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ट्रंप ने रूस प्रतिबंध कानून पर छूट दी, भारत-चीन पर 100% टैरिफ का खतरा टला
जुर्माने लागू होने से दो दिन पहले राष्ट्रपति ने उन्हें 'राष्ट्रीय हित' में रोक दिया। डेमोक्रेट्स ने इसे पुतिन के आगे समर्पण बताया, मॉस्को ने ऐतिहासिक।

मुख्य बातें
- ट्रंप ने ग्राहम कानून के प्रतिबंधों और टैरिफ पर 18 अक्टूबर की समयसीमा से दो दिन पहले छूट दे दी।
- कानून में रूसी तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% टैरिफ का प्रावधान था, जिनमें भारत भी है।
- कानून के सह-लेखक रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि इस छूट का राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और उससे तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने के लिए बने नए अमेरिकी कानून के लगभग सभी प्रतिबंधों और टैरिफ पर रोक लगा दी है। इससे भारत और चीन पर 100% टैरिफ का खतरा, उसके लागू हो सकने से दो दिन पहले टल गया।
16 अक्टूबर की तारीख वाले और शुक्रवार देर रात वॉशिंगटन में जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस को प्रमाणित किया है कि यह छूट “अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है”। लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट पर उन्होंने 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे, और इसके जुर्माने 18 अक्टूबर से लागू होने थे।
आदेश में क्या है
आदेश पहले उन शुल्कों का ब्योरा देता है जिनकी बात कानून करता है: रूस से आने वाले सामान पर 500% की बढ़ोतरी, और रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों के सामान पर 100% की बढ़ोतरी, अगर वे 18 अक्टूबर या उसके बाद नई खरीद करते हैं। रूसी प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर भी 100% का अतिरिक्त शुल्क लगना था।
इसके बाद आदेश इन शुल्कों के साथ कानून के मुख्य प्रतिबंध प्रावधानों पर भी छूट दे देता है। यह छूट तब तक लागू रहेगी जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री कुछ और तय नहीं करते। रूस से जुड़े मौजूदा राष्ट्रीय आपातकाल के तहत पहले से लगे प्रतिबंध बने रहेंगे, और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को रूसी तेल के खरीदारों पर नजर रखकर रिपोर्ट देते रहना होगा।
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम वाला यह कानून दोनों दलों के समर्थन से पास हुआ था।
वॉशिंगटन और कीव में नाराजगी
कानून के सह-लेखकों में शामिल डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने एक्स पर लिखा: “इस छूट का हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने इस फैसले को “कायरतापूर्ण” बताया। वर्जीनिया से प्रतिनिधि डॉन बेयर ने कहा: “पुतिन के आगे ट्रंप का यह ताजा समर्पण एक बार फिर हमारे यूक्रेनी साझेदारों से दगा है।”
मॉस्को में रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने इस रोक को “एक अहम और सच में ऐतिहासिक पल” बताया।
अभियान समूह उर्गेवाल्ड के अलेक्जेंडर कर्क ने कहा कि कानून के मुख्य प्रतिबंधों के असर दिखाने से पहले ही उसे खोखला कर दिया गया। उन्होंने इसे “इस कानून के पीछे की दोनों दलों की कोशिश से दगा” कहा।
रूस के बिजली ग्रिड पर भारी हमलों वाली रात के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि इस फैसले से रूस पर दबाव घटेगा और “पुतिन को आर्थिक इनाम” मिलेगा। यह छूट उस अमेरिकी सौदे के बाद आई है जिससे रूस विदेश में डीजल बेच सकता है। जेलेंस्की उस सौदे की भी आलोचना कर चुके हैं।
भारत के लिए क्या मायने
100% टैरिफ का निशाना रूसी ऊर्जा के सबसे बड़े खरीदार थे, और भारत उनमें है। केप्लर के शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात करीब 20.8 लाख बैरल रोजाना था, यानी उसके कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 45%।
बिल पास होने पर नई दिल्ली ने आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने 17 सितंबर को कहा था कि भारत “अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध” है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने यह कानून उठाया था।
इस छूट से अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर मंडराता सबसे फौरी खतरा हट गया है। लेकिन कानून खत्म नहीं हुआ है: राष्ट्रपति कभी भी छूट वापस ले सकते हैं। रुबियो 20 अक्टूबर को जयशंकर से बातचीत के लिए मुंबई आने वाले हैं। शनिवार दोपहर तक भारत सरकार ने इस छूट पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
मूल दस्तावेज़
- Implementing the Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026The White House, 16 अक्टूबर 2026