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आईपीओ के पैसे पर नज़र के लिए सेबी का प्रस्ताव: जुर्माना और प्रमोटरों के खाते फ्रीज़
हर इश्यू के लिए एक मॉनिटरिंग एजेंसी होगी जो सीधे एक्सचेंज को रिपोर्ट करेगी। सहयोग न करने वाली कंपनियों पर ₹50,000 का जुर्माना और प्रमोटरों की होल्डिंग फ्रीज़ हो सकती है।

मुख्य बातें
- सेबी चाहता है कि हर शेयर इश्यू के लिए मॉनिटरिंग एजेंसी हो, चाहे इश्यू कितना भी छोटा हो। ऑफर फॉर सेल वाला हिस्सा इससे बाहर रहेगा।
- मॉनिटरिंग एजेंसी से सहयोग न करने के हर मामले पर एक्सचेंज कंपनी पर ₹50,000 का जुर्माना लगा सकेंगे।
- लगातार चूक पर प्रमोटरों के डीमैट खाते फ्रीज़ किए जा सकते हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने लिस्टेड कंपनियों के लिए जनता से जुटाए पैसे के इस्तेमाल पर नज़र रखने की और सख्त व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसमें जुर्माना और आखिरी उपाय के तौर पर, कंपनी के सहयोग न करने पर प्रमोटरों की शेयरहोल्डिंग फ्रीज़ करना शामिल है।
मंगलवार को जारी परामर्श पत्र के मुताबिक हर शेयर इश्यू के लिए मॉनिटरिंग एजेंसी ज़रूरी होगी, चाहे इश्यू का आकार कुछ भी हो। ऑफर फॉर सेल से जुटाया गया पैसा, जो कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को जाता है, इससे बाहर रहेगा। एजेंसियां सीधे स्टॉक एक्सचेंजों को रिपोर्ट करेंगी और एक्सचेंज इन रिपोर्टों को अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखाएंगे।
कंपनी अड़ंगा लगाए तो क्या होगा
अगर कोई कंपनी सहयोग नहीं करती, तो एजेंसी अपने पास मौजूद सबसे अच्छी जानकारी के आधार पर रिपोर्ट दाखिल करेगी और साथ में “असहयोग का बयान” देगी। जब तक कंपनी चूक ठीक करके उस तिमाही की पूरी रिपोर्ट नहीं बनने देती, तब तक वह न अपनी एजेंसी को हटा सकेगी और न नई एजेंसी नियुक्त कर सकेगी।
एक्सचेंज असहयोग के हर मामले पर कंपनी पर ₹50,000 का जुर्माना लगा सकेंगे और रिपोर्ट की तय तारीख के 30 दिन के भीतर नोटिस जारी करेंगे। अगर 15 दिन बाद भी रिपोर्ट या जुर्माना बकाया रहता है, तो एक्सचेंज प्रमोटरों को नोटिस भेजेंगे। उसके दस दिन बाद वे डिपॉज़िटरी से प्रमोटरों के डीमैट खाते फ्रीज़ करना शुरू करने को कहेंगे।
फीस न चुकाने को असहयोग नहीं माना जाएगा। इसके बजाय एजेंसियां पूरी फीस पहले ले सकेंगी और समझौता जल्दी खत्म होने पर बचा हिस्सा लौटाएंगी।
ये प्रस्ताव सेबी के पूर्व कार्यकारी निदेशक वी एस सुंदरेसन की अध्यक्षता वाले एक कार्य समूह की सिफारिशों पर आधारित हैं, जो 2015 के लिस्टिंग नियमों की समीक्षा कर रहा है। रिपोर्टिंग की समय सीमा इश्यू के नियमों से हटाकर लिस्टिंग नियमों में डाली जाएगी, ताकि एक ही नियमावली लागू हो।
यह परामर्श पत्र ऐसे समय आया है जब बाज़ार में शेयर बिक्री की होड़ है। ज़ेटवर्क और टोनबो इमेजिंग समेत कई कंपनियों ने इस हफ्ते खुलने वाले इश्यू के लिए प्राइस बैंड तय किए हैं।