दुनियापश्चिम एशिया
सऊदी अरब ने हवाई अड्डों पर हूती हमलों को युद्ध अपराध कहा, अमेरिका ने ईरान पर शिकंजा कसा
रियाद का कहना है कि उसके हवाई अड्डों पर हमलों में 19 लोगों की जान गई है और ईरान हूतियों को हथियार दे रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान से जुड़ी प्रतिबंध सूची में 26 नाम जोड़े।

मुख्य बातें
- सऊदी अरब के मुताबिक उसके हवाई अड्डों पर हूती हमलों में 19 लोगों की मौत, 364 घायल हुए हैं।
- एक सऊदी मंत्री ने कहा कि ईरान हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण और समर्थन देता आ रहा है।
- अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान की आर्थिक मदद से जुड़े 16 लोगों और 10 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए।
सऊदी अरब ने शुक्रवार को अपने हवाई अड्डों पर हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों को “पूरी तरह युद्ध अपराध” बताया। इसी दिन उसकी हवाई सुरक्षा ने एक और ड्रोन मार गिराया और अमेरिका ने ईरान पर अपने प्रतिबंधों में नए नाम जोड़े।
यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि गठबंधन सेना ने पूर्वी प्रांत की ओर छोड़े गए एक ड्रोन को बीच में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने यह नहीं बताया कि ड्रोन कहां से आया या उससे कोई नुकसान हुआ या नहीं। हूतियों ने अपनी तरफ से दावा किया कि उन्होंने मारिब के ऊपर सऊदी अरब का एक विंग लूंग II ड्रोन गिरा दिया।
निशाने पर हवाई अड्डे
गठबंधन के आंकड़े बताते हैं कि इस महीने रियाद पर कितनी चोट पड़ी है। अल-मालिकी के मुताबिक राजधानी के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 1 अक्टूबर से अब तक 20 हमले हुए हैं, जिनमें वहां 17 लोगों की मौत हुई और 330 से ज़्यादा घायल हुए। सभी सऊदी हवाई अड्डों को मिलाकर 19 लोगों की जान गई है और 364 घायल हुए हैं।
अल-मालिकी ने कहा, “हवाई अड्डों पर हमला हज़ारों आम यात्रियों की जान खतरे में डालता है।” उन्होंने बताया कि गठबंधन ने सना, सादा और अमरान के पहाड़ों में हूतियों के 127 डिपो नष्ट किए हैं।
हूतियों ने गुरुवार को अदन में अल-मआशिक राष्ट्रपति महल पर मिसाइल दागकर अपना अभियान और फैला दिया। यह महल यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता वाली सरकार का ठिकाना है। यमन के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार कम से कम पांच लोग मारे गए और 16 घायल हुए। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल सुरक्षित रहे।
रियाद की उंगली तेहरान पर
सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह किसे ज़िम्मेदार मानता है। सार्वजनिक कूटनीति के उप विदेश मंत्री रायद क्रिमली ने गुरुवार को एक ब्रीफिंग में कहा, “ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए हूती मिलिशिया को हथियार, प्रशिक्षण और समर्थन देता आ रहा है।”
उन्होंने कहा कि तेहरान से बातचीत के रास्ते खुले हैं। “हम ईरान से सीधे संपर्क में हैं,” उन्होंने कहा, लेकिन यह भी जोड़ा कि ईरानी अधिकारी समाधान के लिए ज़रूरी रियायतें देने को तैयार नहीं दिखते। रियाद ने हूतियों से भी सीधे बात करने की कोशिश की थी। क्रिमली ने कहा, “इस तनाव की शुरुआत में हमने उनसे ओमान के मस्कट में मिलने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।”
फ्रांस ने कहा कि उसने सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा में मदद के लिए सैन्य साधन तैनात करना शुरू कर दिया है।
वॉशिंगटन का दबाव
वॉशिंगटन में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 16 लोगों और 10 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए। इनमें इराक का एक बैंक और ऐसे ऑफशोर और छाया बैंकिंग नेटवर्क शामिल हैं, जिनके बारे में मंत्रालय का कहना है कि उन्होंने ईरान के लिए करोड़ों डॉलर इधर-उधर किए। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर लिखा, “ईरान की अर्थव्यवस्था के चारों ओर फंदा कस रहा है, और ईरान के तथाकथित सहयोगी भी उसे नहीं बचा सकते।”
मंत्रालय की वित्तीय अपराध इकाई फिनसेन ने बैंकों को यह चेतावनी भी दी कि ईरान धार्मिक दान के नेटवर्क, जिनमें धार्मिक अंशदान की रकम भी शामिल है, का दुरुपयोग कर रहा है। यह कदम ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम की मुहिम का हिस्सा है।
खबरों के मुताबिक व्हाइट हाउस और पेंटागन ने ऐसी योजनाएं बनाई हैं कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिर से लड़ाई का आदेश दें तो ईरानी ठिकानों पर जीबीयू-43 “मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स” इस्तेमाल किया जाए। यह अमेरिकी जखीरे का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है। व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने कहा, “हम संवेदनशील सैन्य योजनाओं पर टिप्पणी नहीं करते।”
ट्रंप का अपना लहजा कुछ नरम रहा। न्यूज़मैक्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे और उन्हें ज़मीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने की नौबत नहीं दिखती।
तेल के दाम में खास हलचल नहीं हुई। शुक्रवार सुबह ब्रेंट कच्चा तेल 0.39% गिरकर 105.51 डॉलर प्रति बैरल पर था।