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स्टारलिंक और स्टारशील्ड: अंतरिक्ष में लगी रफ्तार की सीमा यूक्रेन के मोर्चे पर इतनी भारी क्यों पड़ी
दस दिन तक यूक्रेन के सैटेलाइट लिंक लगभग 160 किमी/घंटा से तेज़ चलने वाली किसी भी चीज़ पर काम नहीं कर रहे थे। शनिवार को रफ्तार बहाल हुई, लेकिन यह रोक किसने लगाई, इस पर विवाद बाकी है। यह व्यवस्था कैसे काम करती है, रफ्तार क्यों अहम है, और कीव इस पर क्या कर रहा है।
संक्षेप में
स्टारलिंक स्पेसएक्स की व्यावसायिक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है; स्टारशील्ड सेना और सरकारों के लिए स्पेसएक्स की अलग व्यवस्था है, जिसके बारे में एलन मस्क कहते हैं कि उसका मालिकाना और नियंत्रण अमेरिकी सरकार के पास है। यूक्रेन की सेना ड्रोन उड़ाने और टुकड़ियों के बीच तालमेल के लिए दोनों का इस्तेमाल करती है। 14 अक्टूबर की रात से लगभग 160 किमी/घंटा से तेज़ चल रहे टर्मिनलों की सेवा बंद हो गई, जिसके बारे में यूक्रेन कहता है कि इससे रूस के जेट-चालित शाहेद ड्रोनों के खिलाफ उसके तेज़ इंटरसेप्टर ड्रोन ठप हो गए। 24 अक्टूबर तक 400 किमी/घंटा से ऊपर की रफ्तार पर सेवा बहाल हो गई; मस्क कहते हैं कि सीमाएं अमेरिकी सेना तय करती है और यूक्रेन ने स्टारलिंक की शर्तें तोड़ीं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप किसी भूमिका से इनकार करते हैं।
स्टारलिंक और स्टारशील्ड में फर्क क्या है?
स्टारलिंक स्पेसएक्स की वह सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है जो पैसे देने वाले किसी भी ग्राहक के लिए है; स्टारशील्ड स्पेसएक्स की सेना और सरकारों के लिए चलाई जाने वाली अलग सेवा है।
स्टारलिंक कुछ सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर निचली कक्षा में घूमते हज़ारों छोटे उपग्रहों के ज़रिए काम करता है, जो ज़मीन पर पिज़्ज़ा-बॉक्स जितनी डिश से बात करते हैं। उपग्रह पास होने से लिंक इतना तेज़ होता है कि ड्रोन से उसके पायलट तक लाइव वीडियो भेजा जा सके। स्टारशील्ड रक्षा और सरकारी ग्राहकों के लिए स्पेसएक्स की तकनीक का इस्तेमाल करता है। एलन मस्क कहते हैं कि इसका मालिकाना और नियंत्रण अमेरिकी सरकार के पास है, और यूक्रेनी विश्लेषक इसे “भौतिक रूप से एक अलग व्यवस्था और अलग सेवा” बताते हैं।
यूक्रेन इनका इस्तेमाल कैसे करता है?
अपनी ड्रोन लड़ाई चलाने और वहां टुकड़ियों को जोड़े रखने के लिए जहां फोन नेटवर्क और रेडियो काम नहीं करते।
2022 में रूस के पूर्ण हमले के पहले ही दिनों में स्पेसएक्स ने यूक्रेन के ऊपर स्टारलिंक शुरू कर दिया था। घिरे हुए मारियुपोल के रक्षकों ने इसी से बाहर संदेश भेजे, और 2023 में बाखमुत के आसपास की लड़ाई में टुकड़ियों ने इससे तालमेल बिठाया। यूक्रेन की स्टारलिंक सदस्यता का खर्च पोलैंड उठाता है।
आज यूक्रेनी सेना अपने कई ड्रोन सैटेलाइट लिंक से उड़ाती है। एक यूक्रेनी अधिकारी ने समझाया, “स्टारलिंक के साथ आपको रेडियो की भौतिकी से नहीं जूझना पड़ता।” जब पता चला कि रूसी सैनिक तस्करी से लाए टर्मिनल इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यूक्रेन ने स्पेसएक्स के साथ मिलकर 2 फरवरी 2026 से मंज़ूरशुदा टर्मिनलों की सूची लागू की, और फिर अपने मध्यम दूरी के हमलावर ड्रोनों में बड़े पैमाने पर स्टारलिंक उपकरण लगाए।
अक्टूबर में क्या हुआ?
14 अक्टूबर की रात से लगभग 160 किमी/घंटा, यानी 100 मील प्रति घंटा से तेज़ चल रहे टर्मिनलों ने बिना किसी चेतावनी के काम करना बंद कर दिया।
राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के रक्षा तकनीक सलाहकार सेर्ही बेस्क्रेस्तनोव ने कहा, “हमारी रक्षा सेनाओं को इन पाबंदियों की कोई चेतावनी नहीं मिली, और इससे कई अभियान बाधित हुए।” यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि व्यवहार में सीमा अक्सर घोषित आंकड़े से भी कम थी। ज़ेलेंस्की ने इसे “बड़ी गलती” बताया जिसकी कीमत जानों से चुकानी पड़ेगी।
यूक्रेनी विश्लेषकों के मुताबिक साधारण स्टारलिंक 2025 में ही तेज़ ड्रोनों पर काम करना बंद कर चुका था, जबकि स्टारशील्ड 13 अक्टूबर तक चलता रहा।
रफ्तार इतनी अहम क्यों है?
क्योंकि रूस के नए हमलावर ड्रोन जेट इंजन वाले और तेज़ हैं, और उन्हें पकड़ने भेजे जाने वाले इंटरसेप्टर उनसे भी तेज़।
यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी के अनुसार ईरानी शाहेद से निकले रूस के जेट-चालित गेरान-4 की सामान्य रफ्तार 300 से 400 किमी/घंटा है। कुछ यूक्रेनी इंटरसेप्टर ड्रोन 600 किमी/घंटा से ऊपर उड़ सकते हैं। अगर इंटरसेप्टर को पूरी उड़ान में सैटेलाइट लिंक चाहिए, तो 160 किमी/घंटा पर टूटने वाला लिंक उसके किसी काम का नहीं। यूक्रेनी आंकड़े पहले ही बता रहे थे कि इस गर्मी में रूस के जेट इंजन अपनाने के बाद शाहेद को मार गिराने की दर 90% से ऊपर से गिरकर करीब 60% रह गई थी।
रफ्तार की सीमा का असल मतलब
यह सीमा किसने लगाई?
किसी ने सार्वजनिक रूप से नहीं बताया, और हर पक्ष ने दूसरे की ओर इशारा किया है।
मस्क ने लिखा, “रफ्तार या इस्तेमाल पर कोई भी सीमा अमेरिकी सेना और आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति तय करते हैं।” शनिवार को उन्होंने एक नया आरोप जोड़ा: “यूक्रेनी सेना ने स्टारलिंक की सेवा शर्तें तोड़ीं और लोगों को मारने वाले आक्रामक ड्रोन हमलों में इसका इस्तेमाल किया।” बेस्क्रेस्तनोव ने जवाब दिया कि यूक्रेन अपने लंबी और मध्यम दूरी के हमलावर ड्रोनों पर स्टारलिंक का इस्तेमाल “भौतिक रूप से कर ही नहीं सकता”, क्योंकि वे सीमा से काफी कम रफ्तार पर उड़ते हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भूमिका से इनकार करते हैं। मस्क के बारे में उन्होंने कहा, “मैंने उनसे बात नहीं की है। मैंने सुना है कि यह ठीक हो गया है। अगर नहीं हुआ, तो मैं उनसे बात करूंगा।” विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 18 अक्टूबर को कहा था कि यूक्रेन के पास फिलहाल स्टारशील्ड की पहुंच नहीं है और इस पर “बातचीत चल रही है”, जो कीव के बयान से मेल नहीं खाता। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेंटागन से पूछा है कि ये सीमाएं किसने लगाईं।
यह रोक एक तनाव भरे महीने में आई: वॉशिंगटन ने रूसी डीज़ल पर प्रतिबंध हटाए थे, और कीव कहता है कि कुछ दिनों के लिए उसे अमेरिका से मिलने वाली मिसाइल हमलों की पूर्व चेतावनी की खुफिया जानकारी नहीं मिली। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि यह समय संयोग नहीं हो सकता; अमेरिका ऐसे किसी संबंध से इनकार करता है।
क्या अब सब ठीक है?
फिलहाल। 24 अक्टूबर को रक्षा मंत्रालय ने कहा कि स्टारशील्ड 400 किमी/घंटा से तेज़ चल रहे उपकरणों पर काम कर रहा है और कनेक्शन स्थिर है। ज़ेलेंस्की ने कहा, “आज की सबसे अहम बात यह है कि स्टारलिंक और स्टारशील्ड पाबंदी से पहले वाली रफ्तार पर फिर काम करने लगे हैं।”
कीव ने अपना सबक भी लिया है। 22 अक्टूबर को उसके रक्षा मंत्रालय ने फिनलैंड की कंपनियों नोकिया और आइसआई के साथ एक ऐसी सैटेलाइट संचार व्यवस्था बनाने के आशय पत्र पर दस्तखत किए जिस पर यूक्रेन का नियंत्रण हो। लागत या समय सीमा नहीं बताई गई है।
भारत को इसकी परवाह क्यों करनी चाहिए?
क्योंकि यह दिखाता है कि जब किसी देश के अहम लिंक एक विदेशी कंपनी और एक विदेशी सरकार पर टिके हों तो क्या होता है।
स्टारलिंक भारत में ब्रॉडबैंड बेचने से पहले गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है, और यूटेलसैट वनवेब तथा जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस भी। स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन पहले ही कहते हैं कि स्टारलिंक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े करता है। यूक्रेन का अनुभव उस किसी भी सेना या आपात सेवा के लिए एक और तीखा सवाल जोड़ता है जो इस पर निर्भर होने की सोच रही हो: लिंक धीमा या बंद करने का फैसला कौन करता है, और कहां से।