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इस्तांबुल में आठ देशों के मंत्री बोले, ईरान पर नया हमला नहीं; ट्रंप ने कहा 'एक और छोटा एपिक फ्यूरी'

यूरोप और चार मुस्लिम बहुल देशों के विदेश मंत्रियों ने इस तरह की पहली बैठक में दोनों पक्षों से संयम की अपील की। उधर तेल महंगा हुआ और वॉशिंगटन ने नए हमलों के संकेत दिए।

संपादकीय डेस्क से · इस्तांबुलप्रकाशित
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इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तयानी और फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तयानी और फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: original author: Piotr Drabik from Poland; cropped by: Rlevente / Wikimedia Commons; U.S. Department of State / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0, Public domain

मुख्य बातें

  1. तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि बैठक में शामिल आठ में से किसी देश ने ईरान पर नए सैन्य हमले का समर्थन नहीं किया।
  2. फ्रांस ने चेताया कि नया टकराव तेल-गैस की कीमतों पर बहुत गंभीर असर डालेगा।
  3. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 'एक और छोटा एपिक फ्यूरी' कर सकता है; ब्रेंट 117.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा।

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली के साथ तुर्की, सऊदी अरब, पाकिस्तान और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार को इस्तांबुल में दिन भर की बातचीत के बाद वॉशिंगटन और तेहरान को साफ संदेश दिया: नई जंग नहीं।

बैठक की मेजबानी करने वाले तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कहा कि किसी भी भागीदार ने ईरान पर एक और सैन्य हस्तक्षेप या हमले को मंजूरी नहीं दी, और जंग खत्म करने का एकमात्र रास्ता कूटनीति और बातचीत है। उन्होंने इस नए समूह के बारे में कहा कि इसके “कई फायदे हैं, खास तौर पर इसलिए कि यह अनौपचारिक और लचीला है और सीधे उन्हीं मुद्दों पर ध्यान देता है जिनका हम सामना कर रहे हैं।”

आठों देशों ने कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया। मंत्रियों ने अलग-अलग अपनी बात रखी।

तेल को लेकर चेतावनी

फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि समूह सबसे पहले दोनों पक्षों से “अधिकतम संयम बरतने” की अपील करेगा, “क्योंकि हम क्षेत्र में एक और टकराव झेल नहीं सकते।” उन्होंने कहा कि लड़ाई का नया दौर “सिर्फ हारने वाले पैदा करेगा और तेल-गैस की कीमतों पर निस्संदेह बहुत गंभीर असर डालेगा।”

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की यूरोपीय तिकड़ी के साथ आए इटली के एंटोनियो तयानी ने कहा कि मकसद “नौवहन की आजादी की गारंटी के लिए तनाव घटाना” है। उन्होंने जोड़ा: “मुझे नहीं लगता कि यह समस्या केवल सैन्य नजरिए से हल हो सकती है।”

मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलात्ती ने कहा कि उन्होंने तनाव कम करने, अमेरिका-ईरान बातचीत और फलस्तीन में न्यायपूर्ण शांति पर जोर दिया। बातचीत से पहले ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड के दफ्तर ने कहा था कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के अधिकार बहाल करने वाले कूटनीतिक समाधान पर जोर देंगे और चेताएंगे कि ईरान के तरीके बाब अल-मंदेब और स्वेज नहर तक फैल रहे हैं।

गाजा, यमन की जंग और यूक्रेन युद्ध खत्म होने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

वॉशिंगटन के संकेत

यह अपील ऐसे समय आई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नए हमलों का रास्ता खुला रखे हुए हैं। शुक्रवार को उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ “थोड़ा और आगे” जा सकता है और कोई कदम “काफी जल्द” उठेगा, हालांकि उन्होंने न निशाना बताया न समय। बाद में उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन “एक और छोटा एपिक फ्यूरी” कर सकता है।

ईरानी जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी को अब 100 दिन हो गए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि इससे कम से कम 25 अरब डॉलर का ईरानी कच्चा तेल बाजार तक नहीं पहुंचा। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार शाम 115 डॉलर प्रति बैरल और रात में 117.30 डॉलर तक पहुंचा।

सऊदी अरब का सवाल

बैठक में सऊदी अरब की रक्षा का मुद्दा भी छाया रहा, जिस पर हूती लगभग रोज मिसाइल और ड्रोन दाग रहे हैं। तुर्की ने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ उसका मक्का रक्षा समझौता किसी देश के खिलाफ नहीं है। मिस्र ने अभी तय नहीं किया है कि वह इसमें शामिल होगा या नहीं; राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी कह चुके हैं कि काहिरा सऊदी जमीन की रक्षा करेगा, लेकिन यमन पर हमलों में हिस्सा नहीं लेगा।

भारत के लिए मायने

भारत इस बातचीत में शामिल नहीं था, लेकिन इस जंग का असर हजारों भारतीयों पर पड़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि पिछले एक हफ्ते में सऊदी अरब में फंसे करीब 3,000 उमरा यात्री लौट आए हैं, और 10,000 से ज्यादा अन्य लोग नियमित उड़ानों से घर पहुंचे हैं। इंडिगो ने रियाद की उड़ानें 31 अक्टूबर तक और अकासा एयर ने 30 नवंबर तक रोक दी हैं।

अपडेट 24 अक्टूबर 2026, सुबह 5:10 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।