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आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितता मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत
पीठ ने कहा कि वह दो साल से ज्यादा समय से हिरासत में हैं और सीबीआई के मामले में 147 में से सिर्फ सात गवाहों के बयान हुए हैं।

मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को जमानत न देने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के 23 फरवरी 2026 के आदेश को रद्द किया।
- अदालत ने कहा कि अब तक 147 में से सिर्फ 7 गवाहों से पूछताछ हुई है।
- रिहाई की शर्तें निचली अदालत तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को संस्थान में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सीबीआई के मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि दो साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी मुकदमा मुश्किल से शुरू हुआ है।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) का 23 फरवरी 2026 का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज की गई थी। आदेश गुरुवार को पारित हुआ और शनिवार को सामने आया।
पीठ ने मुकदमे की धीमी रफ्तार की ओर ध्यान दिलाया। उसने दर्ज किया कि “अब तक 147 में से सिर्फ 07 गवाहों से पूछताछ हुई है”, जबकि घोष दो साल से ज्यादा समय से हिरासत में हैं।
पीठ ने कहा, “हम हाईकोर्ट के आक्षेपित आदेश को रद्द करने और इस अपील को स्वीकार करने के इच्छुक हैं।” उसने जोड़ा कि “अपीलकर्ता को उन नियमों और शर्तों पर जमानत दी जाती है जो संबंधित निचली अदालत तय करे।”
सीबीआई ने 24 अगस्त 2024 के आरोपपत्र में घोष को नामजद किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप हैं। एजेंसी का आरोप है कि कॉलेज में वित्तीय गड़बड़ियां हुईं और अयोग्य उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए मेरिट अंकों में हेरफेर किया गया।
निचली अदालत ने 7 जनवरी 2025 को उनकी जमानत अर्जियां खारिज की थीं, और हाईकोर्ट ने इस साल फरवरी में उनकी याचिका ठुकरा दी थी।