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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का मुनाफा करीब तीन गुना होकर ₹1,045 करोड़, फंसे कर्ज़ घटे

निजी बैंक ने तिमाही में ₹34,000 करोड़ से ज़्यादा की विदेशी मुद्रा जमा जुटाई। उसके सीईओ के मुताबिक इससे तीन से पांच साल के लिए सस्ता पैसा मिला है।

संपादकीय डेस्क से · मुंबईप्रकाशित
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक शाखा (फ़ाइल फ़ोटो)
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक शाखा (फ़ाइल फ़ोटो)Photo: IDFC First Bank Photos / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

मुख्य बातें

  1. जुलाई-सितंबर में स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा एक साल पहले के ₹352.31 करोड़ से बढ़कर ₹1,044.60 करोड़ हो गया।
  2. सकल एनपीए घटकर अग्रिमों का 1.32% रह गया, जो एक साल पहले 1.86% था।
  3. बैंक ने ₹34,000 करोड़ से ज़्यादा की एफसीएनआर(बी) जमा जुटाई, जिससे कासा अनुपात घटकर 48.4% रह गया।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का जुलाई-सितंबर तिमाही का मुनाफा एक साल पहले के मुकाबले करीब तीन गुना हो गया, क्योंकि फंसे कर्ज़ों के लिए प्रावधान घटे और आय बढ़ती रही। शनिवार को बैंक के बोर्ड ने जो नतीजे मंज़ूर किए, उनके मुताबिक निजी क्षेत्र के इस बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा एक साल पहले के ₹352.31 करोड़ से बढ़कर ₹1,044.60 करोड़ हो गया।

यह अप्रैल-जून के ₹1,074.96 करोड़ से थोड़ा कम है। समेकित आधार पर मुनाफा ₹1,049.17 करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही से 8.59% कम है।

कर्ज़ और मार्जिन

बैंक की शुद्ध ब्याज आय, यानी कर्ज़ पर कमाए और जमा पर चुकाए ब्याज का अंतर, एक साल पहले के मुकाबले 21% बढ़कर ₹6,188 करोड़ हो गई और पिछली तिमाही से 3.6% बढ़ी। ब्याज से कमाई करीब 20% बढ़कर ₹11,921.75 करोड़ और कुल आय ₹14,217.78 करोड़ रही।

कर्ज़ और अग्रिम 30.1% बढ़कर ₹3,46,913 करोड़ हो गए। इस आंकड़े में क्रेडिट सब्स्टीट्यूट और विदेशी मुद्रा जमा के सहारे दिए कर्ज़ शामिल हैं। जमा 25.9% बढ़कर ₹3,48,583 करोड़ हो गई और अकेले इस तिमाही में 11.8% बढ़ी।

प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी. वैद्यनाथन ने आय के मुकाबले लागत की धीमी बढ़त की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “दो तिमाहियों से परिचालन खर्च की बढ़त आय की बढ़त से 500 बेसिस पॉइंट पीछे रही है, लागत-आय अनुपात लगातार घट रहा है और आरओए करीब 1 प्रतिशत है।”

साफ होती बैलेंस शीट

संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार जारी रहा। सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) अप्रैल-जून के 1.51% और एक साल पहले के 1.86% से घटकर सकल अग्रिमों का 1.32% रह गई। शुद्ध एनपीए एक साल पहले के 0.52% से घटकर 0.40% रह गया। प्रावधान और आकस्मिक खर्च ₹1,136.95 करोड़ रहे, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹1,451.88 करोड़ से करीब पांचवां हिस्सा कम है।

पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.67% रहा, जो जून के अंत के 15.05% से कम है लेकिन एक साल पहले के 14.11% से ज़्यादा।

विदेशी मुद्रा जमा की होड़

तिमाही का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा देनदारियों की तरफ था। आईडीएफसी फर्स्ट ने एफसीएनआर(बी) जमा के ज़रिए ₹34,000 करोड़ से ज़्यादा जुटाए। ये विदेशी मुद्रा वाली सावधि जमा हैं, जो प्रवासी भारतीय भारतीय बैंकों में रखते हैं। इससे कुल जमा में कम लागत वाले चालू और बचत खातों (कासा) का हिस्सा 50.1% से घटकर 48.4% रह गया।

वैद्यनाथन ने कहा कि यह सौदा फायदे का रहा। उन्होंने कहा, “₹34,000 करोड़ से ज़्यादा की एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने से हमें 3-5 साल की नकदी घरेलू जमा से 1 प्रतिशत कम लागत पर मिलती है।”

आईडीएफसी फर्स्ट अकेला नहीं है। शनिवार को ही नतीजे देने वाले कोटक महिंद्रा बैंक ने भी अपनी तिमाही में विदेशी मुद्रा जमा में उछाल बताया।

आगे क्या

सोमवार को कारोबार दोबारा शुरू होने पर बाज़ार में इन नतीजों की पहली परीक्षा होगी। पिछले हफ्ते निफ्टी बैंक सूचकांक 2.79% गिरा था। तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक समेत कई और बैंक इस हफ्ते नतीजे देंगे।

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