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होर्मुज़ पर इस्तांबुल में यूरोप और खाड़ी देशों की बैठक, ट्रंप ने ईरान पर और हमलों के संकेत दिए

ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली पहली बार इस प्रारूप में तुर्की, सऊदी अरब, पाकिस्तान और मिस्र के साथ बैठे। होर्मुज़ से जहाज़ों की आवाजाही अब भी युद्ध से पहले के मुकाबले बहुत कम है।

संपादकीय डेस्क से · इस्तांबुलप्रकाशित
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान (फ़ाइल फ़ोटो)
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: U.S. Department of State / Wikimedia Commons, Public domain

मुख्य बातें

  1. शुक्रवार को इस्तांबुल में यूरोप और पश्चिम एशिया के आठ देशों के विदेश मंत्री मिले।
  2. ब्रिटेन के मुताबिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर से बहुत नीचे है।
  3. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की हालत खराब कर दी है और आगे भी कदम उठा सकता है।

यूरोप और पश्चिम एशिया के चार-चार देशों के विदेश मंत्री शुक्रवार को इस्तांबुल में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता तलाशने के लिए मिले। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान पर और अमेरिकी हमले हो सकते हैं।

बैठक की मेज़बानी तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने की। इसमें ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी का ई3 समूह, इटली, और चार क्षेत्रीय ताकतों का नया समूह शामिल है: तुर्की, सऊदी अरब, पाकिस्तान और मिस्र। पेरिस ने इसे इस प्रारूप की पहली बैठक बताया, जिसका मकसद “ईरान संकट के अलग-अलग पहलू” हैं।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड बैठक में ऐसे कूटनीतिक समाधान की बात लेकर पहुंचे जिससे समुद्री आवाजाही की पूरी आज़ादी बहाल हो। उनके दफ़्तर ने कहा, “जलडमरूमध्य से गुज़रना अब भी खतरे में है और यहां आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर से बहुत कम है।” उसने चेताया कि ईरानी तरीके फैल रहे हैं और सऊदी अरब पर हूती हमलों से बाब अल-मंदेब और स्वेज़ नहर पर भी दबाव बढ़ रहा है। ब्रिटेन ने सऊदी हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए आरएएफ़ टाइफ़ून विमान देने का वादा किया है।

फ़िदान इस संकट को ऐसा मानते हैं जिसकी ज़िम्मेदारी क्षेत्र को खुद लेनी होगी। उन्होंने कहा, “स्थायी समाधान बाहर से थोपे नहीं जा सकते।” उनसे उम्मीद थी कि वे बस्तियों के विस्तार पर इज़रायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने, हूतियों के खिलाफ़ सऊदी अरब के समर्थन और होर्मुज़ व बाब अल-मंदेब में स्थायी नौवहन आज़ादी की मांग करेंगे। तुर्की के विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि फ़लस्तीनी मुद्दा, यमन और रूस-यूक्रेन युद्ध भी एजेंडे में हैं।

ट्रंप की चेतावनी

बैठक वॉशिंगटन की नई धमकी के साये में शुरू हुई। गुरुवार देर रात ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने “ईरान की हालत खराब कर दी है” और “शायद थोड़ा और आगे जाए”। उन्होंने यह नहीं बताया कि आगे की कार्रवाई क्या होगी।

ईरान ने गुरुवार को कहा कि जलडमरूमध्य में सात तेल टैंकरों में आग लगी या उन्हें नुकसान पहुंचा। फ़रवरी में युद्ध शुरू होने के बाद एक दिन में यह सबसे बड़ी संख्या है। सऊदी अरब में बढ़ते हूती हमलों के कारण मुख्य हवाई अड्डा बंद करना पड़ा और एक बड़ा निवेश सम्मेलन टालना पड़ा। अचानक पहुंचे फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ़्रांसीसी बल लाल सागर में यानबू तेल टर्मिनल की हिफ़ाज़त में मदद करेंगे।

मेज़ पर पाकिस्तान

बैठक में पाकिस्तान की मौजूदगी खाड़ी की सुरक्षा में उसकी नई जगह दिखाती है। तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने अगस्त में मक्का रक्षा समझौता किया था, और इस्तांबुल में चार क्षेत्रीय देशों का समूह इसी के इर्द-गिर्द बना है। मिस्र ने अभी तय नहीं किया है कि वह समझौते में शामिल होगा या नहीं, हालांकि राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सीसी कह चुके हैं कि मिस्र “सऊदी भूमि की रक्षा करेगा” और यमन पर किसी हमले में हिस्सा नहीं लेगा।

भारत इन दोनों में से किसी समूह में नहीं है, लेकिन नतीजों से उसका भी उतना ही लेना-देना है। भारत दुनिया में नाविकों का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और वैश्विक बेड़ों पर 3 लाख से ज़्यादा भारतीय नाविक काम करते हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में एक दर्जन से ज़्यादा भारतीय नाविक मारे गए हैं और तीन लापता हैं। गुरुवार को विदेश मंत्रालय ने दम्माम हवाई अड्डे पर एक भारतीय की मौत के बाद सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा ढांचे पर हमलों को “अस्वीकार्य” बताया। शुक्रवार को यमन में भारतीय दूतावास ने कहा कि यमन तट के पास हमले की चपेट में आई एक नौका पर सवार 14 भारतीय सुरक्षित हैं।

भारतीय समय के अनुसार दोपहर तक इस्तांबुल बैठक से कोई बयान जारी नहीं हुआ था।