नीतिबुनियादी ढांचा
सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों की एक साथ योजना के लिए नया प्राधिकरण, कैबिनेट की मंज़ूरी
एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण एक राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान बनाएगा और ₹500 करोड़ या उससे ज़्यादा की हर केंद्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की जांच करेगा।

मुख्य बातें
- केंद्रीय कैबिनेट ने 6 अक्टूबर को एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (आईटीएलए) को मंज़ूरी दी, जो एक स्पेशल पर्पज़ व्हीकल के रूप में बनेगा।
- यह सड़क से लेकर शहरी परिवहन तक आठ क्षेत्रों के लिए 10 साल या उससे ज़्यादा अवधि का राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान बनाएगा।
- यह ₹500 करोड़ या उससे ज़्यादा की केंद्रीय परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी करेगा; वित्तीय मूल्यांकन पहले की तरह ही होगा।
- सरकार के अपने अध्ययन के मुताबिक 2023-24 में भारत की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी का 7.97% थी।
केंद्रीय कैबिनेट ने एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी, आईटीएलए) बनाने को मंज़ूरी दे दी है। यह नई संस्था देश की सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जलमार्गों की योजना एक ही नेटवर्क के रूप में बनाएगी। यह फ़ैसला 6 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
सरकार के मुताबिक यह प्राधिकरण “परिवहन से जुड़े कई मंत्रालयों और एजेंसियों में बिखरी योजना और अमल” की समस्या दूर करेगा। बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस कदम को अर्थव्यवस्था की करीब 7-8% की वृद्धि के साथ बढ़ती लॉजिस्टिक्स मांग से जोड़ा। उन्होंने उन राजमार्गों, रेल लाइनों, जलमार्गों, हवाई अड्डों और बंदरगाहों का भी ज़िक्र किया जो इस मांग को पूरा करने के लिए बन रहे हैं।
आईटीएलए क्या करेगा
कैबिनेट की विज्ञप्ति आईटीएलए को एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स योजना, शोध, परियोजना मूल्यांकन और निगरानी, नीतिगत सहायता और डेटा विश्लेषण के लिए राष्ट्रीय शीर्ष संस्था बताती है। इसका पहला बड़ा काम 10 साल या उससे ज़्यादा अवधि का राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान बनाना है। इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स शामिल होंगे।
मंत्रालय अपनी योजनाएं खुद बनाते रहेंगे। आईटीएलए उनकी अल्पकालिक क्षेत्रीय योजनाओं (करीब पांच साल) और सालाना योजनाओं की जांच करेगा कि वे मास्टर प्लान से मेल खाती हैं या नहीं।
नई व्यवस्था में कौन क्या करेगा
₹500 करोड़ या उससे ज़्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन आईटीएलए करेगा। वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा व्यवस्था के पास ही रहेगा। यह इन परियोजनाओं के निर्माण की निगरानी भी करेगा, अड़चनें दूर करने के लिए एक समन्वित व्यवस्था चलाएगा और पूरा होने के बाद उनके असर का आकलन करेगा।
परिवहन डेटा का एक साझा भंडार
आईटीएलए एक राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार (नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉज़िटरी) बनाएगा। इसमें सरकार के पास पहले से मौजूद स्रोतों का डेटा जुड़ेगा: जीएसटीएन के ई-वे बिल, फ़ास्टैग, वाहन रिकॉर्ड, जीपीएस आधारित सिस्टम और शहरी ट्रैफ़िक प्रबंधन प्रणालियां। इस डेटा से माल ढुलाई के प्रवाह और यात्रा के शुरुआती व अंतिम बिंदुओं (ओरिजिन-डेस्टिनेशन) का विश्लेषण होगा।
प्राधिकरण 2022 की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति की समीक्षा पर सलाह भी देगा और इस क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण, कौशल विकास और शोध कार्यक्रम चलाएगा। खबरों के मुताबिक यह पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का पूरक होगा।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ़ैसले के दिन सोशल मीडिया पोस्ट में इसके अपेक्षित फ़ायदे गिनाए।
इसके अपेक्षित असर में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर दक्षता, कम लॉजिस्टिक्स लागत और मज़बूत बहुविध कनेक्टिविटी शामिल हैं।
जिस लागत को घटाना है
लॉजिस्टिक्स लागत का सरकार का अपना अनुमान पिछले साल आया था। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) के साथ मिलकर किए गए अध्ययन में 2023-24 में यह लागत जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 7.97% आंकी। बरसों तक जो 13-14% का आंकड़ा दोहराया जाता रहा, वह ज़्यादातर बाहरी अध्ययनों पर आधारित था।
भारत का लॉजिस्टिक्स खर्च, 2023-24
- 7.97%जीडीपी के अनुपात में लॉजिस्टिक्स लागत
- ₹24.01 लाख करोड़कुल लॉजिस्टिक्स लागत
- 9.09%गैर-सेवा उत्पादन के अनुपात में
- 3,500+अनुमान के लिए सर्वे किए गए उद्योग प्रतिभागी
अभी क्या तय नहीं है
कैबिनेट ने आईटीएलए को स्पेशल पर्पज़ व्हीकल के रूप में मंज़ूरी दी है। न विज्ञप्ति में और न ही ब्रीफ़िंग में बताया गया कि यह कंपनी होगा या वैधानिक निकाय, या इसके लिए संसद से कोई कानून पास कराया जाएगा या नहीं। खबरों के मुताबिक यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत डीपीआईआईटी में रहेगा; कैबिनेट की विज्ञप्ति में किसी मुख्य मंत्रालय का नाम नहीं है।
अभी तक इसके अध्यक्ष, बोर्ड, कर्मचारियों, बजट या काम शुरू करने की तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
मूल दस्तावेज़
- Cabinet approves setting up of Integrated Transport & Logistics AuthorityPMIndia (Cabinet release), 6 अक्टूबर 2026
- From Growth Engine to Global Edge: Supercharging India's LogisticsPIB, 27 नवंबर 2025