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सुप्रीम कोर्ट से ₹8,415 करोड़ के एटी-1 बॉन्ड बहाल, यस बैंक के शेयर 20% टूटे
कोर्ट ने बैंक, आरबीआई और केंद्र की अपीलें खारिज कर दीं। ये अपीलें 2023 के उस फैसले के खिलाफ थीं, जिसमें 2020 में बैंक को बचाने के दौरान बॉन्ड बट्टे खाते में डालने का फैसला रद्द हुआ था।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का वह आदेश बरकरार रखा, जिसने ₹8,415 करोड़ के एटी-1 बॉन्ड का राइट-ऑफ रद्द किया था।
- एनएसई पर यस बैंक का शेयर 20% तक गिरकर ₹16.96 पर आया, फिर कुछ संभला।
- बैंक 17 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगा, तब और जानकारी की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यस बैंक के ₹8,415 करोड़ के एटी-1 बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने का फैसला रद्द करने वाला आदेश बरकरार रखा, जिसके बाद बैंक के शेयर 20% तक लुढ़क गए। यह राइट-ऑफ 2020 में इस निजी बैंक को बचाने की प्रक्रिया के दौरान किया गया था।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यस बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक और केंद्र सरकार की अपीलें खारिज कर दीं। ये अपीलें बॉम्बे हाई कोर्ट के जनवरी 2023 के फैसले के खिलाफ थीं, जिसने राइट-ऑफ को रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा कि उसने मामला “गुण-दोष के आधार पर तय” किया है और हाई कोर्ट के आदेश में दखल की कोई वजह नहीं है।
बॉन्डधारकों के वकील सृजन सिन्हा ने कहा कि कोर्ट ने राइट-ऑफ को “अवैध और मनमाना” पाया और इसे केंद्र की अधिसूचित अंतिम पुनर्गठन योजना के विपरीत माना।
बचाव योजना पर फिर सवाल
मार्च 2020 में गंभीर संकट में फंसे यस बैंक पर आरबीआई ने मोरेटोरियम लगाया और उसके बोर्ड को भंग कर दिया। इसके बाद यस बैंक पुनर्गठन योजना आई, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक और दूसरे बैंकों ने पैसा लगाया।
इसी बचाव के तहत बैंक ने अपने एडिशनल टियर-1 बॉन्ड को शून्य कर दिया। ये एक तरह के स्थायी बॉन्ड होते हैं, जो बैंक की मूल पूंजी में गिने जाते हैं और संकट की स्थिति में बट्टे खाते में डाले जा सकते हैं। इनमें ₹3,000 करोड़ के बॉन्ड 9.5% और ₹5,415 करोड़ के बॉन्ड 9% ब्याज वाले थे।
यस बैंक का कहना रहा है कि राइट-ऑफ बॉन्ड की शर्तों और उस समय के नियमों के मुताबिक था। 2025-26 के अपने खुलासों में बैंक ने कहा था कि उसे इस मुकदमे से कोई बड़ा वित्तीय असर होने की उम्मीद नहीं है और अंतिम फैसले का कोई भी असर आगे की अवधियों में दर्ज किया जाएगा।
बाज़ार की प्रतिक्रिया
निवेशक आश्वस्त नहीं हुए। एनएसई पर शेयर बुधवार के ₹21.20 के बंद भाव के मुकाबले ₹16.96 तक गिर गया और दोनों एक्सचेंजों पर 62 करोड़ से ज़्यादा शेयरों का कारोबार हुआ। दोपहर 3 बजे के कुछ बाद यह करीब 14% नीचे लगभग ₹18.30 पर था, जबकि उस दिन सेंसेक्स 2% से ज़्यादा चढ़ा।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अगस्त में अनुमान लगाया था कि बॉन्ड की पूरी बहाली से बैंक का कॉमन इक्विटी टियर-1 अनुपात करीब 2.3 से 2.5 प्रतिशत अंक घट सकता है, हालांकि कुल टियर-1 और कुल पूंजी अनुपात पर असर नहीं पड़ेगा।
अविनाश मेंटर रिसर्च सर्विसेज़ के संस्थापक और रिसर्च प्रमुख अविनाश गोरक्षकर ने फैसले को पूरी तरह अप्रत्याशित बताया। उन्होंने कहा कि बाज़ार जानना चाहता है कि बैंक देनदारी चुकाएगा या नहीं, और वे शेयर पर राय बनाने से पहले प्रबंधन से स्पष्टता का इंतज़ार करेंगे। ग्लोब कैपिटल मार्केट के विपिन कुमार ने कहा कि ₹16 से नीचे निर्णायक बंद भाव शेयर को ₹12 की ओर ले जा सकता है।
आगे क्या
यस बैंक 17 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगा, और उम्मीद है कि तब वह बताएगा कि इस फैसले से कैसे निपटेगा। गुरुवार दोपहर तक फैसले पर बैंक या आरबीआई की कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं थी।