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कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित करेगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट को बताया

सरकार के मुताबिक कीमतें 20% से 70% तक घट सकती हैं। पीठ ने पूछा कि जब स्टेंट और सलाइन लाइन पर भी भारी मुनाफ़ा है, तो सीमा सिर्फ़ कैंसर दवाओं तक क्यों।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
मुंबई का कैंसर अस्पताल टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल
मुंबई का कैंसर अस्पताल टाटा मेमोरियल हॉस्पिटलReetesh Chaurasia / Wikimedia

मुख्य बातें

  1. ज़्यादातर कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन एमआरपी के 30% तक सीमित होगा, यह फ़ैसला एनपीपीए ने 8 अक्टूबर को लिया।
  2. सरकार के हलफ़नामे के मुताबिक कैंसर दवाओं पर मार्जिन अभी 170% से 700% से ज़्यादा तक है।
  3. कोर्ट ने पूछा कि सीमा सिर्फ़ कैंसर दवाओं तक क्यों है; मामला 27 अक्टूबर को फिर सुना जाएगा।

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30% तक सीमित करेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे इन दवाओं की कीमतें 20% से 70% तक घटेंगी।

फ़ार्मास्युटिकल्स विभाग के हलफ़नामे के मुताबिक यह फ़ैसला 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की बैठक में लिया गया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता के सामने सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए।

किन दवाओं पर लागू

शुरुआत में यह सीमा सस्ती दवाओं को छोड़कर सभी मंज़ूर कैंसर दवाओं पर लागू होगी। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक के तहत एक विशेषज्ञ समिति 10 से 15 दिन में सूची की सिफ़ारिश करेगी, और सरकार समय-समय पर इसे अपडेट करेगी।

हलफ़नामा कहता है कि अस्पताल उन निर्माताओं से ख़रीदते हैं जो सबसे ज़्यादा ट्रेड मार्जिन देते हैं, और फिर मरीज़ों को एमआरपी पर बेचते हैं। इसके मुताबिक कैंसर दवाओं पर मार्जिन 170% से 700% से भी ज़्यादा तक है। औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के तहत अनुसूचित दवाओं की अधिकतम कीमत में पहले से 16% खुदरा मार्जिन शामिल है।

बाकी दवाएं क्यों नहीं

पीठ ने पूछा कि सरकार सिर्फ़ कैंसर दवाओं पर क्यों रुक गई। जस्टिस मेहता ने भारत में बने एक कार्डियक स्टेंट का उदाहरण दिया, जिसका रिटेलर मूल्य ₹5,000 और एमआरपी ₹25,000 था, और एक सलाइन ड्रिप लाइन का, जिसकी एमआरपी ₹11 थी पर वह ₹270 में बेची गई। कोर्ट ने पूछा कि निर्माता एमआरपी को रिटेलर मूल्य का कई गुना कैसे तय कर सकते हैं।

सरकार की दलील थी कि सभी दवाओं पर एक जैसा मार्जिन कारगर नहीं होगा, क्योंकि वितरण की लागत उत्पाद और जगह के हिसाब से बदलती है, और सस्ती दवाओं, कोल्ड-चेन वाले उत्पादों और दूर-दराज़ के इलाकों में ज़्यादा मार्जिन की ज़रूरत पड़ सकती है। उसके मुताबिक अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले सामान पर मार्जिन 100% से 1,000% से भी ज़्यादा है। भाटी ने कोर्ट से कहा कि भारत में दवाओं की कीमतें पहले से सबसे कम कीमतों में हैं और ज़्यादा दख़ल से दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

किशन चंद जैन की 2023 में दायर यह याचिका 27 अक्टूबर को फिर सुनी जाएगी।