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स्टारलिंक पर मस्क को रिलायंस का जवाब: 'हम कभी प्रतिस्पर्धा से नहीं डरे'
एलन मस्क ने मुकेश अंबानी पर स्टारलिंक को रोकने का आरोप लगाया था। शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज ने चुप्पी तोड़ी और कहा कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवा भी उन्हीं सरकारी मंजूरियों का इंतजार कर रही है।

मुख्य बातें
- रिलायंस ने कहा कि वह सैटेलाइट संचार में स्टारलिंक समेत हर प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है।
- कंपनी के मुताबिक जियो की सैटेलाइट सेवा भी सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है।
- स्टारलिंक, जियो और यूटेलसैट वनवेब, तीनों को स्पेक्ट्रम से पहले सुरक्षा मंजूरी चाहिए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एलन मस्क को जवाब दे दिया है। स्पेसएक्स प्रमुख ने एक हफ्ते पहले मुकेश अंबानी पर भारत में स्टारलिंक की शुरुआत रोकने का आरोप लगाया था। शुक्रवार को कंपनी ने कहा कि उसे किसी प्रतिद्वंद्वी से डर नहीं है।
कंपनी ने कहा, “रिलायंस में हम कभी प्रतिस्पर्धा से नहीं डरे।” उसने कहा कि वह सैटेलाइट संचार में स्टारलिंक समेत हर प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है, और याद दिलाया कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाएं भी सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। रिलायंस ने 2016 में मोबाइल टेलीफोनी में जियो के आने का जिक्र किया और कहा कि आज उसके 53 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं।
हफ्ते भर चली पोस्ट
विवाद 7 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब मस्क ने लिखा कि स्टारलिंक को “कुछ कुलीन कारोबारी अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए रोक रहे हैं।” फिर उन्होंने अंबानी का नाम लेकर पूछा कि क्या वे “भारत के असली बॉस” हैं, और बाद की एक पोस्ट में उन्हें “प्रधानमंत्री अंबानी” कहा। मस्क का तर्क है कि सैटेलाइट इंटरनेट उन दूरदराज इलाकों तक पहुंच सकता है जहां कमजोर कनेक्टिविटी पढ़ाई और छोटे कारोबारों की राह रोकती है। उन्होंने स्टारलिंक को रोके जाने का कोई सबूत नहीं दिया है।
शुक्रवार तक रिलायंस चुप थी। उसके बयान में मस्क का नाम नहीं है।
सरकार: सब एक ही कतार में
केंद्र शुरू से इस आरोप को खारिज करता रहा है। संचार मंत्रालय ने भारत की सैटेलाइट लाइसेंसिंग व्यवस्था को “निष्पक्ष और भेदभाव रहित” बताया है और कहा है कि स्टारलिंक, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब, तीनों की सुरक्षा जांच मोटे तौर पर एक ही चरण में है।
तीनों के पास ऐसे उपग्रह समूहों के जरिए मोबाइल सेवा देने का लाइसेंस है जो एक जगह स्थिर नहीं रहते। सिर्फ लाइसेंस से व्यावसायिक सेवा शुरू नहीं हो सकती। हर कंपनी को पहले सुरक्षा शर्तें पूरी करनी होंगी, उसके बाद ही स्पेक्ट्रम दिया जा सकता है।
खबरों के मुताबिक वनवेब ने सितंबर में जल्द मंजूरी की गुहार लगाई थी। उसने जनवरी 2025 में सुरक्षा अनुपालन का प्रदर्शन किया था और तब से 18 महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने इस हफ्ते नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि वनवेब कतार में स्टारलिंक से काफी आगे है, क्योंकि उसने पांच साल पहले आवेदन किया था और उसका जमीनी नेटवर्क तीन साल से तैयार है।
स्टारलिंक का पक्ष
स्टारलिंक का कहना है कि वह तैयार है। कंपनी की बिजनेस ऑपरेशंस उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारत में 20 गेटवे साइट बन चुकी हैं, जिनमें सैकड़ों एंटीना हैं। खबरों के मुताबिक स्टारलिंक ने अंतरिक्ष नियामक इन-स्पेस के पास अपने दूसरी पीढ़ी के लगभग 30,000 उपग्रहों वाले समूह की मंजूरी के लिए फिर से आवेदन किया है, जो सीधे फोन तक कनेक्शन देने के लिए है।
आगे क्या
जब तक गृह मंत्रालय सुरक्षा जांच पूरी नहीं करता, कोई कंपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नहीं बेच सकती, और सरकार ने कोई तारीख नहीं बताई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल को यह भी तय करना बाकी है कि ऑपरेटर स्पेक्ट्रम के लिए कितना भुगतान करेंगे।