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आईएमएफ: ईरान युद्ध से इस साल सिकुड़ेंगी पश्चिम एशिया और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाएं, खाड़ी देशों में मंदी
आईएमएफ ने गुरुवार को कहा कि 2026 में पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और पाकिस्तान का उत्पादन 1.3% घटेगा। बहरीन, कुवैत, क़तर और इराक की जीडीपी में दो अंकों की गिरावट होगी और सऊदी अरब व यूएई भी मंदी में जाएंगे।

मुख्य बातें
- आईएमएफ के मुताबिक 2026 में पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और पाकिस्तान का उत्पादन 1.3% सिकुड़ेगा।
- बहरीन, कुवैत, क़तर और इराक की जीडीपी में दो अंकों की गिरावट का अनुमान है।
- अनुमान इस धारणा पर है कि संघर्ष 2027 की शुरुआत में थमेगा; लंबी जंग सबसे बड़ा जोखिम है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने गुरुवार को कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध की वजह से इस साल पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाएं सिकुड़ेंगी और खाड़ी के कई तेल निर्यातक देश मंदी में चले जाएंगे।
अपने क्षेत्रीय आर्थिक परिदृश्य में आईएमएफ ने अनुमान लगाया कि 2026 में इस पूरे इलाके का उत्पादन 1.3% घटेगा और 2027 में 6.6% की बढ़त के साथ वापसी करेगा। इसके बावजूद उत्पादन युद्ध से पहले के अनुमान से नीचे रहेगा।
आईएमएफ के पश्चिम एशिया और मध्य एशिया विभाग के निदेशक जिहाद अज़ूर ने कहा, “यह तेज़ कटौती मुख्य रूप से उन अर्थव्यवस्थाओं में है जिन पर संघर्ष का सबसे सीधा असर पड़ा है।” उन्होंने कहा, “खाड़ी के कई तेल निर्यातक देशों के इस साल मंदी में जाने का अनुमान है।”
तेल निर्यातकों पर सबसे ज़्यादा मार
आईएमएफ को उम्मीद है कि ओमान को छोड़कर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की हर अर्थव्यवस्था इस साल सिकुड़ेगी। बहरीन, कुवैत और क़तर के साथ जीसीसी से बाहर का इराक भी जीडीपी में दो अंकों की गिरावट झेलेगा। सऊदी अरब और यूएई के भी मंदी में जाने का अनुमान है, हालांकि आईएमएफ ने कहा कि ऊर्जा व्यापार में रुकावट का असर उन पर पड़ोसियों से कम है।
आईएमएफ ने इस गिरावट के लिए अमेरिका और इज़राइल के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ युद्ध को ज़िम्मेदार बताया, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ और जिसने पूरे इलाके में ऊर्जा उत्पादन, जहाज़रानी, पर्यटन, व्यापार और भरोसे को चोट पहुंचाई है। उसके मुताबिक तेल आयात करने वाले देश निर्यातकों से बेहतर टिके रहे, जिन्हें विदेश से आने वाले पैसे, पर्यटन और नीतिगत कदमों से सहारा मिला।
पाकिस्तान इसी क्षेत्रीय समूह में गिना जाता है। आईएमएफ ने परिदृश्य में उसके लिए अलग आंकड़ा नहीं दिया।
शांति पर टिका अनुमान
ये अनुमान इस धारणा पर हैं कि संघर्ष 2027 की शुरुआत में थम जाएगा और व्यापार धीरे-धीरे सामान्य होगा। आईएमएफ ने कहा कि परिदृश्य पर “असाधारण रूप से ऊंची अनिश्चितता” के बादल हैं। अन्य जोखिमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उम्मीद की जा रही उत्पादकता बढ़त का दोबारा आकलन और महंगाई व सरकारी वित्त की चिंताओं के चलते ब्याज दरों में और बढ़ोतरी शामिल है।
अज़ूर ने कहा, “लंबा खिंचने वाला संघर्ष परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है।”
पड़ोसी इलाके बेहतर हालत में हैं। आईएमएफ को उम्मीद है कि कॉकेशस और मध्य एशिया इस साल 5.2% और 2027 में 5% बढ़ेंगे।
कोष ने सरकारों से कहा कि वे महंगाई पर काबू और टिकाऊ सरकारी वित्त को प्राथमिकता दें, केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता बचाएं और उत्पादकता व रोज़गार बढ़ाने वाले सुधार आगे बढ़ाएं।
ज़मीन पर जंग
यह अनुमान ऐसे समय आया है जब युद्ध थमने के कोई संकेत नहीं हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इसी हफ्ते कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास सात टैंकर हमलों या बारूदी सुरंगों की चपेट में आए, और यमन के हूती सऊदी अरब पर मिसाइल व ड्रोन हमले जारी रखे हुए हैं। बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब में अपने मिशनों से कुछ राजनयिकों और उनके परिवारों को लौटने का आदेश दिया, और गुरुवार को ब्रेंट कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया।