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महंगे तेल से भारत का कच्चा तेल आयात बिल 46% बढ़कर 90.6 अरब डॉलर
अप्रैल-सितंबर में देश ने लगभग उतना ही तेल खरीदा जितना एक साल पहले, लेकिन कीमत कहीं ज़्यादा चुकाई। अकेले सितंबर में 15.4 अरब डॉलर खर्च हुए, भारतीय बास्केट का औसत भाव 116 डॉलर प्रति बैरल रहा।

मुख्य बातें
- अप्रैल-सितंबर में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 90.6 अरब डॉलर खर्च किए, जो 61.9 अरब डॉलर से 46.3% ज़्यादा है।
- आयात की मात्रा लगभग वही रही, 12.27 करोड़ टन, जबकि पिछले साल 12.18 करोड़ टन थी।
- सितंबर में भारतीय क्रूड बास्केट का औसत भाव 116.09 डॉलर प्रति बैरल रहा, जो एक साल पहले 69.61 डॉलर था।
सितंबर तक के छह महीनों में भारत ने आयातित कच्चे तेल के लिए 90.6 अरब डॉलर चुकाए, जो एक साल पहले से 46.3% ज़्यादा है, जबकि खरीदा गया तेल मामूली ही बढ़ा। ये आंकड़े पेट्रोलियम मंत्रालय की डेटा इकाई पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के हैं।
अप्रैल-सितंबर 2025 में यह बिल 61.9 अरब डॉलर था। आयात की मात्रा 12.18 करोड़ टन से बढ़कर सिर्फ 12.27 करोड़ टन हुई, यानी लगभग पूरी बढ़ोतरी ऊंची कीमतों की वजह से है।
सितंबर सबसे महंगा महीना रहा। भारत ने कच्चे तेल पर 15.4 अरब डॉलर खर्च किए, जो पिछले साल सितंबर से करीब 47% ज़्यादा है। भारतीय रिफाइनरियों के औसत खरीद भाव यानी भारतीय क्रूड बास्केट का औसत इस महीने 116.09 डॉलर प्रति बैरल रहा, जो अगस्त में 90.19 डॉलर और एक साल पहले 69.61 डॉलर था। ब्रेंट का औसत 116.77 डॉलर रहा।
घर में कम, बाहर से ज़्यादा
घरेलू उत्पादन घट रहा है, जिससे देश का जोखिम बढ़ता है। कच्चे तेल और कंडेनसेट का उत्पादन 1.42 करोड़ टन से घटकर 1.37 करोड़ टन रह गया। खपत के आधार पर आयात पर निर्भरता 88.1% रही, जो पिछले साल के 88.3% के लगभग बराबर है।
गैस में भी यही तस्वीर है। घरेलू गैस उत्पादन 4.4% घटा, जबकि तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात 4.4% बढ़ा। भारत अब अपनी गैस खपत का 52.3% आयात करता है, जो पहले 50.1% था।
ऊंची कीमतें ईंधन के इस्तेमाल का तरीका भी बदल रही हैं। पेट्रोलियम उत्पादों की खपत 3.3% घटकर 11.48 करोड़ टन रह गई, रसोई गैस (एलपीजी) की खपत 15.5% कम हुई। डीज़ल की मांग 4.9% और पेट्रोल की 7.1% बढ़ी।
ये आंकड़े शुक्रवार देर शाम जारी हुए। उसी रात ब्रेंट 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो सितंबर के औसत से कम लेकिन पिछले साल के भावों से कहीं ऊपर है। ऐसे में आयात बिल रुपये और व्यापार घाटे पर दबाव बनाए रखेगा।