नीतिअदालत
बीसीआई अध्यक्ष के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले वकीलों पर हमले की जांच करेगी पुलिस एसआईटी
वकीलों ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के दफ़्तर में पिटाई का आरोप लगाकर सीबीआई जांच मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जगह डीसीपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में टीम बनाने को कहा।

मुख्य बातें
- दिल्ली पुलिस आयुक्त को डीसीपी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी बनानी होगी।
- वकीलों का कहना है कि शिकायत के दो महीने बाद भी एफ़आईआर दर्ज नहीं हुई।
- कोर्ट ने वकीलों की मांगी सीबीआई जांच की जगह एसआईटी चुनी, और मजिस्ट्रेट के पास जाने का रास्ता खुला रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली पुलिस से उन वकीलों पर कथित हमले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने को कहा, जो बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वकीलों की शिकायत की ठीक से जांच हो, और इसके लिए पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) स्तर के किसी वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी बने। इस बीच वकील संबंधित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के पास भी जा सकते हैं।
सीबीआई जांच की मांग
वकीलों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बीसीआई परिसर में उन पर हमला हुआ। उन्होंने 22 अगस्त को आईपी एस्टेट थाने के प्रभारी को शिकायत दी। उनकी ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि दो महीने बाद भी एफ़आईआर दर्ज नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर मिश्रा के कहने पर आए थे, और दलील दी कि सीबीआई जांच या कोई स्वतंत्र एसआईटी ज़रूरी है, क्योंकि दिल्ली पुलिस सरकार के नियंत्रण में है और मिश्रा सत्तारूढ़ दल के सांसद हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले उनकी सीबीआई जांच की मांग यह कहकर ठुकरा दी थी कि वे मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दायर कर सकते हैं।
पीठ की राय
जस्टिस बागची ने कहा कि कथित हमले के वक़्त मिश्रा मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि आपकी दिलचस्पी हमलावरों से ज़्यादा अध्यक्ष पर मुकदमा चलाने में है।” जब भूषण ने सीबीआई पर ज़ोर दिया, तो जज ने कहा कि सरकारी नियंत्रण की यही चिंता उस एजेंसी पर भी लागू हो सकती है। भूषण ने जवाब दिया कि सीबीआई निदेशक को एक समिति चुनती है जिसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश होते हैं।
सीसीटीवी फुटेज पर जज ने भरोसा दिलाया कि वकीलों को इसे देखने मिलेगा। जस्टिस बागची ने कहा, “कोर्ट आपको पहुंच देगा, आपके मुवक्किलों को निष्पक्ष [जांच] का अधिकार है।” उन्होंने कहा, “जांच चलने दीजिए।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संज्ञान लेने से पहले मजिस्ट्रेट हमलावरों की पहचान कर सकते हैं।