नीतिपर्यावरण
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा, हरित अधिकरण और स्वतंत्र अदालतें जलवायु संरक्षण की धुरी
न्याय व्यवस्था और जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के जवाब में विदेश मंत्रालय की अधिकारी ने कहा कि भारत का रुख समता, जलवायु न्याय और साझा लेकिन अलग-अलग ज़िम्मेदारियों पर टिका है।

मुख्य बातें
- विदेश मंत्रालय की डिप्टी सेक्रेटरी बरखा ताम्रकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को भारत के पर्यावरण संरक्षण का स्तंभ बताया।
- उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन को विकास, आजीविका और मानवाधिकारों के लिए चुनौती मानता है।
- भारत ने 22 अक्टूबर को भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष का नौवां सालाना कार्यक्रम किया।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में उसकी पर्यावरण अदालतें और स्वतंत्र न्यायपालिका केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। यह बात जलवायु संकट में न्याय व्यवस्था की भूमिका पर हुई एक बहस में कही गई।
विदेश मंत्रालय की डिप्टी सेक्रेटरी बरखा ताम्रकार महासभा की तीसरी समिति में न्यायाधीशों और वकीलों की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट पर बोल रही थीं। रिपोर्ट का शीर्षक है “एक तात्कालिक और अस्तित्व से जुड़ा खतरा: जलवायु संकट से निपटने में न्याय व्यवस्था की भूमिका”।
ताम्रकार ने कहा, “भारत जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर वैश्विक चुनौती मानता है, जो विकास, आजीविका और मानवाधिकारों पर असर डालती है।” उन्होंने कहा कि भारत का रुख “समता, जलवायु न्याय और सतत विकास पर मज़बूती से टिका है”, साथ ही साझा लेकिन अलग-अलग ज़िम्मेदारियों और क्षमताओं के सिद्धांत पर भी, जिसके मुताबिक अमीर देशों को ज़्यादा बोझ उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “भारत में पर्यावरण संरक्षण को संविधान का मज़बूत सहारा है”, और इसके साथ व्यापक कानून, स्वतंत्र न्यायपालिका और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी हैं, जिसे उन्होंने इस व्यवस्था के स्तंभों में गिनाया।
न्यायाधीशों को लेकर रिपोर्ट की चिंताओं पर ताम्रकार ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी समेत “पारदर्शी, संस्थागत निगरानी वाले न्यायिक प्रशिक्षण” का हवाला दिया, जिसका मकसद “निष्पक्षता को मज़बूत करना और न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखना” है।
इससे अलग, भारत ने 22 अक्टूबर को महासभा में भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष का नौवां सालाना कार्यक्रम आयोजित किया, जहां साझेदार देशों ने सतत विकास में भारत के सहयोग की सराहना की। 15 करोड़ डॉलर का यह कोष 2017 में बना था।