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जीएसटी परिषद ने गिरफ्तारी के अधिकार खत्म करने की सिफारिश की, अभियोजन की सीमा ₹5 करोड़ की

परिषद की 57वीं बैठक में 5% और 18% के स्लैब नहीं छेड़े गए और ज़ोर कार्रवाई, रिफंड और रजिस्ट्रेशन पर रहा। ज़्यादातर बदलावों के लिए पहले कानून में संशोधन या अधिसूचना ज़रूरी है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
तिरुवनंतपुरम में जीएसटी भवन
तिरुवनंतपुरम में जीएसटी भवनAmitbalani / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. परिषद ने सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 हटाकर जीएसटी अधिकारियों के गिरफ्तारी के अधिकार वापस लेने और अभियोजन की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की।
  2. ₹10,000 से कम की मांग पर कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं होगा, और सामान्य जुर्माना ₹25,000 से घटकर ₹10,000 हो जाएगा।
  3. ज़ीरो-रेटेड और इनवर्टेड ड्यूटी वाले रिफंड दावों का 90% हिस्सा सिस्टम की जोखिम जांच के आधार पर अपने आप और अस्थायी तौर पर मंज़ूर होगा।
  4. आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक ये सिफारिशें सर्कुलर, अधिसूचना और कानून में संशोधन के ज़रिये ही कानूनी रूप से लागू होंगी।

जीएसटी परिषद ने जीएसटी अधिकारियों से करदाताओं को गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लेने और आपराधिक अभियोजन की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुई 57वीं बैठक में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया और ध्यान कार्रवाई और अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर रहा।

यह सितंबर 2025 में हुई 56वीं बैठक के बाद परिषद की पहली बैठक थी। उस बैठक में 5% और 18% की दो दरों वाले ढांचे को मंज़ूरी दी गई थी।

कार्रवाई के मोर्चे पर परिषद की सिफारिशें

आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक परिषद ने “सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 को हटाकर जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के अधिकार पूरी तरह वापस लेने” की सिफारिश की है। चूंकि इसका मतलब कानून से एक धारा हटाना है, इसलिए इसके लागू होने से पहले संसद और राज्य विधानसभाओं को अपने-अपने जीएसटी अधिनियमों में संशोधन करना होगा।

अभियोजन का दायरा भी सिमटेगा और ऐसे मामले भी कम होंगे। ₹5 करोड़ की ऊंची सीमा के अलावा विज्ञप्ति में सीजीएसटी अधिनियम की धारा 132(1) से कुछ अपराधों को हटाने का प्रस्ताव है। फर्ज़ी क्रेडिट वाले अपराध को उन मामलों तक सीमित करने का भी प्रस्ताव है, जिनमें माल, सेवा या इनवॉइस मिले बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया हो।

कारोबार पर भरोसा करना होगा। करदाताओं पर भरोसा करना होगा।

निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री, 8 अक्टूबर 2026 को बैठक के बाद की ब्रीफिंग में, डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार

टैक्सस्कैन की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्री ने कहा कि जहां आपराधिक मामला होगा, वहां अभियोजन जारी रहेगा।

छोटी मांग, कम जुर्माना

जहां कुल दांव पर लगा टैक्स (केंद्रीय, राज्य और एकीकृत जीएसटी के साथ सेस) ₹10,000 से कम होगा, वहां कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इस रकम से कम के लंबित नोटिसों पर ऐसे फैसला होगा मानो जारी करते समय भी यह सीमा लागू थी।

धारा 125 के तहत सामान्य जुर्माना, जो वहां लगता है जहां कोई खास जुर्माना तय न हो, ₹25,000 से घटकर ₹10,000 हो जाएगा। धोखाधड़ी के बिना वाले मामलों में, अगर आदेश के 30 या 60 दिनों के भीतर (धारा के हिसाब से) टैक्स और ब्याज चुका दिया जाए, तो जुर्माना घटकर 5% रह जाएगा।

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: मुख्य सीमाएं

  • ₹5 करोड़अभियोजन की प्रस्तावित सीमा, पहले ₹1 करोड़
  • ₹10,000कारण बताओ नोटिस से पहले दांव पर लगा न्यूनतम टैक्स
  • 90%ज़ीरो-रेटेड और इनवर्टेड ड्यूटी वाले रिफंड दावे अपने आप और अस्थायी तौर पर मंज़ूर होंगे
  • 1 नवंबर 2026इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे के तहत इनपुट सेवाओं का क्रेडिट रिफंड योग्य होगा

रिफंड, क्रेडिट और रजिस्ट्रेशन

रिफंड दावे की पावती देने का समय 15 दिन से घटकर 10 दिन हो जाएगा, और उसके बाद पावती मान ली जाएगी। निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे वाले कारोबारों के दावे का 90% हिस्सा सिस्टम के जोखिम आकलन के आधार पर अपने आप और अस्थायी तौर पर मंज़ूर हो जाएगा।

इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे के तहत इनपुट सेवाओं पर जमा क्रेडिट का रिफंड 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट पर मिलेगा। पूंजीगत वस्तुओं पर क्रेडिट 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए क्रेडिट के लिए रिफंड योग्य होगा, और यह 60 महीनों में बंटा होगा।

परिषद ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा, आउटडोर कैटरिंग, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्री परिसर के बाहर की पाइपलाइनों और मुफ्त नमूनों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी पाबंदियां हटाने की भी सिफारिश की। किसी राज्य में भौतिक मौजूदगी के बिना काम करने वाले छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता प्लेटफॉर्म के गोदाम को अपना कारोबारी स्थान घोषित करके अपने आप रजिस्टर हो सकेंगे।

दरों में लगभग कोई बदलाव नहीं

विज्ञप्ति के मुताबिक प्रक्रिया में सुधार पर ही ज़ोर था। दरों से जुड़े जो गिने-चुने फैसले हुए, वे खास वस्तुओं के लिए थे: इसबगोल (साइलियम) के बीज शून्य दर (NIL) में आ गए, ऑपरेटर के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों से यात्री परिवहन और किराये पर सीमित क्रेडिट के साथ 5% की वैकल्पिक दर मिलेगी, और ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के ज़रिये डिलीवरी सेवाओं पर बिना क्रेडिट के 5% टैक्स लगेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में सिफारिशों का स्वागत किया। डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक उन्होंने लिखा: “लक्ष्य साफ़ है: तेज़ फैसले, अनुपालन की कम लागत, स्वचालित रिफंड और भरोसे पर आधारित प्रशासन।”

आगे क्या होगा

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सिफारिशों को “संबंधित सर्कुलर/ अधिसूचनाओं/ कानून में संशोधन के ज़रिये लागू किया जाएगा”, और केवल इन्हीं के पास कानून की ताकत होती है। डेक्कन क्रॉनिकल और टैक्सस्कैन के मुताबिक सीतारमण ने कहा कि एजेंडा के मुद्दे 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे।

यह बैठक ऐसे समय हुई जब वसूली मज़बूत बनी हुई है। बिज़नेस टुडे की ओर से बताए गए अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में सकल जीएसटी राजस्व करीब ₹2.04 लाख करोड़ रहा, जो एक साल पहले के मुकाबले 14.7% ज़्यादा है।

मूल दस्तावेज़