अर्थव्यवस्थाबाज़ार
110 डॉलर के करीब ब्रेंट और नैस्डैक की गिरावट, सोमवार को सतर्क रह सकता है भारतीय शेयर बाज़ार
भारतीय बाज़ार बंद होने के बाद शुक्रवार को कच्चा तेल करीब 4% उछला, और चिप व एआई शेयरों में बिकवाली से नैस्डैक का जून के बाद सबसे खराब हफ्ता रहा। खाड़ी में सप्ताहांत के टैंकर हमलों ने जोखिम और बढ़ाया है।

मुख्य बातें
- शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 19 मई के बाद सबसे ऊंचा बंद भाव है।
- नैस्डैक दिन में 2.14% और पूरे हफ्ते में करीब 4.5% गिरा, जो जून के आखिर के बाद सबसे खराब हफ्ता है।
- तेल में देर से आई तेज़ी से पहले ही भारतीय बाज़ार बंद हो चुका था, सेंसेक्स हफ्ते भर में 3.1% चढ़ा।
सोमवार को जब भारतीय शेयर बाज़ार खुलेगा, तब कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब होगा और वॉल स्ट्रीट महीनों के सबसे खराब हफ्ते से उबर रहा होगा। यह मेल उस तेज़ी की परीक्षा ले सकता है जिसने पिछले हफ्ते सेंसेक्स को 3% से ज़्यादा चढ़ाया।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 3.94 डॉलर यानी 3.7% चढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह 19 मई के बाद का सबसे ऊंचा बंद भाव है। अमेरिकी क्रूड 3.5% बढ़कर 101.41 डॉलर पर पहुंचा। ज़्यादातर उछाल भारतीय बाज़ार बंद होने के बाद आया: भारतीय समय से शाम करीब 4 बजे ब्रेंट 105.6 डॉलर के आसपास था।
इसके पीछे दो वजहें रहीं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने लाल सागर के यानबू बंदरगाह की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को रास्ते में रोक लिया। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने के बाद सऊदी अरब तेल भेजने के लिए इसी बंदरगाह पर निर्भर है। किसी नुकसान की खबर नहीं है। इसके अलावा यूक्रेन के एक ड्रोन हमले से रूस की एक बड़ी रिफाइनरी की मुख्य इकाई बंद हो गई, जिससे डीज़ल की आपूर्ति पर सवाल बढ़े।
सप्ताहांत में भी राहत नहीं मिली। शनिवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि होर्मुज़ में एक सुपरटैंकर बारूदी सुरंग से टकराया और उसमें आग लग गई। सऊदी बंदरगाह जुबैल के पास एक और टैंकर पर रॉकेट से चलने वाला ग्रेनेड दागा गया।
टेक शेयरों के लिए बुरा हफ्ता
न्यूयॉर्क में नैस्डैक कंपोज़िट शुक्रवार को 2.14% गिरकर 26,140.03 पर बंद हुआ। हफ्ते भर में यह करीब 4.5% टूटा, जो जून के आखिर के बाद सबसे कमज़ोर प्रदर्शन है। एसएंडपी 500 1.09% गिरकर 7,659.44 पर आया। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ने बेहतर टिकाव दिखाया, 0.34% फिसलकर 52,002.41 पर बंद हुआ और हफ्ते में करीब 0.7% ऊपर रहा।
बिकवाली चिप कंपनियों और एआई ढांचा बनाने वाली कंपनियों में सबसे ज़्यादा रही। निवेशक सवाल उठा रहे हैं कि इस खर्च का कितना हिस्सा कर्ज़ से हो रहा है, और मेमोरी चिप में चीनी प्रतिस्पर्धा की चिंता भी है। हफ्ते की शुरुआत में आए ऊंचे अमेरिकी महंगाई आंकड़ों ने फेडरल रिज़र्व की ओर से एक और दर बढ़ोतरी की चर्चा तेज़ की थी। वॉल स्ट्रीट का डर सूचकांक वीआईएक्स 21% से ज़्यादा चढ़कर 19.99 पर पहुंचा।
जोन्स ट्रेडिंग के मुख्य बाज़ार रणनीतिकार माइकल ओ’रूर्क ने कहा, “कमाई अहम है, लेकिन बाज़ार को चिंता है कि 2026 कमाई में बढ़ोतरी का शिखर साबित होगा।”
बैंकॉक में आईएमएफ की बैठकों में बोलते हुए फेड चेयर केविन वॉर्श ने यह बताने से इनकार किया कि केंद्रीय बैंक 27-28 अक्टूबर की बैठक में क्या करेगा। इसके बाद कारोबारियों ने अक्टूबर में दर बढ़ने की संभावना घटाकर करीब 10-16% कर दी, जो महंगाई आंकड़ों के बाद 60% के करीब थी। दिसंबर में बढ़ोतरी को वे अब भी काफी संभावित मान रहे हैं।
हाज़िर सोना शुक्रवार को लगभग सपाट, करीब 4,166 डॉलर प्रति औंस पर रहा। डॉलर इंडेक्स नरम होकर करीब 101.9 पर आया और 10 साल के अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड की यील्ड 5.11% के आसपास रही।
भारत के लिए क्या मायने
सबसे बड़ी चिंता तेल है। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। 110 डॉलर के करीब भाव आयात बिल बढ़ाता है और रुपये पर दबाव डालता है। शुक्रवार को रुपया लगातार छठे दिन मज़बूत होकर 94.89 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिसकी एक वजह तेल का नरम पड़ना था।
टेक शेयरों की बिकवाली दूसरा जोखिम है। शुक्रवार की बढ़त में भारतीय आईटी शेयर सबसे आगे थे, टीसीएस और टेक महिंद्रा के अच्छे नतीजों के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.92% चढ़ा। अमेरिका में टेक शेयरों का माहौल बिगड़ने से यह खरीदारी ठंडी पड़ सकती है।
घरेलू मोर्चे पर कुछ सहारा है। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने ₹1,165.92 करोड़ के भारतीय शेयर शुद्ध रूप से खरीदे। शनिवार को बड़े बैंकों के नतीजे आए: आईसीआईसीआई बैंक का मुनाफा 20% और एक्सिस बैंक का 38% बढ़ा, जबकि एचडीएफसी बैंक का मुनाफा 4.7% बढ़ा। निफ्टी में बड़ा हिस्सा रखने वाले बैंक शेयर सबसे पहले इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देंगे।
शुक्रवार को सेंसेक्स 74,729.27 और निफ्टी 23,146.15 पर बंद हुआ था।