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पेजेश्कियान मॉस्को में पुतिन से मिलेंगे, ईरानी सेना प्रमुख बोले: अमेरिकी युद्धपोत खाड़ी में नहीं घुसेंगे

ईरान के राष्ट्रपति मंगलवार को मॉस्को में गैस निर्यातक देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। तेहरान में सशस्त्र बलों के प्रमुख ने कहा कि अमेरिकी जहाजों को 'किसी भी हालत में' खाड़ी में नहीं आने दिया जाएगा।

संपादकीय डेस्क से · तेहरानप्रकाशित
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: khamenei.ir / Wikimedia Commons; Пресс-служба Президента РФ / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. मसूद पेजेश्कियान 27 अक्टूबर को मॉस्को में गैस निर्यातक देशों के सम्मेलन में व्लादिमीर पुतिन से मिलेंगे।
  2. ईरानी राजदूत ने कहा कि दोनों नेता आर्थिक संबंधों और "भू-राजनीति के सवालों" पर बात करेंगे।
  3. मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत "किसी भी हालत में" खाड़ी में नहीं घुसेंगे।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान अगले हफ्ते व्लादिमीर पुतिन से मिलने मॉस्को जाएंगे। ईरानी मीडिया ने शनिवार को यह जानकारी दी। उसी दिन तेहरान के शीर्ष जनरल ने चेतावनी दी कि अमेरिकी युद्धपोतों को खाड़ी में कभी लौटने नहीं दिया जाएगा।

रूस में ईरान के राजदूत काज़ेम जलाली ने तसनीम समाचार एजेंसी से कहा कि “ईरान के राष्ट्रपति गैस निर्यातक देशों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने मॉस्को जाएंगे।” यह सम्मेलन मंगलवार, 27 अक्टूबर को है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता आर्थिक सहयोग और “भू-राजनीति के सवालों” पर चर्चा करेंगे। जलाली के मुताबिक दोनों देशों की “सक्रिय कूटनीति” अंतरराष्ट्रीय संबंधों के “नए ढांचे” को गढ़ने में मदद कर रही है।

यह दौरा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की इस हफ्ते की तेहरान यात्रा के बाद हो रहा है, जो खाड़ी में युद्ध शुरू होने के बाद उनकी पहली यात्रा थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत अगले हफ्ते होगी और दोनों देशों का सहयोग पहले से कहीं ज्यादा करीबी है। पुतिन ने अक्टूबर की शुरुआत में कहा था कि रूस युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार है।

‘यह सपना कब्र तक ले जाएंगे’

कूटनीति के साथ-साथ कड़े बयान भी जारी हैं। ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि अमेरिकी सैन्य जहाजों को “किसी भी हालत में” फारस की खाड़ी में आने नहीं दिया जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेता “यह सपना अपनी कब्र तक ले जाएंगे।” उन्होंने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु ठिकाने नष्ट कर दिए।

अब्दुल्लाही का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल ईरान पर फिर हमले की धमकी दे रहे हैं। तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने कथित तौर पर कहा कि ईरान के कमजोर होने पर वॉशिंगटन उस पर “बिल्कुल” हमला कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना अब भी खतरनाक है: इसी हफ्ते सात तेल टैंकरों में आग लगी या वे क्षतिग्रस्त हुए, जब उन पर ईरान ने हमला किया या वे बारूदी सुरंगों से टकराए।

पड़ोसियों की संयम की अपील

शुक्रवार को पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने इस्तांबुल में फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली के अपने समकक्षों के साथ बैठक की। उन्होंने इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई सहमति का समर्थन किया और होर्मुज से “सुरक्षित और बेरोकटोक आवाजाही की जल्द और पूरी बहाली” की मांग की।

बैठक के बाद तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कहा, “ईरान में सैन्य दखल किसी भी तरह से हल नहीं है। फिलहाल कोई इसका समर्थन नहीं करता।” इटली के एंटोनियो तजानी ने चेतावनी दी कि अगले महीने के अमेरिकी चुनावों के बाद खाड़ी में लड़ाई फिर शुरू हो सकती है।

आगे क्या

पेजेश्कियान मंगलवार को गैस एक्सपोर्टिंग कंट्रीज फोरम के सम्मेलन के लिए मॉस्को पहुंचेंगे, जहां सम्मेलन से इतर पुतिन से उनकी मुलाकात होने की उम्मीद है। रूस और ईरान दुनिया के सबसे ज्यादा प्रतिबंध झेलने वाले देशों में हैं और फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण हमले के बाद दोनों और करीब आए हैं। अमेरिका-ईरान वार्ता महीनों से ठप है।