संसदविनिवेश
वित्त मंत्रालय: 2003 की संसदीय बहस आईडीबीआई बैंक की फेयरफैक्स को बिक्री में बाधा नहीं
यूनियनों और एक पूर्व सचिव का कहना है कि सरकार ने संसद में आईडीबीआई में 51% हिस्सेदारी रखने का वादा किया था। मंत्रालय का कहना है कि वह वादा कभी कानून का हिस्सा नहीं बना, और 2018 में अदालत भी यही कह चुकी है।
मुख्य बातें
- वित्त मंत्रालय ने कहा कि सरकारी हिस्सेदारी घटाने पर रोक का संशोधन 2003 में पेश हुआ था, पर खारिज हो गया।
- मंत्रालय ने 17 दिसंबर 2018 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दिया कि सदन में दिए बयान कानून की जगह नहीं ले सकते।
- आलोचकों का कहना है कि सरकार ने संसद को आईडीबीआई में कम से कम 51% हिस्सेदारी रखने का आश्वासन दिया था।
वित्त मंत्रालय ने शनिवार को उस दलील को खारिज कर दिया कि दो दशक से भी ज्यादा पहले संसद में दिया गया एक वादा सरकार को आईडीबीआई बैंक का नियंत्रण बेचने से रोकता है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार की हिस्सेदारी बांधने वाला संशोधन 2003 में संसद में पेश हुआ था और खारिज हो गया था।
एक बयान में मंत्रालय ने कहा कि “प्रेस और मीडिया के कुछ वर्गों” ने बैंक के विधायी इतिहास पर टिप्पणियां की हैं। मंत्रालय के मुताबिक, 2003 के केंद्रीय बजट पर चर्चा और आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 पर बहस के दौरान “सरकार की हिस्सेदारी में कमी को सीमित करने के लिए एक संशोधन पेश किया गया था, लेकिन अंततः उसे अस्वीकार कर दिया गया और वह अधिनियमित कानून का हिस्सा नहीं बना।”
यह सफाई केंद्रीय मंत्रिमंडल के उस फैसले के तीन दिन बाद आई है, जिसमें बैंक की 60.72% हिस्सेदारी प्रेम वत्स की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की एक इकाई को करीब ₹52,878 करोड़ में बेचने को मंजूरी दी गई। सरकार 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) 30.24% हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
51% की दलील
बिक्री के विरोधियों का कहना है कि सरकार ने संसद को वचन दिया था। पूर्व केंद्रीय सचिव ई ए एस सरमा ने 15 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे खुले पत्र में कहा कि वित्त संबंधी स्थायी समिति ने जून 2003 की अपनी 46वीं रिपोर्ट में ऐसे प्रावधानों की सिफारिश की थी, जिनसे आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी 51% से नीचे न जाए। उनके मुताबिक, तत्कालीन वित्त मंत्री ने 8 दिसंबर 2003 को लोकसभा और 15 दिसंबर 2003 को राज्यसभा में इस बारे में आश्वासन दिया था। कर्मचारी यूनियनें उस मंत्री का नाम जसवंत सिंह बताती हैं।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस, जो इस सौदे को “निजीकरण” और “विदेशीकरण” कहता है, भी इसी आश्वासन का हवाला दे रहा है। उसने अपने सदस्यों से शुक्रवार को विरोध में काले बिल्ले लगाने को कहा था। बिक्री के बाद सरकार और एलआईसी के पास मिलाकर 34% हिस्सेदारी रहेगी।
अदालत ने क्या कहा था
मंत्रालय ने अपनी बात दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) के 17 दिसंबर 2018 के फैसले पर टिकाई है। ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले में अदालत ने इसी दलील पर आधारित याचिका खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा था, “लगभग 15 वर्ष पूर्व विधायी कार्यवाही से संबंधित एक बहस के दौरान सदन के समक्ष दिए गए वक्तव्य, केंद्र सरकार को आईडीबीआई लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी कम करने से नहीं रोकेंगे।” अदालत ने यह भी कहा कि “वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) के सिद्धांत पूरी तरह से लागू नहीं होते” और “आईडीबीआई निरसन अधिनियम, 2003 की भाषा में कोई अस्पष्टता नहीं है।”
मंत्रालय ने दो बजट भाषणों का भी जिक्र किया। 2016 में अरुण जेटली ने संसद में कहा था कि सरकार “अपनी हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से कम करने के विकल्प पर भी विचार करेगी।” 2021 में सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक को उस साल पूरे होने वाले रणनीतिक विनिवेशों में गिनाया था।
आईडीबीआई और सरकार की हिस्सेदारी
- 2003संसद ने आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम पारित किया; सरकारी हिस्सेदारी घटाने पर रोक का संशोधन खारिज।
- 2016बजट भाषण में अरुण जेटली ने हिस्सेदारी 50% से नीचे लाने पर विचार की बात कही।
- 17 दिसंबर 2018दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, संसद में दिए बयान केंद्र को हिस्सेदारी घटाने से नहीं रोकते।
- मई 2021मंत्रिमंडल ने रणनीतिक बिक्री और प्रबंधन नियंत्रण सौंपने को सैद्धांतिक मंजूरी दी।
- 14 अक्टूबर 2026मंत्रिमंडल ने 60.72% हिस्सेदारी करीब ₹52,878 करोड़ में फेयरफैक्स की इकाई को बेचने को मंजूरी दी।
आगे क्या
खरीदार को अभी भारतीय रिज़र्व बैंक की जांच पार करनी है और अल्पसंख्यक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर लाना है। निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग को उम्मीद है कि सौदा 31 मार्च 2027 से पहले पूरा हो जाएगा।
मूल दस्तावेज़
- Clarification on Legislative Developments concerning Government's shareholding in IDBIPress Information Bureau, Ministry of Finance, 17 अक्टूबर 2026