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दिल्ली का एक्यूआई 245 पर, 100 दिन में सबसे खराब; एनसीआर में ग्रैप का पहला चरण लागू

राजधानी में बुधवार को इस मौसम का पहला 'खराब' हवा वाला दिन दर्ज हुआ, जो दस साल में सबसे देर से आया। गुरुवार को पराली का धुआं और बढ़ने का अनुमान है और एक हफ्ते तक राहत के आसार नहीं हैं।

संपादकीय डेस्क से · नई दिल्लीप्रकाशित

मुख्य बातें

  1. बुधवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 245 पर पहुंचा, जो 100 दिनों में सबसे खराब है।
  2. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप का पहला चरण लागू किया।
  3. गुरुवार को दिल्ली के प्रदूषण में पराली का हिस्सा 13% से ऊपर जाने का अनुमान है।

दिल्ली की हवा बुधवार को इस मौसम में पहली बार ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। इसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू कर दिया।

बुधवार शाम तक शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 245 पर पहुंच गया, जो 100 दिनों में सबसे खराब स्तर है। इससे पहले 13 जुलाई को हवा इतनी खराब थी, जब सूचकांक 246 था। मंगलवार को यह आंकड़ा 179 था, यानी ‘मध्यम’ श्रेणी में। दोपहर में जारी सीएक्यूएम के आदेश में दोपहर 2 बजे का एक्यूआई 244 बताया गया और कहा गया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में भी हवा ‘खराब’ श्रेणी में रहेगी।

यह गिरावट दशहरे के एक दिन बाद आई, जब शहर भर में पटाखों से भरे रावण के पुतले जलाए गए थे। हालांकि उत्सव और इन आंकड़ों के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण के अनुसार 2015 से 2025 के बीच दिल्ली की हवा आम तौर पर अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ही ‘खराब’ हो जाती थी। इस साल यह 21 अक्टूबर को हुआ, जो इस अवधि में सबसे देर है।

पहले चरण में क्या होगा

पहला चरण तब लागू होता है जब एक्यूआई 201 से 300 के बीच हो। इसके तहत एजेंसियों को निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल नियंत्रण लागू करना होगा, जिसमें सामग्री ढकना, एंटी-स्मॉग गन चलाना और पानी का छिड़काव शामिल है। बायोमास और नगरपालिका कचरा खुले में जलाने पर रोक है। आयोग चाहता है कि वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच कड़ी हो और साफ तौर पर धुआं छोड़ते और पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों पर कार्रवाई हो।

पूरे क्षेत्र में उद्योगों, ईंट भट्ठों और हॉट-मिक्स प्लांटों की जांच तेज की जाएगी। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आने वाली अंतर-शहरी और अंतरराज्यीय बसें दिल्ली-एनसीआर में तभी आ सकेंगी जब वे बिजली, सीएनजी या बीएस-VI डीजल से चलती हों। आदेश में कहा गया, “नागरिकों से ग्रैप पहले चरण के तहत नागरिक चार्टर का सख्ती से पालन करने का अनुरोध किया जा सकता है।”

सिरसा का पक्ष

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि शहर की योजना पर करीब 30 एजेंसियां काम कर रही हैं, और पहला चरण देर से लागू होने का श्रेय उन्होंने रोकथाम के उपायों और जनभागीदारी को दिया। उन्होंने कहा कि इस साल अब तक दिल्ली में 214 दिन हवा साफ रही, जो कोविड के वर्षों को छोड़कर एक दशक में सबसे ज्यादा है। उनके मुताबिक शहर के प्रदूषण का करीब 30% स्थानीय स्रोतों से और 60 से 65% आसपास के इलाकों से आता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार “बहाने बनाती रही” और कभी पंजाब, कभी उत्तर प्रदेश, हरियाणा या राजस्थान को दोष देती रही।

1 नवंबर से पेट्रोल पंप बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं देंगे, दिल्ली से बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-VI वाहनों पर पाबंदियां लगेंगी और अधिकृत पार्किंग का शुल्क दोगुना होगा, हालांकि मेट्रो पार्किंग इससे बाहर रहेगी। दिल्ली मेट्रो ने कहा कि वह गुरुवार से कामकाजी दिनों में 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरे चलाएगी।

आगे का हफ्ता

आईआईटीएम की डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के ताजा अनुमान में परिवहन सबसे बड़ा अकेला स्रोत है, करीब 20.5%, जबकि पराली का हिस्सा करीब 8% है। अनुमान है कि गुरुवार को पराली का हिस्सा 13% से ऊपर जाएगा और शुक्रवार को घटकर करीब 10% रह जाएगा।

पूर्व चेतावनी प्रणाली के मुताबिक कम से कम 23 अक्टूबर तक हवा ‘खराब’ रहेगी और उसके बाद छह दिन तक खास बदलाव नहीं होगा। बुधवार को इसने गुरुवार सुबह 9 बजे के लिए करीब 342 एक्यूआई का अनुमान लगाया था, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी है। आईएमडी ने 24 और 25 अक्टूबर को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश का पूर्वानुमान दिया है, जिससे पहली राहत मिल सकती है।