अर्थव्यवस्थारुपया
तेल के उछाल से जियो वाली बढ़त गई, रुपया 44 पैसे टूटकर 94.82 पर
सऊदी तेल ठिकानों पर हमलों के बाद ब्रेंट उछला और भारतीय शेयर लगातार तीसरे दिन गिरे, जिससे गुरुवार को रुपया बुधवार की ज़्यादातर बढ़त गंवा बैठा।

मुख्य बातें
- डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे कमज़ोर होकर 94.82 पर बंद हुआ (अनंतिम)।
- वायदा कारोबार में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 3% उछलकर 112.33 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा।
- जियो आईपीओ के डॉलर आने से रुपया बुधवार को 53 पैसे मज़बूत हुआ था।
गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे गिरकर अनंतिम रूप से 94.82 पर बंद हुआ। कच्चे तेल में उछाल और गिरते शेयर बाज़ार ने पिछले दिन की ज़्यादातर तेज़ी पर पानी फेर दिया।
अंतरबैंक बाज़ार में रुपया 94.47 पर खुला और पूरे दिन कमज़ोर होता गया; एक समय यह 94.94 तक फिसला। बुधवार को यह 53 पैसे चढ़कर 94.38 पर बंद हुआ था, जो छह हफ्ते का सबसे मज़बूत स्तर था। तब जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए आए डॉलर और भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप से मदद मिली थी।
नुकसान तेल से
सबसे बड़ा दबाव तेल से आया। यमन के हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड वायदा 3.23% चढ़कर 112.33 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। भारत अपना ज़्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए कीमत में हर बढ़ोतरी से डॉलर की मांग बढ़ती है।
एसबीआई सिक्योरिटीज़ में फंडामेंटल रिसर्च प्रमुख सनी अग्रवाल ने कहा, “सऊदी अरामको के तेल क्षेत्र पर हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत उछला।”
कमज़ोर डॉलर से कुछ राहत मिली। छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.17% गिरकर 101.60 पर रहा और अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड भी नीचे आई।
शेयर बाज़ार का दबाव
भारतीय शेयर लगातार तीसरे दिन गिरे। सेंसेक्स 460.30 अंक टूटकर 73,249.39 पर और निफ्टी 50 123.70 अंक गिरकर 22,687.65 पर बंद हुआ। बुधवार को ₹1,022.32 करोड़ के शेयर खरीदने वाले विदेशी निवेशकों की फिर से बिकवाली पर नज़र है।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि जियो की पेशकश के बाद डॉलर की उपलब्धता सुधरी है और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की उम्मीद से और सहारा मिल सकता है। पर उन्होंने चेताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की नई निकासी या कच्चे तेल का 120 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ना रुपये को फिर नीचे धकेल सकता है।