र ने नौसेना के 282 पूर्व अग्निवीरों के पहले बैच को पुलिस कांस्टेबल नियुक्त कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। चार साल की अग्निपथ योजना से निकलने वाले सैनिकों और नौसैनिकों के लिए बनी राज्य की नई नीति के तहत यह पहली भर्ती है।
केंद्र सरकार ने राज्य को महाराष्ट्र के उन नौसेना अग्निवीरों की सूची भेजी थी जो अपनी सेवा पूरी कर चुके हैं, और अब उन्हें नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं। 282 में से 150 सीमैन डेकसाइड और 132 सीमैन इंजनसाइड के तौर पर काम कर चुके हैं।
फडणवीस ने एक्स पर लिखा, “हमने राज्य मंत्रिमंडल में देश के लिए लड़ने वाले अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का फैसला किया था।” उन्होंने लिखा, “नई भूमिका के लिए उन सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।”
राज्य मंत्रिमंडल ने 29 सितंबर को यह नीति मंजूर की थी। इसके तहत पुलिस, अग्निशमन सेवा और तटीय सुरक्षा समेत ग्रुप-सी के वर्दीधारी पदों में से 10% पूर्व अग्निवीरों के लिए क्षैतिज आरक्षण के रूप में रखे गए हैं। वे बिना प्रतियोगी परीक्षा दिए और बिना नए सिरे से प्रशिक्षण लिए भर्ती हो सकते हैं, और उनके लिए ऊपरी आयु सीमा में भी छूट दी गई है।
नौसेना के पूर्व अग्निवीरों को सीधे राज्य की तटीय सुरक्षा शाखा में भी रखा जाएगा। इच्छुक सभी लोगों को शामिल करने के लिए सरकार ने विशेष मामले के तौर पर स्वीकृत पदों की सामान्य सीमा में ढील दी है। योजना में अग्निशमन विभाग और जेल सुरक्षा भी शामिल हैं।
फडणवीस ने कहा, “राज्य सरकार की सेवा में आना चाहने वाले हर अग्निवीर को सीधे शामिल किया जाएगा।”
2022 में शुरू हुई अग्निपथ योजना में भर्ती होने वाले चार साल सेवा देते हैं, जिसके बाद ज्यादातर सशस्त्र बलों से बाहर हो जाते हैं। तब से कई राज्यों ने उन्हें दूसरा करियर देने के लिए आरक्षण और आयु में छूट का ऐलान किया है।