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नशे पर पंजाब को बेवजह बदनाम किया गया: मान; केंद्र ने झोटा हत्याकांड पर रिपोर्ट मांगी
फिल्लौर में दिनभर की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस अफसरों से कहा कि केंद्र अपनी ज़िम्मेदारी वाले इलाकों की नाकामी का ठीकरा पंजाब पर फोड़ रहा है। कुछ घंटे बाद गृह मंत्रालय ने नशे से जुड़े तीन मामलों पर राज्य से रिपोर्ट मांगी।

मुख्य बातें
- भगवंत मान ने फिल्लौर में अफसरों से कहा कि नशे को लेकर पंजाब को ज़रूरत से ज़्यादा बदनाम किया गया है।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झोटा हत्याकांड, गुरदासपुर हमले और संगरूर की एक खुदकुशी पर रिपोर्ट मांगी।
- झोटा का परिवार धरने पर डटा है और संघर्ष समिति 19 अक्टूबर को आप नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन करेगी।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को अपने पुलिस अफसरों से कहा कि नशे के मामले में राज्य की गलत तस्वीर पेश की गई है और केंद्र अपनी ज़िम्मेदारी वाले इलाकों की नाकामी के लिए पंजाब को दोषी ठहरा रहा है।
फिल्लौर की पंजाब पुलिस अकादमी में मान ने पंजाबी में कहा, “नशा है नहीं एत्थे, बदनाम ही ज़्यादा कीता होया।” यानी नशा यहां उतना नहीं है, जितना राज्य को बदनाम किया गया है। उन्होंने कहा, “आज केंद्र हमसे सवाल पूछ रहा है।”
कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को चिट्ठी लिखकर नशे से जुड़े तीन मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इनमें मंगलवार को मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या भी शामिल है।
हत्या से पहले तय हुई थी बैठक
दिनभर चली इस बैठक में हर ज़िले के एसएसपी, उपायुक्त, एसडीएम और डीएसपी एक साथ बुलाए गए थे, ताकि सरकार के “युद्ध नशियां विरुद्ध” अभियान की समीक्षा हो सके। बैठक की घोषणा झोटा की हत्या से पहले हुई थी, लेकिन हत्या और गुरुवार के पंजाब बंद का साया इस पर साफ दिखा।
मान ने कहा कि सीमा से सटी 50 किलोमीटर की पट्टी सीमा सुरक्षा बल, यानी केंद्र के अधीन है। उन्होंने कहा, “गुजरात के कांडला बंदरगाह पर 3,000 किलो नशा पकड़ा जाता है, वह भी आपके अधिकार क्षेत्र में आता है।” उन्होंने यह भी कहा, “हमारा अपना एंटी-ड्रोन सिस्टम है, जिसके लिए केंद्र ने एक पैसा नहीं दिया, फिर भी आप हमें दोष देते हैं।” उनके मुताबिक पराली जलाने को लेकर भी पंजाब को इसी तरह निशाना बनाया जाता है, जबकि हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी पराली जलती है।
मानसा पर उन्होंने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा, “मानसा की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी।” उन्होंने यह भी कहा, “हत्या की साज़िश में जो भी शामिल है, उसे भी कड़ी सज़ा मिलेगी।” साथ ही बोले कि “नशे के खिलाफ कार्रवाई के बीच कुछ कार्यकर्ताओं को भी मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी।”
उन्होंने अफसरों से कहा कि नशे के आदी लोगों से मरीज़ की तरह बर्ताव हो, “लेकिन सप्लाई चेन तोड़ना हमारा सबसे बड़ा काम है”। उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह के राज की मिसाल देते हुए “बिना डर, दहशत या किसी सिफारिश के” इंसाफ करने को कहा।
दिल्ली से तीन चिट्ठियां
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कहा था कि केंद्र झोटा और गुलज़ार सिंह की मौत पर राज्य से जवाब मांगेगा। शुक्रवार शाम मंत्रालय की चिट्ठियां पहुंच गईं।
झोटा मामले में मंत्रालय ने राज्य से “घटना पर एक व्यापक तथ्यात्मक रिपोर्ट” और उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा। गुलज़ार सिंह, जिनका बेटा नशे की लत का शिकार है, ने 8 सितंबर को संगरूर ज़िले में खुदकुशी कर ली थी। मंत्रालय के मुताबिक उन्होंने अपने इलाके में सिंथेटिक नशे की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे, पंजाब के एक मंत्री पर आरोप लगाए थे और उन पर गांव की पंचायत का दबाव था।
तीसरा मामला गुरदासपुर की बटाला तहसील के मड़ी पंवां गांव में गुरुवार रात हुए हमले का है, जिसमें बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई और निशान सिंह व गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल हुए। मंत्रालय ने लिखा, “आरोप है कि ये हमले नशीले पदार्थों से जुड़े हैं।” उसने यह भी पूछा कि नशा नियंत्रण विज़न डॉक्यूमेंट (2026-2029) पर राज्य ने क्या किया, जो शाह ने 10 अगस्त को मान को भेजा था।
मानसा में अब भी अंतिम संस्कार नहीं
मानसा में झोटा का परिवार और समर्थक लगातार चौथे दिन धरने पर बैठे रहे। उनका शव सिविल अस्पताल में रखा है। उनके पिता भीम सिंह का कहना है कि परिवार तभी शव लेगा जब उसकी मांगें मानी जाएंगी, जिनमें मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव का इस्तीफा और सीबीआई जांच शामिल हैं। ज़िला अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही है।
आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार पुलिस रिमांड पर है और उसकी पत्नी नीलम रानी गिरफ्तार है। आंदोलन चला रही संघर्ष समिति ने 19 अक्टूबर को पूरे पंजाब में आप विधायकों और मंत्रियों के घरों व दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन का एलान किया है।