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ज़ेटवर्क का ₹5,012 करोड़ का आईपीओ 15 अक्टूबर को खुलेगा, प्राइस बैंड ₹143-151
बेंगलुरु की मैन्युफ़ैक्चरिंग कंपनी ने नए शेयरों का इश्यू और शुरुआती निवेशकों की बिक्री, दोनों बढ़ा दिए हैं। कंपनी करीब ₹25,583 करोड़ का मूल्यांकन चाहती है।

मुख्य बातें
- ज़ेटवर्क के आईपीओ का दाम ₹143 से ₹151 प्रति शेयर तय हुआ है, इश्यू 15 से 19 अक्टूबर तक खुला रहेगा।
- ₹5,012 करोड़ के इश्यू में ₹2,830 करोड़ के नए शेयर हैं, जो अपडेटेड ड्राफ़्ट में ₹2,600 करोड़ थे।
- ऑफ़र फ़ॉर सेल 49% बढ़कर 14.45 करोड़ शेयर हो गया, बेचने वालों में पीक XV, एक्सेल और लाइटस्पीड शामिल हैं।
ज़ेटवर्क मैन्युफ़ैक्चरिंग बिज़नेसेज़ ने करीब ₹5,012 करोड़ के अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए ₹143 से ₹151 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। कंपनी ने सोमवार को एक सार्वजनिक घोषणा में बताया कि इश्यू गुरुवार, 15 अक्टूबर को खुलेगा।
प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर बेंगलुरु की इस कंपनी का मूल्यांकन करीब ₹25,583 करोड़ होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 14 अक्टूबर को खुलेगी, इश्यू 19 अक्टूबर को बंद होगा और शेयर 23 अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।
योजना से बड़ा इश्यू
अगस्त में अपडेटेड ड्राफ़्ट दस्तावेज़ दाख़िल करने के बाद से इश्यू का आकार बढ़ा है। नए शेयरों का इश्यू अब ₹2,830 करोड़ का है, जो पहले ₹2,600 करोड़ था। मौजूदा शेयरधारकों का ऑफ़र फ़ॉर सेल 49% बढ़कर 9.68 करोड़ से 14.45 करोड़ शेयर हो गया है, जिसकी कीमत ऊपरी दाम पर करीब ₹2,182 करोड़ है।
बेचने वालों में सह-संस्थापक अमृत प्रतीक आचार्य और श्रीनाथ रामकृष्णन, प्रमोटर समूह की इकाई क्रिओवेट इनोवेशन और वेंचर निवेशक पीक XV, एक्सेल, लाइटस्पीड और काए कैपिटल शामिल हैं।
नई रकम में से करीब ₹2,160 करोड़ कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों का कर्ज़ चुकाने में लगेंगे। बाकी रकम अधिग्रहण और सामान्य कॉरपोरेट कामों के लिए रखी गई है।
बाज़ार से कारख़ानों तक
ज़ेटवर्क की स्थापना 2018 में आचार्य, रामकृष्णन, विशाल चौधरी, अंकित फ़तेहपुरिया और राहुल शर्मा ने की थी। यह विनिर्मित पुर्ज़ों के ऑनलाइन बाज़ार के रूप में शुरू हुई थी। अब कंपनी भारत, अमेरिका, जर्मनी और स्पेन में अपने 26 कारख़ाने चलाती है, जहां अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, रक्षा, एआई इन्फ़्रास्ट्रक्चर और तेल-गैस क्षेत्र के लिए उत्पाद बनते हैं। इसके ग्राहकों में सीमेंस गमेसा, एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी, डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना शामिल हैं। कंपनी ने 2025-26 में अपना सिविल इन्फ़्रास्ट्रक्चर कारोबार बंद कर दिया।
2025-26 में जारी कारोबार से राजस्व 40% बढ़कर ₹15,913 करोड़ रहा, जो एक साल पहले ₹11,332 करोड़ था। कंपनी को इस साल ₹1,606 करोड़ का घाटा हुआ, जिसकी मुख्य वजह एकमुश्त ख़र्च रहा। अप्रैल-जून 2026 में राजस्व 55% बढ़कर ₹4,118 करोड़ रहा और जारी कारोबार का घाटा ₹881 करोड़ से घटकर ₹64 करोड़ रह गया।
कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टैनली, गोल्डमैन सैक्स, एवेंडस, जेएम फ़ाइनेंशियल, एचएसबीसी और पैंटोमैथ इस इश्यू का प्रबंधन कर रहे हैं।