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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के इस्तेमाल का हर साल होगा हिसाब, गोयल ने रखा 2030 का लक्ष्य

व्यापार समझौता लागू होने के बाद व्यापार समिति की पहली बैठक में दोनों सरकारें इस पर सहमत हुईं कि कारोबारी इसका असल में कितना फ़ायदा उठा रहे हैं, इसकी नियमित जानकारी साझा होगी।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (फ़ाइल फ़ोटो)
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Europäische Kommission - Audiovisueller Dienst, Xa / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. पीयूष गोयल और जोनाथन रेनॉल्ड्स ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में 16वीं भारत-ब्रिटेन जेटको बैठक की सह-अध्यक्षता की।
  2. दोनों देश हर साल डेटा साझा करेंगे कि कारोबारी समझौते की कम शुल्क दरों का कितना दावा कर रहे हैं।
  3. गोयल ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का आह्वान किया और इसके लिए पांच क्षेत्र गिनाए।

भारत और ब्रिटेन इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे हर साल आपस में यह डेटा साझा करेंगे कि कारोबारी उनके नए व्यापार समझौते का कितना इस्तेमाल कर रहे हैं। समझौता लागू होने के बाद सोमवार को दोनों सरकारों की यह पहली बैठक थी।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के कारोबार, नवाचार, विज्ञान और व्यापार मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट) जोनाथन रेनॉल्ड्स ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में भारत-ब्रिटेन संयुक्त आर्थिक और व्यापार समिति (जेटको) की 16वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की। व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई को लागू हुआ था।

संयुक्त बयान में दोनों मंत्रियों ने इस समझौते को अपनी साझा महत्वाकांक्षा की “शुरुआत, अंत नहीं” बताया।

दोनों पक्षों में क्या तय हुआ

डेटा का यह आदान-प्रदान समझौता लागू होने के एक साल बाद शुरू होगा। इसमें यह जानकारी होगी कि निर्यातक कितनी बार कम शुल्क दरों का दावा कर रहे हैं, और कारोबारियों की राय भी होगी कि क्या ठीक चल रहा है और कहां मदद चाहिए। इसमें छोटे और मझोले कारोबारों पर खास ध्यान रहेगा।

मंत्रियों ने समझौते के तहत ज़रूरी समितियां और कार्य समूह बनाने, हर अध्याय के लिए सरकारी संपर्क अधिकारी तय करने और अमल में आने वाली दिक्कतें जल्द सुलझाने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने पर भी सहमति जताई। सेवाएं, नवाचार, सरकारी खरीद, विज्ञान और तकनीक, और जेंडर ऐसे क्षेत्र गिनाए गए जिनमें मिलकर ज़्यादा काम होगा।

बयान में समझौते के शुरुआती इस्तेमाल के उदाहरण भी दिए गए। जिस दिन यह लागू हुआ, उसी दिन भारतीय निर्यातकों ने ब्रिटेन को 50 से ज़्यादा खेप भेजीं, जिनमें स्मार्टफ़ोन, मशीनरी, सोने के गहने, कपड़े, चाय और कॉफ़ी शामिल थे। असम का जोहा चावल पहली बार ब्रिटेन भेजा गया। दूसरी ओर, बिना शुल्क वाली पहली स्कॉटिश सैल्मन दो हफ़्ते के भीतर भारत पहुंची, स्कॉच व्हिस्की कम शुल्क पर आई है और टैरिफ़-रेट कोटा के तहत पहली कारें आयात हो चुकी हैं।

गोयल का 2030 का लक्ष्य

बैठक के बाद हुए बिज़नेस प्लेनरी सत्र में गोयल ने दोनों देशों की कंपनियों से कहा कि वे इस समझौते को व्यापार, निवेश और रोज़गार में बदलें।

हमारी साझा महत्वाकांक्षा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की है। इसमें मुश्किल से साढ़े चार साल बचे हैं।

पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, 12 अक्टूबर 2026

उन्होंने साझेदारी के पांच क्षेत्र गिनाए: बुनियादी ढांचा और स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक और शोध, लंदन के सिटी और गुजरात के गिफ़्ट सिटी को जोड़ने वाली वित्तीय सेवाएं, और स्वास्थ्य व उपभोक्ता सामान। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के साथ लागू हुआ सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन सेवाओं को ज़्यादा प्रतिस्पर्धी दाम पर उपलब्ध कराकर दोनों अर्थव्यवस्थाओं की मदद कर सकता है।

रेनॉल्ड्स ने कहा कि समझौते को लागू हुए करीब 100 दिन हुए हैं और इसकी कामयाबी इस पर निर्भर करेगी कि कारोबारी निर्यात, निवेश और साझेदारी बढ़ाने में इसका कितना इस्तेमाल करते हैं।

ब्रिटेन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक की चार तिमाहियों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार £48.4 अरब रहा, जो एक साल पहले से 5.7% ज़्यादा है।

आगे क्या

उसी दिन भारत-ब्रिटेन विज्ञान और नवाचार परिषद की बैठक भी हुई, और उत्तरी इंग्लैंड के सात मेयरों और एक कंबाइंड अथॉरिटी प्रमुख का प्रतिनिधिमंडल भी मंत्रियों के साथ भारत में था। जेटको की 17वीं बैठक 2027 में ब्रिटेन में होगी।

मूल दस्तावेज़