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न्यूज़क्लिक के खिलाफ रद्द हुई धोखाधड़ी की एफआईआर बहाल कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ईडी

एजेंसी का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने रिट के चरण में ही 'मिनी ट्रायल' चला दिया और उन ईमेल व बयानों को नज़रअंदाज़ किया, जो उसके मुताबिक न्यूज़ पोर्टल की पहले से तय विदेशी फंडिंग दिखाते हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ (फ़ाइल फ़ोटो)
न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Adv.tksujith / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

मुख्य बातें

  1. ईडी ने ईओडब्ल्यू की एफआईआर रद्द करने वाले हाईकोर्ट के मई 2026 के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दायर की है।
  2. एजेंसी के मुताबिक पीपीके न्यूज़क्लिक को 2018 में बढ़े हुए शेयर भाव पर ₹9.60 करोड़ का एफडीआई मिला।
  3. फरवरी में फेमा के तहत कंपनी और प्रबीर पुरकायस्थ पर ₹184 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) से दिल्ली हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) का वह आदेश रद्द करने को कहा है, जिसमें न्यूज़ पोर्टल न्यूज़क्लिक के खिलाफ धोखाधड़ी और साज़िश की एफआईआर खारिज कर दी गई थी। यह बात एजेंसी की याचिका से सामने आई है।

यह एफआईआर 2020 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के तहत पीपीके न्यूज़क्लिक और उसके मालिक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज की थी। मई 2026 में हाईकोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश के ज़रूरी तत्व नहीं बनते।

अपनी विशेष अनुमति याचिका में ईडी की दलील है कि हाईकोर्ट ने “रिट याचिका के चरण में ही मिनी ट्रायल चला दिया।” एजेंसी के मुताबिक अदालत ने उन ईमेल, बयानों और दूसरी सामग्री को नज़रअंदाज़ किया जो उसके हिसाब से पहले से तय फंडिंग दिखाती है, न्यूज़क्लिक के पेश दस्तावेज़ों पर ज़्यादा भरोसा किया और अहम दलीलें दर्ज नहीं कीं। ईडी ने यह भी कहा है कि फैसला सुनवाई खत्म होने के छह महीने बाद आया।

पैसे का मामला

ईडी का कहना है कि पीपीके न्यूज़क्लिक को 2018 में एक अमेरिकी कंपनी से ₹9.60 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला, और शेयर ₹11,500 प्रति शेयर के बढ़े हुए भाव पर जारी किए गए। एजेंसी का आरोप है कि नेविल रॉय सिंघम से जुड़ी कंपनियों से ₹92 करोड़ और आए, ऐसी सेवाओं के निर्यात के बदले जो उसके मुताबिक थीं ही नहीं। एजेंसी सिंघम को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ा बताती है।

ईडी के मुताबिक पुरकायस्थ ने इस पैसे के एक हिस्से से साकेत में फ्लैट खरीदा, और एजेंसी ₹4.93 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। फरवरी 2026 में फेमा कार्यवाही में कंपनी और पुरकायस्थ पर ₹184 करोड़ का जुर्माना लगाया गया।

एजेंसी का कहना है कि दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले अदालती आदेशों के चलते वह 2021 से अपनी जांच आगे नहीं बढ़ा सकी। इस मामले के यूएपीए और एफसीआरए वाले अलग हिस्से भी हैं, जो दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और सीबीआई ने दर्ज किए थे। सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई की कोई तारीख सामने नहीं आई है।