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जुबीन गर्ग मौत मामले के पहले शिकायतकर्ता आरोपियों की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

गौहाटी हाईकोर्ट से गायक के बैंड सदस्य अमृतप्रभा महंत और निलंबित डीएसपी संदीपन गर्ग को जमानत मिलने के बाद वकील रतुल बोरा ने पुलिस आरोपपत्र की खामियों को जिम्मेदार ठहराया।

संपादकीय डेस्क से · मोरीगांवप्रकाशित
गुवाहाटी में गौहाटी हाईकोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
गुवाहाटी में गौहाटी हाईकोर्ट (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Pinakpani / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. जुबीन गर्ग की मौत के बाद पहली पुलिस शिकायत दर्ज कराने वाले रतुल बोरा सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
  2. वह गौहाटी हाईकोर्ट से सात में से दो आरोपियों को मिली जमानत को चुनौती दे रहे हैं।
  3. बोरा ने कहा कि मामले में सरकार की भूमिका 'संतोषजनक नहीं' रही।

गायक जुबीन गर्ग की मौत के बाद पहली पुलिस शिकायत दर्ज कराने वाले वकील रतुल बोरा ने शनिवार को कहा कि वह सात में से दो आरोपियों को जमानत देने के गौहाटी हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

मोरीगांव में पत्रकारों से बात करते हुए बोरा ने राज्य पुलिस के आरोपपत्र को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, “पुलिस के आरोपपत्र में खामियों के कारण इस मामले के आरोपियों को एक के बाद एक जमानत मिल रही है।”

उन्होंने असम सरकार की ओर से अभियोजन के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कानूनी कार्यवाही में सरकार की भूमिका संतोषजनक नहीं रही है।” उन्होंने कहा, “मैं शीर्ष अदालत से अनुरोध करूंगा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अन्य आरोपियों को जमानत न मिले।”

हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को गायक के बैंड की सदस्य अमृतप्रभा महंत को रिहा किया था और कहा था कि उस चरण में सबूतों से उनके खिलाफ साजिश और हत्या का मामला नहीं बनता। शुक्रवार को अदालत ने गायक के चचेरे भाई और असम पुलिस के निलंबित उपाधीक्षक संदीपन गर्ग को जमानत दी, जिन पर गैर-इरादतन हत्या का एक ही आरोप है।

बाकी आरोपी हिरासत में हैं। इनमें मुख्य आरोपी, फेस्टिवल आयोजक श्यामकानु महंत, के साथ सिद्धार्थ शर्मा, शेखर ज्योति गोस्वामी, नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य शामिल हैं।

जुबीन गर्ग की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी, जहां वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के लिए गए थे। सिंगापुर की कोरोनर अदालत को कोई गड़बड़ी नहीं मिली, लेकिन राज्यभर में 60 से ज्यादा एफआईआर दर्ज होने के बाद असम पुलिस की सीआईडी टीम ने मामला अपने हाथ में लिया।