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ईरान का दावा, पाकिस्तान के जरिए होर्मुज़ खोलने की पेशकश की थी; पेज़ेश्कियान बोले 'न युद्ध, न शांति' से निकलना होगा
इस्लामाबाद में ईरान के राजदूत ने कहा कि यह पेशकश फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के जरिए भेजी गई थी और ट्रंप ने इसे ठुकरा दिया। देश में राष्ट्रपति ने माना कि बहुत से ईरानी दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहे हैं।

मुख्य बातें
- ईरान के राजदूत ने कहा कि अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी हटाए तो तेहरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोल देगा।
- उनके मुताबिक यह पेशकश आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा के दौरान भेजी गई और ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया।
- पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान को "न युद्ध, न शांति" की स्थिति से बाहर निकलना होगा।
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को बताया था कि अगर वॉशिंगटन ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटा ले, तो वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने को तैयार है। इस्लामाबाद में तेहरान के राजदूत ने शनिवार रात यह बात कही। उनके मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इनकार कर दिया।
रज़ा अमीरी मोग़द्दम ने पाकिस्तान की राजधानी में एक सेमिनार में कहा कि यह पेशकश पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की हाल की तेहरान यात्रा के दौरान, नाकेबंदी खत्म होने की शर्त के साथ भेजी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने पर अड़कर इसे ठुकरा दिया।
इस बयान से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पर्दे के पीछे की बातचीत में पाकिस्तान की केंद्रीय भूमिका सामने आती है। 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमलों से शुरू हुआ यह युद्ध आठवें महीने के करीब है। अप्रैल में हुआ संघर्षविराम जुलाई में होर्मुज़ में जहाजों पर हमलों के बाद टूट गया और अमेरिकी हमले फिर शुरू हो गए।
“न युद्ध, न शांति”
तेहरान में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने असामान्य रूप से खुलकर बात की। एक समारोह में उन्होंने कहा कि ईरान को “‘न युद्ध, न शांति’ की स्थिति से बाहर निकलना होगा” और एकता की अपील की।
सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित टिप्पणी में उन्होंने एक अंतरिम समझौते के टूटने के लिए अमेरिकियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने “सब कुछ बिगाड़ दिया”। फिर भी वे दोबारा कोशिश के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा, “मुझे अब भी लगता है कि हमें जाकर इसे पूरा करना चाहिए।”
बाद में अपनी वेबसाइट पर डाले गए एक भाषण में उन्होंने आम ईरानियों पर पड़ रहे असर की बात की। उन्होंने कहा, “इस समाज में बहुत से लोग हैं जो दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए जूझ रहे हैं।” उन्होंने इस तंगी को युद्ध के हालात से जोड़ा।
वॉशिंगटन का दबाव
ट्रंप कह चुके हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान चला सकता है। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को लिखे 23 अक्टूबर के एक ज्ञापन में, जिसकी एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की, चेतावनी दी गई कि ईरान ने विदेश में अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। क्लेटन ने लिखा, “अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ ईरानियों की जानलेवा साजिशें उन्नत चरण में पहुंच चुकी हैं।”
पेज़ेश्कियान इस हफ्ते मॉस्को जाने वाले हैं। रात में ईरान की न्यायपालिका ने बताया कि उसके प्रमुख ग़ुलामहुसैन मोहसेनी एजेई ने सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई से मुलाकात कर “जनता के अधिकार सुरक्षित करने” और भ्रष्टाचार से लड़ने पर चर्चा की। अपने पिता के उत्तराधिकारी बनने के बाद से मोजतबा ख़ामेनेई ने केवल लिखित संदेशों के जरिए संवाद किया है और वीडियो पर नहीं दिखे हैं। मुलाकात का समय और जगह नहीं बताई गई।
भारत से जुड़ाव
विदेश मंत्रालय ने इस हफ्ते कहा कि उड़ानें बाधित होने के बावजूद भारत ईरान को जीवनरक्षक दवाएं भेजता रहा है। होर्मुज़ खाड़ी के तेल और गैस के एक बड़े हिस्से का रास्ता है, इसलिए इसके खुलने से भारत जैसे आयातक देशों पर ईंधन कीमतों और शिपिंग का दबाव कम होगा।