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पाकिस्तान बोला, उसने और सऊदी अरब ने मक्का रक्षा समझौते की पुष्टि कर दी; तुर्की बाकी

विदेश कार्यालय ने कहा कि तीन देशों के इस समझौते में कोई छिपा प्रावधान नहीं है और यह किसी देश के खिलाफ नहीं है। बर्लिन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जर्मनी के राष्ट्रपति को भी यही भरोसा दिलाया।

संपादकीय डेस्क से · इस्लामाबादप्रकाशित
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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Official White House Photo by Lawrence Jackson / Wikimedia Commons; president.gov.ua, procession by Roman Kubanskiy / Wikimedia Commons, Public domain, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. विदेश कार्यालय के मुताबिक पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की पुष्टि की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
  2. समझौते के तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा।
  3. आसिफ अली जरदारी ने फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर से कहा कि यह समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की पुष्टि कर दी है। अब तीन हस्ताक्षरकर्ताओं में सिर्फ तुर्की की प्रक्रिया बाकी है।

विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने इस्लामाबाद में साप्ताहिक ब्रीफिंग में कहा, “पाकिस्तान और सऊदी अरब साम्राज्य अपनी पुष्टि की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं। तुर्की अपने घरेलू कानूनी ढांचे के मुताबिक जरूरी प्रक्रिया पूरी कर रहा है।” अंकारा ने इसी हफ्ते समझौता अपनी संसद में भेजा है।

अगस्त में हुए इस समझौते में कहा गया है कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।

“कोई छिपा प्रावधान नहीं”

खान ने ब्रीफिंग में उन सवालों का जवाब दिया कि यह समझौता पाकिस्तान को असल में किस बात के लिए बांधता है। उन्होंने कहा, “कोई छिपा प्रावधान नहीं है; समझौता अपने प्रावधानों और अनुच्छेदों में स्पष्ट है।” उन्होंने जोड़ा कि यह “मूल रूप से रक्षात्मक” है, “किसी खास देश के खिलाफ नहीं” है और आत्मरक्षा से जुड़े संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के अनुरूप है।

यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी अरब पर यमन के हूती लगभग रोज मिसाइल और ड्रोन दाग रहे हैं। समझौते को लागू करने के सवाल पर खान ने कहा, “यह फैसला तीनों साझेदार देश समझौते के मुताबिक करेंगे।” किसी भी मदद का स्वरूप और दायरा हालात का आकलन करने के बाद मिलकर तय होगा। उन्होंने कहा, “हम सऊदी अरब पर हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं,” और साथ ही यमन की एकता और वहां बातचीत से समाधान का समर्थन किया।

इसी हफ्ते पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा था कि पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए “जो भी मदद जरूरी होगी” देगा।

बर्लिन में जरदारी का संदेश

यही बात जर्मनी में भी दोहराई गई। राजनयिक रिश्तों के 75 साल पूरे होने पर तीन दिन के दौरे पर गए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शुक्रवार को जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक-वाल्टर श्टाइनमायर से कहा कि यह समझौता “किसी खास देश के खिलाफ नहीं” है।

श्टाइनमायर ने “क्षेत्रीय और वैश्विक विवादों के समाधान में पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका” की तारीफ की, और जरदारी ने अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की “ईमानदार मध्यस्थता” को मान्यता देने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया। अफगानिस्तान पर जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान का “अफगान लोगों से कोई टकराव नहीं है”, लेकिन वह आतंकवादियों को अफगान जमीन का इस्तेमाल अपने ऊपर हमले के लिए नहीं करने देगा। दोनों ने उन 500 अफगानों के सत्यापन में पाकिस्तान की मदद पर भी बात की जिन्हें जर्मनी भेजा जाना है। श्टाइनमायर ने कहा कि वे “उचित समय पर” पाकिस्तान आने पर विचार करेंगे।

नई दिल्ली की नजर क्यों

भारत के लिए समझौते का मुख्य प्रावधान ही अहम है: तुर्की की पुष्टि के बाद सऊदी अरब और तुर्की औपचारिक रूप से पाकिस्तान पर सशस्त्र हमले को खुद पर हमला मानने के लिए बंध जाएंगे। इस्लामाबाद का यह बार-बार का भरोसा कि समझौता किसी देश के खिलाफ नहीं है, उसी हफ्ते आया है जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि का कोई भी उल्लंघन “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।

पाकिस्तान ने इसी हफ्ते कतर, तुर्की और इंडोनेशिया के साथ ‘बद्र’ नाम का एक अलग रक्षा सहयोग समझौता भी किया है।

अपडेट 24 अक्टूबर 2026, रात 1:00 बजे: यह खबर पहली बार प्रकाशित होने के बाद अपडेट की गई।