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जून के बाद नैस्डैक की सबसे बड़ी गिरावट और 113 डॉलर के करीब ब्रेंट, दलाल स्ट्रीट के लिए मुश्किल संकेत

एआई पर खर्च की चिंता लौटने से चिप कंपनियों के शेयर टूटे और गुरुवार को नैस्डैक 2.6% गिरा। कच्चा तेल मई के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड तेज़ी से गिरी और रुपया 94.82 पर फिसल गया।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
न्यूयॉर्क में वॉल स्ट्रीट पर फेडरल हॉल (फ़ाइल फ़ोटो)
न्यूयॉर्क में वॉल स्ट्रीट पर फेडरल हॉल (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Arild Vågen / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. नैस्डैक 2.6% गिरकर 26,008.86 पर बंद हुआ, जून के बाद की सबसे बड़ी गिरावट; डाउ लगभग सपाट रहा।
  2. सऊदी अरब पर हमलों और ईरान पर हमले की आशंका से ब्रेंट 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया, मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर।
  3. गुरुवार को सेंसेक्स 460.30 अंक गिरा और रुपया 44 पैसे टूटकर 94.82 पर बंद हुआ।

शुक्रवार के कारोबार से पहले भारतीय शेयर बाज़ार को विदेश से कोई सहारा नहीं मिल रहा। गुरुवार को टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली से नैस्डैक कंपोज़िट 2.6% गिरा, जो जून के बाद उसकी सबसे तेज़ गिरावट है। वहीं सऊदी अरब पर हमलों और ईरान पर नए हमलों की चर्चा के बीच ब्रेंट कच्चा तेल मई के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।

नैस्डैक 694 अंक गिरकर 26,008.86 पर और एसएंडपी 500 1.21% गिरकर 7,663.43 पर बंद हुआ। टेक शेयरों का कम वज़न रखने वाला डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग जहां से चला था वहीं रुका, 11.89 अंक ऊपर 52,867.98 पर, क्योंकि पैसा वित्तीय और सुरक्षित माने जाने वाले शेयरों की ओर गया।

चिप शेयरों में भगदड़

सबसे ज़्यादा मार चिप बनाने वाली कंपनियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की क्षमता खड़ी कर रही कंपनियों पर पड़ी। फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 6.7% टूटा। मेटा प्लेटफॉर्म्स के शेयर करीब 7% गिरे, क्योंकि उसके नतीजों में एआई पर खर्च फिर बढ़ता दिखा और सूचीबद्ध होने के बाद पहली बार उसका फ्री कैश फ्लो नकारात्मक रहा। एनविडिया, माइक्रॉन, अमेज़न और अल्फाबेट भी गिरे।

बेयर्ड प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट के मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट माइकल एंटोनेली ने कहा, “समस्या यह है कि सब एक साथ इसका पैसा कहां से जुटाएंगे।” आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा ने कहा कि ग्राहक “इस बात से भी चिंतित हो रहे हैं कि कहीं एआई पर कुछ खर्च पूरी तरह बेकाबू तो नहीं, जिसका कोई असली फायदा नहीं”।

तेल, बॉन्ड और सोना

ब्रेंट एक समय 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। कारोबारी सऊदी अरब में दम्माम हवाई अड्डे और अरामको के एक तेल क्षेत्र पर हमलों की खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। साथ ही एक रिपोर्ट आई कि अमेरिका और इज़राइल ने 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की योजना बनाई है।

अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में ज़ोरदार खरीदारी हुई। 10 साल का यील्ड करीब 19 बेसिस पॉइंट गिरकर लगभग 4.95% पर आ गया, यानी फिर 5% से नीचे। मार्च 2023 के क्षेत्रीय बैंकिंग संकट के बाद यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। सोना उलटी दिशा में गया: करीब 2% गिरकर लगभग 4,061 डॉलर प्रति औंस, दो महीने से ज़्यादा का निचला स्तर, क्योंकि महंगे तेल से महंगाई की चिंता लौट आई।

गुरुवार को भारत में क्या हुआ

देश में सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 पर और निफ्टी 50 123.70 अंक गिरकर 22,687.65 पर बंद हुआ, लगातार तीसरे दिन गिरावट। एशियाई बाज़ार गुरुवार को पहले ही टूट चुके थे; सुबह के कारोबार में हैंग सेंग 2.73% और कोस्पी 2.27% नीचे थे।

रुपया बुधवार की ज़्यादातर बढ़त गंवा बैठा और 44 पैसे कमज़ोर होकर अनंतिम रूप से 94.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। ब्रेंट की छलांग सबसे बड़ी वजह रही। एसबीआई सिक्योरिटीज़ में फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख सनी अग्रवाल ने कहा, “सऊदी अरामको के तेल क्षेत्र पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत उछला।” विदेशी निवेशकों ने बुधवार को ₹1,022.32 करोड़ के भारतीय शेयर खरीदे थे।

शुक्रवार को किन बातों पर नज़र

भारतीय आईटी शेयरों के सामने दोहरी परीक्षा है: रात में अमेरिकी टेक शेयरों की गिरावट और बाज़ार बंद होने के बाद आने वाले इन्फोसिस के नतीजे। पांच गुना से ज़्यादा भर चुका जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भी शुक्रवार को बंद होगा। तेल 110 डॉलर से ऊपर रहते हुए कारोबारी किसी उछाल पर दांव लगाने से पहले पश्चिम एशिया में नरमी के संकेत देखेंगे।