LokVox

अर्थव्यवस्थाबाज़ार

अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ₹53,337 करोड़ पहुंची, पर रफ्तार धीमी

विदेशी फंड लगातार दसवें हफ्ते शुद्ध बिकवाल रहे, हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नरम पड़ने और रुपये के मज़बूत होने से दो दिन उन्होंने खरीदारी भी की। $100 से ऊपर कच्चा तेल दबाव बनाए हुए है।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
मुंबई में दलाल स्ट्रीट पर बीएसई की इमारत, फिरोज़ जीजीभॉय टावर्स (फ़ाइल फ़ोटो)
मुंबई में दलाल स्ट्रीट पर बीएसई की इमारत, फिरोज़ जीजीभॉय टावर्स (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Ashwin Kumar from Bangalore, India / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

मुख्य बातें

  1. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयरों में शुद्ध ₹53,337 करोड़ की बिकवाली की है।
  2. इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए उनकी बिकवाली ₹3,69,164 करोड़ तक पहुंच गई है।
  3. 23 अक्टूबर को खत्म हफ्ते में बिकवाली धीमी पड़ी और एफपीआई दो दिन खरीदार रहे।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयरों से शुद्ध ₹53,337 करोड़ निकाले हैं। इसके साथ बिकवाली का सिलसिला दस हफ्ते का हो गया है, हालांकि 23 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में निकासी की रफ्तार काफी धीमी पड़ी।

उस हफ्ते दो दिन विदेशी फंड खरीदार रहे। सेकेंडरी बाज़ार में बिकवाली के उलट, उन्होंने इस महीने आईपीओ के ज़रिए शेयरों में शुद्ध ₹5,281 करोड़ लगाए।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, “इस साल एक्सचेंजों के ज़रिए एफपीआई की कुल बिकवाली ₹3,69,164 करोड़ रही।”

बिकवाली धीमी क्यों हुई

विश्लेषक तीन वजहें गिनाते हैं। 10 साल के अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड की यील्ड 5.36% से घटकर करीब 5% पर आ गई, जिससे अमेरिकी बॉन्ड का आकर्षण कुछ कम हुआ। रुपया मज़बूत होकर डॉलर के मुकाबले 94.94 पर आ गया। और बड़ी भारतीय कंपनियों का मूल्यांकन अब इतना सस्ता दिखता है कि कुछ खरीदार लौटने लगे हैं।

घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास पर्याप्त पैसा है और वे ठीक मूल्यांकन वाले लार्ज कैप शेयर खरीद रहे हैं, जिससे बड़े शेयरों को सहारा मिला है।

खतरा अभी टला नहीं

सबसे बड़ी चिंता कच्चा तेल है। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को $116.72 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 29 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हफ्ते भर में इसमें 6.2% की तेज़ी आई। विश्लेषकों का मानना है कि $100 से ऊपर बना कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ेगा और विदेशी फंड हर तेज़ी पर बेचते रहेंगे।

हफ्ते में सबसे ज़्यादा मार छोटे शेयरों पर पड़ी। निफ्टी 50 करीब 2.35% गिरा, लेकिन निफ्टी मिडकैप 100 में 5.6% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 7.3% की गिरावट आई। बाज़ार में चर्चा रही कि उधार के पैसे से खरीदे गए सौदों की जबरन बिक्री से मिड और स्मॉल कैप टूटे।

निकासी लगातार जारी है। 11 अक्टूबर तक ही एफपीआई इस महीने ₹44,166 करोड़ के शेयर बेच चुके थे और तब डिपॉज़िटरी आंकड़ों के मुताबिक 2026 में उनकी शुद्ध इक्विटी निकासी ₹3.04 लाख करोड़ थी, जबकि पूरे 2025 में यह ₹1.66 लाख करोड़ थी।