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'आज कोई हमला नहीं होगा': ट्रंप ने ईरान पर हमला टाला, कतर के मध्यस्थ तेहरान पहुंचे

एक दिन पहले रविवार को ही हमले की बात कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमला नहीं होगा। तेहरान ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन तक संदेश अब भी पहुंच रहे हैं।

संपादकीय डेस्क से · वॉशिंगटनप्रकाशित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई (फाइल फोटो) (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Daniel Torok / Wikimedia Commons; Foad Ashtari / Wikimedia Commons, Public domain, CC BY 4.0

मुख्य बातें

  1. मिशिगन रवाना होते समय ट्रंप ने कहा, "आज कोई हमला नहीं होगा"।
  2. संकट को ठंडा करने की कोशिशों के तहत रविवार को कतर के मध्यस्थ तेहरान में थे।
  3. ईरान के स्पीकर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका अपनी ही गलती से "दलदल" में फंस गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उस दिन अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। एक दिन पहले ही उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि हमला “शायद कल” हो सकता है।

मिशिगन में चुनावी रैली के लिए व्हाइट हाउस से निकलते समय जब उनसे पूछा गया कि क्या हमले फिर शुरू हो सकते हैं, तो पहले उन्होंने बात टाली। “क्या मैं आपको यह बताऊंगा?” फिर बोले: “जवाब है नहीं, आज कोई हमला नहीं होगा।”

उसी समय कतर के मध्यस्थ तेहरान में थे। यह उस कोशिश का हिस्सा है जो हफ्तों से खाड़ी को तनाव में रखने वाले संकट को कम करने के लिए चल रही है। इस दौरे की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के मुताबिक इसमें वॉशिंगटन से तालमेल किया जा रहा था। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान से भी क्षेत्रीय सुरक्षा पर फोन पर बात की। फिदान ने समुद्री आवाजाही की आज़ादी और स्थायी शांति की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

फैसला मेरा है, ट्रंप बोले

रविवार को इससे पहले फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने अपने विकल्प सीधे शब्दों में रखे। “क्या मैं उनसे समझौता करूं, या उन्हें खत्म कर दूं?” उन्होंने कहा कि काम पूरा करना “बहुत आसान होगा”, जोड़ा कि “हम खेल नहीं खेलते”, और दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब अमेरिका के नियंत्रण में है।

वे कह चुके हैं कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने चेताया है कि उस चुनाव और नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने के बीच के हफ्ते सबसे खतरनाक हो सकते हैं। वॉशिंगटन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है, जिसमें खाड़ी भेजा गया तीसरा विमानवाहक पोत समूह भी शामिल है।

तेहरान ने दरवाज़ा खुला रखा

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि तेहरान ने कूटनीति की खिड़की बंद नहीं की है और मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिकियों तक संदेश अब भी पहुंच रहे हैं, हालांकि बातचीत हफ्तों से ठहरी हुई लगती है। उन्होंने वॉशिंगटन पर एकतरफा मांगें थोपने का आरोप लगाया और कहा कि अमेरिकी अधिकारी बार-बार “पूर्ण आत्मसमर्पण” शब्द इस्तेमाल करते हैं, जिसे कोई ईरानी स्वीकार नहीं करेगा।

ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका अपनी ही गलत गणनाओं से “दलदल” में फंस गया है और उसे खुद ही निकलने का रास्ता ढूंढना होगा। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन का यह सोचना गलत है कि मीडिया का दबाव या सैन्य धमकियां ईरान को झुका देंगी।

विदेश मंत्री अब्बास अराघची का सुर भी यही था। उन्होंने कहा, “युद्ध हो या न हो, हमारी नीतियां वही रहेंगी।”

ईरान की सेना ने रविवार को यह भी कहा कि उसने बंदर अब्बास के ऊपर अमेरिका में बना एक लुकास ड्रोन मार गिराया। यह दावा ईरानी मीडिया में आया है और अमेरिका ने इस पर कुछ नहीं कहा है।

दिल्ली की नज़र क्यों

गालिबाफ को पिछले हफ्ते नई दिल्ली में ब्रिक्स संसदीय मंच में आना था, लेकिन उन्होंने “अप्रत्याशित परिस्थितियों” का हवाला देकर दौरा टाल दिया। इस तनातनी से दुनिया भर में ईंधन महंगा हुआ है: शुक्रवार को ब्रेंट कच्चा तेल 117 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, जो मार्च के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। अक्टूबर की शुरुआत में यह 97 डॉलर से नीचे था। खाड़ी के तेल पर काफी हद तक निर्भर भारत के लिए “हमला” और “समझौते” के बीच का हर झूला उसके कच्चे तेल के आयात की कीमत में दिखता है।

अगला संकेत मध्यस्थों से मिल सकता है। सोमवार तड़के तक न दोहा ने और न तेहरान ने बताया था कि कतर की टीम क्या संदेश लेकर गई या क्या लेकर लौटी।