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जयशंकर से बातचीत के बाद रुबियो बोले, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 'जितना करीब हो सकता है, उतना करीब'

अमेरिकी विदेश मंत्री और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा पर चर्चा की। इसके बाद दोनों यूएई के विदेश मंत्री के साथ ऊर्जा सुरक्षा पर त्रिपक्षीय बैठक में बैठे।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. मार्को रुबियो ने कहा कि समझौते पर दस्तखत से पहले अब कुछ ही मुद्दे बाकी हैं।
  2. एस जयशंकर ने बताया कि बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा शामिल रहे।
  3. रुबियो, जयशंकर और यूएई के अब्दुल्ला बिन जायद ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर त्रिपक्षीय बैठक की।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि भारत और अमेरिका लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर दस्तखत के बेहद करीब हैं। उन्होंने यह बात मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ दिन भर की बातचीत के बाद कही।

रुबियो ने शहर में पत्रकारों से कहा, “हम बहुत, बहुत करीब हैं। मैं कहूंगा कि समझौते पर अमल किए बिना जितना करीब हुआ जा सकता है, हम उतने करीब हैं।” उनके मुताबिक अब कुछ ही मुद्दे बचे हैं और समझौता शायद जल्द पूरा हो जाएगा।

जयशंकर ने बताया कि बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात ताज महल पैलेस होटल में हुई। यह इस साल रुबियो का दूसरा भारत दौरा है।

यूएई के साथ त्रिपक्षीय बैठक

बाद में रुबियो और जयशंकर के साथ यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान भी जुड़े, जो पिछले दो दिन से जयशंकर से बातचीत के लिए मुंबई में थे। तीनों ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की। पश्चिम एशिया संकट के कारण खाड़ी से तेल आपूर्ति बाधित होने के बीच यह भारत के लिए अहम मुद्दा है।

समझौता क्यों अटका रहा

अमेरिकी टैरिफ और भारत की रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर बातचीत महीनों से अटकी है। अगस्त 2025 में बातचीत टूटने के बाद वॉशिंगटन ने ज़्यादातर भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था। फरवरी में तय हुए एक ढांचे के तहत यह दर घटकर 18 प्रतिशत हुई, लेकिन उसके बाद प्रगति रुक गई।

इस महीने की शुरुआत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि बातचीत एक जगह “ठहर” गई है। पिछले हफ्ते वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि समझौते का पहला हिस्सा अंतिम चरण में है। भारत चाहता है कि उस पर लगने वाली अंतिम टैरिफ दर वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर हो।

सोमवार को उज्बेकिस्तान के समरकंद में रुबियो ने संकेत दिया था कि यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा छूट से जुड़े फैसलों पर असर डाल सकता है, जिनमें भारत के रूसी तेल आयात पर टैरिफ से जुड़े फैसले भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी माना कि भारत रातोंरात आपूर्तिकर्ता नहीं बदल सकता। उन्होंने कहा, “आप किसी एक मुद्दे की वजह से दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को बिखेर नहीं सकते।”

भारत कह चुका है कि वह स्रोतों में विविधता लाते हुए अमेरिका से भी ज़्यादा ऊर्जा खरीदेगा। भारतीय रिफाइनरियां मुख्य रूप से पश्चिम एशिया और रूस के मध्यम-खट्टे (मीडियम-सोर) कच्चे तेल के लिए बनी हैं, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल ज़्यादातर हल्का होता है और इस्तेमाल से पहले उसे मिलाना पड़ता है।

आगे क्या

रुबियो का कार्यक्रम 26/11 हमले के पीड़ितों की याद में ताज स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने का भी था। उन पीड़ितों में छह अमेरिकी नागरिक थे। बुधवार को वह गुजरात जाएंगे, जहां वह जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के रिफाइनरी परिसर का दौरा करेंगे और कारोबारी हस्तियों से मिलेंगे। पिछले एक साल के तनाव के बावजूद दोनों सरकारें रक्षा और तकनीक में रिश्ते गहरे करती रही हैं, और वॉशिंगटन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को चीन के मुकाबले एक संतुलन के रूप में देखता है।