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अराक़ची बोले होर्मुज खोलने का सात दिन वाला प्रस्ताव कायम, गार्ड्स का दावा दो टैंकर बारूदी सुरंगों से टकराए

बग़दाद में ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अगर वॉशिंगटन तेहरान की शर्तें मान ले तो जलडमरूमध्य छह दिन में खुल सकता है। कुछ घंटे पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा था कि बिना अनुमति वाले रास्ते से जा रहे कच्चे तेल के दो टैंकरों में बारूदी सुरंगों से टकराकर आग लग गई।

संपादकीय डेस्क से · दुबईप्रकाशित
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Mohammad Hassanzadeh / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. अराक़ची ने कहा कि अमेरिका शर्तें माने तो जलडमरूमध्य छह दिन के भीतर खुलेगा और सातवें दिन बातचीत होगी।
  2. गार्ड्स के मुताबिक करीब 20 लाख बैरल तेल लदे दो टैंकरों में सुरंगों से टकराकर आग लगी।
  3. होर्मुज से तेल का प्रवाह 8 अक्टूबर के 2.08 करोड़ बैरल से घटकर 11 अक्टूबर को 29 लाख बैरल रह गया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने रविवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को एक हफ़्ते में खोलने का ईरान का प्रस्ताव अब भी कायम है। इसी बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि जलमार्ग से चुपके से निकलने की कोशिश कर रहे कच्चे तेल के दो टैंकरों में बारूदी सुरंगों से टकराने के बाद आग लग गई।

इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए बग़दाद पहुंचे अराक़ची ने ईरानी मीडिया से कहा: “हमारी स्थिति साफ़ है और अमेरिका को दिए गए सात दिन वाले प्रस्ताव पर आधारित है।” उन्होंने कहा कि “होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का रास्ता साफ़ है”, लेकिन वॉशिंगटन की नीयत पर सवाल उठाया, “अगर अमेरिका की ओर से कोई ईमानदारी हो, जो है नहीं।”

उन्होंने कहा कि योजना के तहत अगर अमेरिका तेहरान की शर्तें मान ले तो जलडमरूमध्य छह दिन के भीतर खुल जाएगा और सातवें दिन दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू होगी। ईरान ने यह प्रस्ताव सितंबर के मध्य में अंतरिम युद्धविराम टूटने के बाद रखा था। ईरान के सुरक्षा प्रमुख ने पिछले हफ़्ते कहा था कि बातचीत इसलिए अटकी है क्योंकि वॉशिंगटन ने ईरान की सातों शर्तों पर जवाब नहीं दिया।

दो टैंकर, दो आग

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा कि एक टैंकर सुरंग से टकराया और उसमें “भीषण आग” लग गई, जबकि दूसरा “विशाल लपटों” में घिर गया, जो उसके इंजन रूम से शुरू हुईं और जहाज़ वहीं ठप हो गया। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार गार्ड्स ने कहा कि हर टैंकर पर करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल था।

आईआरजीसी का कहना है कि दोनों जहाज़ों ने अपने पोज़िशनिंग और रडार सिस्टम बंद कर रखे थे और ऐसे रास्ते से जा रहे थे जिसकी ईरान ने अनुमति नहीं दी, और इनमें से एक “अमेरिकी समर्थन से” पार करने की कोशिश कर रहा था। किसी भी जहाज़ का नाम नहीं बताया गया है और किसी समुद्री प्राधिकरण ने इन घटनाओं की पुष्टि नहीं की है। इसी हफ़्ते आईआरजीसी के नौसेना कमांडर रियर एडमिरल अली अज़माई ने चेताया था कि नेविगेशन सिस्टम बंद करने वाले किसी भी जहाज़ को “शत्रु” माना जाएगा।

ईरान की सेना ने अलग से कहा कि गुरुवार और शुक्रवार को ओमान की खाड़ी में तेहरान के घोषित “प्रतिबंधित क्षेत्र” में दो टैंकरों में आग लगी। संयुक्त अरब अमीरात में ख़ोर फ़क्कान के पास एक टगबोट पर दो प्रोजेक्टाइल लगने की ख़बर है, जिसमें एक व्यक्ति को मामूली चोट आई।

युद्ध से पहले दुनिया के तेल उपभोग का करीब पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुज़रता था, जो अब लगभग बंद है। डेटा फ़र्म केप्लर के मुताबिक 8 अक्टूबर को इससे करीब 2.08 करोड़ बैरल तेल गुज़रा, जबकि 11 अक्टूबर को सिर्फ़ 29 लाख बैरल। फ़रवरी के आख़िर में ईरान पर अमेरिकी-इज़राइली युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान जहाज़ों से अनुमति लेने की मांग कर रहा है, और अमेरिका ने जवाब में ईरानी तेल निर्यात की नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है।

वॉशिंगटन और मॉस्को

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज़मैक्स से कहा कि उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को खारिज कर दिया है, ज़मीनी सेना भेजने पर विचार नहीं कर रहे और उन्हें 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद युद्ध ख़त्म करने का समझौता होने की उम्मीद है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि करीब 5,000 नौसैनिकों और अन्य कर्मियों वाला विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश थाईलैंड यात्रा के बाद अरब सागर लौट आया है।

इज़राइल में चैनल 12 ने कहा कि प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फ़ोन पर ईरान के ख़िलाफ़ संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा की, और अधिकारियों के अनुसार फ़िलहाल तुरंत कार्रवाई की ज़रूरत नहीं है। लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ़ राजी ने ईरान से “खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और जॉर्डन के ख़िलाफ़ अपनी आक्रामकता बंद करने” की अपील की।

सोमवार को कूटनीति का केंद्र तेहरान होगा, जहां रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव अराक़ची और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बातचीत के लिए पहुंचने वाले हैं।

भारत पर असर

इस संकट का सीधा असर भारत के ईंधन ख़र्च पर पड़ा है: अप्रैल-सितंबर में देश का कच्चे तेल का आयात बिल 46.3 प्रतिशत बढ़कर 90.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि मात्रा लगभग उतनी ही रही। टैंकर एमटी पेट्रो डॉल्फ़िन के दो भारतीय कर्मी, बीर बहादुर यादव और अमित सिंह, एक हफ़्ते पहले ओमान के पास जहाज़ पर ड्रोन हमले के बाद से लापता हैं।