अर्थव्यवस्थाबाज़ार
छह महीने के शिखर पर ब्रेंट और पांच केंद्रीय बैंक तय करेंगे दलाल स्ट्रीट का हफ्ता
शुक्रवार को कच्चा तेल अप्रैल के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ और वॉल स्ट्रीट दिन के आखिर में फिसला। लगातार चार सत्रों से गिर रहे भारतीय शेयरों के सामने अब फेड, ईसीबी और बैंक ऑफ जापान के फैसले हैं।

मुख्य बातें
- शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 29 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा बंद स्तर है।
- पिछले हफ्ते विदेशी निवेशकों ने ₹2,697 करोड़ के भारतीय शेयर शुद्ध रूप से बेचे, जबकि घरेलू संस्थानों ने खरीदारी की।
- अमेरिकी फेडरल रिज़र्व अपना फैसला बुधवार, 28 अक्टूबर को रात 11:30 बजे (भारतीय समय) सुनाएगा।
अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में भारतीय शेयर बाज़ार ऐसे माहौल में उतर रहा है जब कच्चा तेल चढ़ रहा है, विदेशी निवेशक अब भी बेच रहे हैं और दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक एक के बाद एक फैसले सुनाने वाले हैं। भारत के ज़्यादातर तेल आयात का पैमाना माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 3.1% चढ़कर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह 29 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा बंद स्तर है।
यह उछाल इस बढ़ती आशंका के बीच आया कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका और इज़राइल ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं। साथ ही हूती विद्रोहियों ने शुक़ैक़ तेल संयंत्र समेत सऊदी ठिकानों पर हमले किए। हफ्ते भर में ब्रेंट 6.2% चढ़ा, यह लगातार तीसरी साप्ताहिक बढ़त है। वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 3.8% चढ़कर 103.27 डॉलर पर बंद हुआ।
विदेश से कमज़ोर संकेत
वॉल स्ट्रीट ने हफ्ता गिरावट के साथ खत्म किया। शुक्रवार को डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 652.82 अंक यानी 1.23% गिरकर 52,215.16 पर आ गया, क्योंकि बिकवाली टेक्नोलॉजी से फैलकर उपभोक्ता और हेल्थकेयर शेयरों तक पहुंच गई। एसएंडपी 500 में 0.52% और नैस्डैक कंपोज़िट में 0.21% की गिरावट आई।
इसका बड़ा हिस्सा भारत में कारोबार बंद होने के बाद हुआ। शुक्रवार दोपहर के कारोबार में गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में डॉलर में ट्रेड होने वाला निफ्टी अनुबंध, गिफ्ट निफ्टी, 22,603 पर था। यह निफ्टी के 22,600 के बंद स्तर से सिर्फ 3 अंक ऊपर था और उस वक्त सोमवार को सपाट शुरुआत का इशारा कर रहा था। न्यूयॉर्क की बाद की गिरावट और तेल का उछाल इस भाव में शामिल नहीं थे।
दलाल स्ट्रीट कहां खड़ा है
पिछले हफ्ते निफ्टी 2.36% और सेंसेक्स 2.15% गिरा, और लगातार चार सत्र गिरावट रही। सबसे ज़्यादा मार मझोली और छोटी कंपनियों पर पड़ी, जिनके प्रमुख सूचकांक करीब 5.6% और 7.3% टूटे। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले अस्थायी तौर पर 94.93 पर बंद हुआ।
एक्सचेंजों के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने चार कारोबारी दिनों में ₹2,697.37 करोड़ के शेयर शुद्ध रूप से बेचे, जबकि घरेलू संस्थानों ने ₹10,942.19 करोड़ की खरीदारी की और हर सत्र में खरीदार रहे।
मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ के मुख्य शोध अधिकारी रवि सिंह के मुताबिक निफ्टी को पहला सहारा करीब 22,300 पर और फिर 22,000 पर है। उन्होंने शनिवार को कहा, “ऊपर की ओर 22850-22900 का दायरा एक अहम रुकावट बना हुआ है, जो 21 दिन के ईएमए से मेल खाता है।”
पहली परीक्षा सोमवार को टेक्नोलॉजी शेयरों में होगी, क्योंकि शुक्रवार को बाज़ार बंद होने के बाद इंफोसिस ने इस साल के लिए अपना राजस्व वृद्धि अनुमान घटाकर 1% से 2% कर दिया।
चार दिन में पांच केंद्रीय बैंक
यह हफ्ता ब्याज दर के फैसलों से असामान्य रूप से भरा है। सबसे पहले भारतीय समय से बुधवार तड़के रिज़र्व बैंक ऑफ न्यूज़ीलैंड फैसला सुनाएगा, और उम्मीद है कि वह दर 2.75% से बढ़ाकर 3% करेगा। बैंक ऑफ कनाडा बुधवार शाम फैसला करेगा, और अर्थशास्त्रियों को दर 2.25% पर बनी रहने की उम्मीद है।
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की दो दिन की बैठक बुधवार को खत्म होगी और फैसला भारतीय समय से रात 11:30 बजे आएगा। उसकी लक्ष्य सीमा 3.75% से 4% है। वायदा बाज़ार इस हफ्ते दर बढ़ने की संभावना कम मान रहे हैं, हालांकि दिसंबर में बढ़ोतरी को वे ज़्यादा संभावित मानते हैं।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) गुरुवार शाम 6:45 बजे फैसला सुनाएगा। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद वह जून और सितंबर में दो बार दरें बढ़ा चुका है, और इस बार उसकी जमा दर 2.5% पर बनी रहने की उम्मीद है। बैंक ऑफ जापान शुक्रवार को टोक्यो में दोपहर के आसपास फैसला सुनाएगा और उसके 1.25% पर दर बनाए रखने की उम्मीद है।
बैंकों के अलावा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति का पूर्ण अधिवेशन सोमवार से गुरुवार तक चलेगा, इज़राइल में मंगलवार को आम चुनाव है और ब्रिटेन बुधवार को अपना बजट पेश करेगा।