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सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में ही रहेंगे, मजिस्ट्रेट बोले: 'कानून का सम्मान नहीं'
दिल्ली के एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कॉकरोच जनता पार्टी के दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत बुधवार तक बढ़ाई और उनके जमानतदार नामंजूर किए। तीसरे सदस्य को निजी मुचलके पर छोड़ा गया।

मुख्य बातें
- विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने दास और रांका की हिरासत 21 अक्टूबर दोपहर 2 बजे तक बढ़ाई।
- पहचान दस्तावेजों में गड़बड़ी के चलते मजिस्ट्रेट ने जमानतदारों को अनुपयुक्त पाया।
- सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे को छह महीने अच्छे आचरण के निर्देश के साथ निजी मुचलके पर रिहा किया गया।
दिल्ली के एक मजिस्ट्रेट ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने से इनकार कर दिया। उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि उनका आचरण “कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाता”।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने आदेश दिया कि दोनों को बुधवार, 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे फिर पेश किया जाए। जंतर-मंतर में घुसपैठ के मामले में उनकी पांच दिन की हिरासत सोमवार को खत्म हो रही थी। दिल्ली पुलिस ने और समय मांगा और दलील दी कि रिहा होने पर दोनों फिर कानून तोड़ेंगे और दूसरों को भी उकसाएंगे।
मजिस्ट्रेट ने आदेश में “अधिसूचना से हटाए गए स्थानों पर प्रदर्शन का बार-बार आह्वान करने की आदत” का जिक्र किया। आदेश में कहा गया कि दोनों नेताओं का यह आश्वासन कि वे दोबारा ऐसा नहीं करेंगे, उनके पिछले आचरण और जांच अधिकारी की सामग्री को देखते हुए भरोसा पैदा नहीं करता।
जमानतदार नामंजूर
मामला काफी हद तक जमानतदारों पर टिका। जांच के बाद मजिस्ट्रेट ने प्रस्तावित जमानतदारों को अनुपयुक्त पाया। पहचान दस्तावेजों में गड़बड़ी थी और वे जिनकी जमानत ले रहे थे, उनके बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं दे पाए। अब दास और रांका को नए जमानतदार पेश करने होंगे और दो दिन के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करनी होंगी, जिनकी एक प्रति जांच अधिकारी को देनी होगी।
दोनों को मंदिर मार्ग थाने में पेश किया गया। यह कार्यवाही उन मुचलकों से जुड़ी है जो उन्होंने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद पहली बार हिरासत में लिए जाने पर 11 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम जिले में भरे थे। तब उन्हें ₹50,000 के मुचलके पर इस शर्त के साथ छोड़ा गया था कि वे एक साल तक शांति भंग के किसी मामले में शामिल नहीं होंगे।
उनके वकील ने अदालत से कहा कि दोनों ने 10 अक्टूबर के बाद प्रदर्शन का कोई आह्वान नहीं किया। जांच अधिकारी ने कहा कि वे बार-बार सोशल मीडिया पर लोगों को जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस समेत गैर-निर्धारित स्थलों पर बुलाते रहे।
शिंदे रिहा
उनके साथ पकड़े गए पार्टी सदस्य अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया और छह महीने तक शांति बनाए रखने को कहा गया।
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने हिरासत बढ़ाए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई कारण नहीं है।” उन्होंने सुनवाई को “एसईएम अदालत के समय की पूरी बर्बादी” बताया।
मामला कैसे यहां पहुंचा
दास और रांका उन 14 लोगों में थे जिन्हें 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि यह समूह निजी परिसर से होकर जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल में घुसा और पुलिस के काम में बाधा डाली। दिल्ली पुलिस ने एक दिन पहले एक स्थायी आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था और पूर्वी दिल्ली के रामलीला ग्राउंड, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को विकल्प बताया था।
सीजेपी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पिछले हफ्ते रिहा हुए पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके कह चुके हैं कि दास और रांका के बाहर आने पर पार्टी अपनी प्रदर्शन योजना पर फिर विचार करेगी।
बुधवार की सुनवाई तय करेगी कि ऐसा इसी हफ्ते होगा या नहीं।