दुनियादक्षिण एशिया
पाकिस्तान ने ज़लमय ख़लीलज़ाद का दावा खारिज किया, कहा अफ़ग़ानों की भर्ती का आरोप बेबुनियाद
सूचना मंत्रालय ने पूर्व अमेरिकी दूत के आरोप को 'बेबुनियाद और भ्रामक' बताया और कहा कि ध्यान अफ़ग़ान ज़मीन से पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे 'भारत प्रायोजित प्रॉक्सी' पर होना चाहिए।

मुख्य बातें
- ख़लीलज़ाद ने कहा था कि पाकिस्तान "पाकिस्तान-विरोधी विद्रोहियों से लड़ने के लिए अफ़ग़ानों की भर्ती" कर रहा है।
- इस्लामाबाद ने आरोप को "बेबुनियाद और भ्रामक" बताया और उन पर निजी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।
- मंत्रालय ने कहा कि तालिबान अफ़ग़ान ज़मीन को "भारत प्रायोजित प्रॉक्सी" के इस्तेमाल से रोकें।
पाकिस्तान ने शनिवार को अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमेरिका के पूर्व विशेष दूत ज़लमय ख़लीलज़ाद के उस दावे को “बेबुनियाद और भ्रामक” बताकर खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि इस्लामाबाद पाकिस्तान-विरोधी हथियारबंद गुटों से लड़ने के लिए अफ़ग़ानों की भर्ती कर रहा है।
ख़लीलज़ाद डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में अफ़ग़ानिस्तान के लिए विशेष प्रतिनिधि थे और उन्होंने ही तालिबान के साथ वह अमेरिकी समझौता कराया था जिसके बाद नाटो की वापसी हुई। उन्होंने शुक्रवार को एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान “पाकिस्तान-विरोधी विद्रोहियों से लड़ने के लिए अफ़ग़ानों की भर्ती” कर रहा है।
सूचना मंत्रालय ने अपने फैक्ट-चेक अकाउंट के जरिए जवाब दिया। उसने कहा, “उनके व्यापक और बेबुनियाद दावे बस अटकलों पर आधारित कहानियों को दोहराते हैं।” मंत्रालय ने उन पर काबुल की तालिबान सरकार के समर्थन में निजी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।
“एजेंडा आधारित नजरिया”
मंत्रालय ने कहा कि ये आरोप केवल ख़लीलज़ाद के उस नजरिए को उजागर करते हैं जिसे उसने “एकतरफा, एजेंडा आधारित” बताया। उसने कहा कि पाकिस्तान के “वैध आतंकवाद-विरोधी अभियानों” को अफ़ग़ानों की भर्ती या हथियारबंद गुटों को प्रायोजित करने की बातों से जोड़ना “खास तौर पर भ्रामक” है। उसने संयुक्त राष्ट्र की निगरानी रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तानी तालिबान यानी टीटीपी और अल-कायदा की मौजूदगी दर्ज है। मंत्रालय ने कहा, “पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे है।”
फिर उसने आरोप की दिशा भारत की ओर मोड़ दी। मंत्रालय के मुताबिक ख़लीलज़ाद के दावे अफ़ग़ान तालिबान की इस जिम्मेदारी से ध्यान हटाते हैं कि वे अपनी ज़मीन को “पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के लिए भारत प्रायोजित प्रॉक्सी” के इस्तेमाल से रोकें। शनिवार के बयान पर भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
पुराना टकराव
इस्लामाबाद और इस अनुभवी अफ़ग़ान-अमेरिकी राजनयिक के बीच यह पहला टकराव नहीं है। नवंबर 2025 में मंत्रालय ने कहा था कि अख्तराबाद में एक व्यक्ति की मौत के बाद ख़लीलज़ाद ने पंजाब में इस्लामिक स्टेट की क्षेत्रीय शाखा के सक्रिय होने का “झूठा आभास” पैदा किया; बाद में उसने कहा कि वह मौत लूट की घटना में हुई थी। मार्च 2023 में विदेश कार्यालय ने कहा था कि पाकिस्तान को उनकी “बिन मांगी सलाह” की जरूरत नहीं है, और तब अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था कि वे बाइडन प्रशासन की ओर से नहीं बोलते।
ख़लीलज़ाद कई बार इस्लामाबाद और काबुल से बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की अपील कर चुके हैं, सबसे हाल में इस साल जनवरी में।
यह क्यों अहम है
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान शासकों के रिश्ते महीनों से तनावपूर्ण हैं। सितंबर में खैबर पख्तूनख्वा में हमलों के बाद पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाके में हवाई हमले किए, जिसके बाद ड्रोन घुसपैठ और जवाबी हमले हुए।
भारत के लिए यह बयान दिखाता है कि अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर घिरने पर इस्लामाबाद अब कितनी जल्दी नई दिल्ली का नाम ले लेता है। एक पूर्व अमेरिकी दूत का पाकिस्तान के अपने आचरण पर लगाया आरोप एक दिन के भीतर भारत के खिलाफ आरोप में बदल गया।