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राजनीतिएसआईआर प्रदर्शन

विदेश में बसे 400 से ज्यादा भारतीय मूल के विद्वानों ने एसआईआर पर 'अराजक' सड़क प्रदर्शनों की निंदा की

27 देशों के छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों के हस्ताक्षर वाले 'स्पेयर इंडिया फ्रॉम एनार्की' बयान में दलों से मतभेद संवैधानिक संस्थाओं के भीतर सुलझाने की अपील की गई है।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित
नई दिल्ली में तिरंगे के साथ प्रदर्शनकारी (फ़ाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली में तिरंगे के साथ प्रदर्शनकारी (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: Alnitak-Alnilam-Mintaka / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. 27 देशों के विश्वविद्यालयों से जुड़े 400 से ज्यादा लोगों ने बयान पर हस्ताक्षर किए।
  2. बयान में अनाम ताकतों पर भारतीय लोकतंत्र पर संदेह फैलाने की "कुटिल योजना" का आरोप है।
  3. हस्ताक्षरकर्ताओं ने "अराजकता के व्याकरण" के खिलाफ बी आर आंबेडकर की चेतावनी का हवाला दिया।

27 देशों के विश्वविद्यालयों से जुड़े भारतीय मूल के 400 से ज्यादा छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों ने एक बयान पर हस्ताक्षर कर उन सड़क प्रदर्शनों की निंदा की है जिन्हें वे “अराजक” बताते हैं। बयान में भारत की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर करने की कोशिशों की भी आलोचना है।

“स्पेयर इंडिया फ्रॉम एनार्की” (भारत को अराजकता से बचाइए) शीर्षक वाला यह बयान सोमवार को सामने आया, जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। बयान में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने तैयार किया। हस्ताक्षरकर्ता हार्वर्ड, स्टैनफर्ड, ऑक्सफर्ड, कैम्ब्रिज, एमआईटी, प्रिंसटन, येल, कोलंबिया, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर जैसे संस्थानों से जुड़े हैं।

बयान कहता है, “भारतीय लोकतंत्र में संदेह के बीज बोने की एक अनैतिक और कुटिल योजना रची गई है।” इसमें तर्क दिया गया है कि अदालतों में लंबित मामलों का इस्तेमाल भारतीय लोकतंत्र पर सवाल उठाने के लिए हो रहा है और सड़क आंदोलनों के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अवैध ठहराने की कोशिश की जा रही है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने सभी सामाजिक और राजनीतिक समूहों से अपील की है कि वे अपने मतभेद संवैधानिक संस्थाओं के भीतर बहस, चर्चा और असहमति के जरिए सुलझाएं। उन्होंने लिखा, “हम सभी सामाजिक और राजनीतिक ताकतों से आग्रह करते हैं कि वे हमारी पीड़ा और इच्छाओं पर ध्यान दें।” और जोड़ा, “भारत को लोकतांत्रिक दुनिया के लिए सभी सही कारणों से मिसाल बनना चाहिए।”

उन्होंने बी आर आंबेडकर का सहारा लिया और “क्रांति के खूनी तरीकों को छोड़ने” के उनके आह्वान को उद्धृत किया, जिन्हें आंबेडकर ने “अराजकता का व्याकरण” कहा था।

नामित हस्ताक्षरकर्ताओं में हार्वर्ड की सुरभि होडिगेरे, स्टैनफर्ड के देवांश शर्मा और समयुक्ता श्रीवत्स, कैम्ब्रिज के आशिक मायाकोंडा, और ऑक्सफर्ड के नीतीश राय परवानी, आशीष गौरव, शाओनी कर और मुकुंद माधव शर्मा शामिल हैं। कुछ अन्य मैनचेस्टर विश्वविद्यालय और दक्षिण कोरिया की येउंगनाम यूनिवर्सिटी से हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं, और किसान संगठन व ट्रेड यूनियन शुक्रवार को जिला स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी में हैं।